Enter your keyword

Sunday, 21 February 2016

क्योंकि....

विश्वविद्यालय मुझे आकर्षित करते हैं -

क्योंकि- विश्वविद्यालय  WWF  अखाड़ा नहीं, ज्ञान का समुन्दर होता है. जहाँ डुबकी लगाकर एक इंसान, समझदार, सभ्य और लायक नागरिक बनकर निकलता है. 

क्योंकि- शिक्षा आपके व्यक्तित्व को निखारती है, आपको अपने अधिकार और कर्तव्यों का बोध कराती है. वह खुद को सही तरीके से अभिव्यक्त करना सिखाती है. 

क्योंकि- आप जब वहां से निकलते हैं तो अपने अपने क्षेत्र में प्रवीण होते हैं और उस समाज के हित में अपना योगदान देने के काबिल होते हैं जिसने आपको यहाँ तक पहुँचाया है. 

क्योंकि- शिक्षा आपको विनम्रता और धैर्य सिखाती है. इसलिए यदि आप अपने और जनहित के लिए लड़ते भी हैं तो कायदे से, एक पढेलिखे, सभ्य नागरिक की तरह, न कि किसी गली के अनपढ़ गुंडे की तरह. 

क्योंकि- यहाँ आपको राजनीती शास्त्र पढ़ाया जाता है कि आगे चलकर आप एक अच्छे राजनेता बन सकें, परिसर में राजनीतिक खेमों से प्रभावित राजनीति नहीं की जाती।

क्योंकि- यहाँ कक्षाएं होती हैं, लेक्चर हॉल होते हैं, प्रयोगशालाएं होती हैं.... संसद भवन नहीं होते। 

क्योंकि- विश्वविद्यालय परिसर में डर नहीं लगता, वहां नहीं होती कोई असामाजिक, आपत्तिजनक गतिविधियाँ। वहां महसूस होता है एक सुकून, सुरक्षा, और सकारात्मक ऊर्जा।

क्योंकि- जब आप वहां होते हैं तो सिर्फ एक छात्र होते हैं जो सीखना चाहता है, ज्ञान हासिल करना चाहता है.

क्योंकि- यहाँ होते हुए मैं फिर से बन जाना चाहती हूँ एक विद्द्यार्थी और जीवन भर बने रहना चाहती हूँ.

Yes universities fascinate me ... 

एक दिन, एक बेहतरीन विश्वविद्यालय (The University of Nottingham) और सुकून




13 comments:

  1. Bilkul didi...I agree with u.

    ReplyDelete
  2. बिल्कुल सही बात शिखा एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स का महत्वपूर्ण योगदान होता है

    ReplyDelete
  3. बिल्कुल सही बात शिखा एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स का महत्वपूर्ण योगदान होता है

    ReplyDelete
  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (22-02-2016) को "जिन खोजा तीन पाइया" (चर्चा अंक-2260) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " 'नीरजा' - एक वास्तविक नायिका की काल्पनिक लघु कथा " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  6. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 22 फरवरी 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  7. शिखा जी, बिल्कुल सहीं कह आपने! विश्वविद्यालय छोडे सालों होने के बाद भी आज भी मन मचल उठता है वहं जाने के लिए, कुछ न कूछ सिखने के लिए!

    ReplyDelete
  8. क्या सच में सभी विश्वविद्यालय ऐसे ही हैं ... भारत के भी ...

    ReplyDelete
  9. विद्यालय ज्यादा याद आते हैं

    ReplyDelete
  10. बिल्कुल सटीक बात दी ..तस्वीरें बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  11. gyan ke mandir hai yaha aatmik shanti ke sath disha milti hai

    ReplyDelete

पसंदीदा पोस्ट्स

ईमेल से जुड़ें

संपर्क

Name

Email *

Message *