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Wednesday, 6 February 2019

फिर वही सुबह...

आज शायद 22 साल बाद फिर इस शहर में यह सुबह हुई है। रात को आसमान ने यहाँ धरती को अपने प्रेम से सरोबर कर दिया है। गीली मिट्टी की सुगंध के साथ धरा महक उठी है।
आपके इस शहर में आज फिर हूँ। हर तरफ आपके चिन्ह दिखाई पड़ते हैं। वह नुमाइश ग्राउंड में लगे बड़े से पत्थर पर आपका नाम, घर के हर कमरे में आपके हंसते हुए चेहरे वाली आपकी तस्वीरे और हर मिलने जुलने वाले की जुबान पर आपका नाम।
आपके इस शहर में हूँ आज, इस दिन। शादी के बाद पहली बार आपके जन्मदिन पर। मेरी शादी के समय का वह समय किसी फिल्म की तरह नजरों के सामने घूम रहा है। एक दिन बाद मेरी एक नई ज़िन्दगी शुरू होने वाली थी और एक दिन पहले आपने अपने जन्मदिन का केक उसी उत्सव स्थल पर काट कर जैसे मौन संदेश दिया था कि जाए तू कहीं भी हम हैं साथ और हमेशा रहेंगे। तब से आजतक आपको हमेशा अपने साथ ही पाया । हालांकि एक सुरक्षा कवच हमेशा अपने शीश पर पाया, जब आप सदेह थे तब भी और अब जब सिर्फ एहसास है तब भी। पर फिर भी मन कहता है कि काश एक बार फिर आकर केक काट कर आप कह जाते…मैं हूँ न !
हैप्पी बर्थडे पापा।

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