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Tuesday, 11 March 2014

अलगनी पर टंगी उदासियाँ ...



मैंने अलगनी पर टांग दीं हैं 
अपनी कुछ उदासियाँ 
वो उदासियाँ 
जो गाहे बगाहे लिपट जाती हैं मुझसे 
बिना किसी बात के ही 
और फिर जकड लेती हैं इस कदर 
कि छुड़ाए नहीं छूटतीं 
ये यादों की, ख़्वाबों की 
मिटटी की खुश्बू की उदासियाँ 
वो बथुआ के परांठों पर 
गुड़ रख सूंघने की उदासियाँ 
और खेत की गीली मिटटी पर बने 
स्टापू की लकीरों की उदासियाँ 
खोलते ही मन की अलमारी का पल्ला 
भरभरा कर गिर पड़तीं हैं मुझपर 
और सिर तक ढांप लेती हैं मुझे 
भारी पलकों से उन्हें फिर 
समेटा भी तो नहीं जाता 
तो कई कई दिन तक उन्हीं के तले 
दबी, ढकी, पसरी रहती हूँ.
इसलिए अब उन्हें करीने से 
मन के कोने की एक अलगनी में टांग दिया है 
कि एक झलक हमेशा मिलती रहे चुपचाप 
अब वो भी सुकून से हैं और मैं भी। 

25 comments:

  1. पर यही उदासियाँ तो हमारा सब से बड़ा खजाना भी है ... है न ... इन के बिना हम भी तो अधूरे से ही है ... तो न टांगों इन्हें ... साथ समेटे रहो ... :)

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  2. दबी, ढकी, पसरी रहती हूँ.
    इसलिए अब उन्हें करीने से
    मन के कोने की एक अलगनी में टांग दिया है
    कि एक झलक हमेशा मिलती रहे चुपचाप
    अब वो भी सुकून से हैं और मैं भी।
    sunder bhav aur bimb sath me chitr bhi kamal ka lagaya hai
    rachana

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  3. अच्छी लगती हैं न उदासियाँ......???
    अलग अलग रंग की अलग अलग नाप की उदासियाँ.......
    <3 lovely lines!!

    अनु

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  4. आपकी उदासियाँ भी खूबसूरत हैं ..।

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  5. ये उदासियाँ भी बहुत कुछ कह जाती हैं.

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  6. उदासियाँ ही तो अपनी हैं।

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  7. ये उदासियाँ ही हैं या यादें ... जो भी हैं खुद कि ही हैं ... जैसे मर्जी से रखो उभर ही आयंगी किसी न किसी बहाने ... भावपूर्ण अभिव्यक्ति है ...

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  8. यादों की उदासियाँ भी मीठी मीठी सी होती हैं !

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  9. कि एक झलक हमेशा मिलती रहे चुपचाप
    अब वो भी सुकून से हैं और मैं भी।........
    यादों की उदासियाँ...

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  10. यादें -
    और यादों के पीछे
    भागते हुए
    अक्सर हो जाता है
    मन उदास
    इसलिए नहीं कि
    कुछ खराब था वक़्त
    या आज खराब है
    बस छूट गया है
    पीछे बहुत कुछ
    और मन है कि
    पकड़ लेना चाहता है
    वो हर पल
    जिससे जुड़े थे
    हम और हमारा मन .
    अच्छा हुआ
    जो तुमने
    टांग दिया है
    उदासियों को
    अलगनी पर
    बस सुकून ही तो
    होना चाहिए जीवन में . :):)

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  11. हाय ये उदासियाँ अलगनी पर ही चैन कहाँ लेने देंगी !
    मगर कविता अच्छी लिखवा देती हैं !

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  12. उदासियों की पदचाप लिए खूबसूरत सी कविता , कवियत्री ने तो विषाद में भी ख़ूबसूरती ढूँढ ली. बहुत सुन्दर.

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  13. badi acchi hoti hai ye udaciyan !!! alag-alag shakal,alag maap or bhi na jany khud main kya-kya samety hue.............par sach bada sukun deti hai udaciyan.......bahut sundar...........

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  14. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन वर्ल्ड वाइड वेब को फैले हुये २५ साल - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  15. अलगनी पर टँगी कहाँ रहती हैं ,बार-बार उड़ आती हैं जब चाहे तब .

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  16. पर कभी कभी 'कोई' चुपके से इन उदासियों को अलगनी से उतार ले जाता है और बदले में टांग जाता है वहाँ सिर्फ खिलखिलाहटें । पर वह 'कोई' बन जाता है "कोई मिल गया" ।

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  17. बहोत प्यारी लगी यह रचना शिखा .....एक सुंदर उपाय ......

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  18. आप टांगती रहिये उदासियाँ अलगनी पर... यादों का झोंका उनसे खेलता हे रहेगा. जब भी झाँकेंगी, कोई भी उदासी अपनी जगह पर नहीं मिलेगी. उदासियाँ टँगीं तो रह सकती हैं बँधी नहीं रह सकतीं!!
    बहुत अच्छी कविता!!

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  19. अच्छा है इन उदासियों को घर में किसी कोने में ठुकी कील पे टांग दिया जाये...सुंदर रचना।।।

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  20. उदासियाँ को एकान्त की धूप दे दें, सूख कर गिर जायेंगी।

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  21. chup chup hasti rahti hai khampshiyan teri.
    kai rangon me chamak rahi udasiyan teri .

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  22. beautiful lines! I could almost feel as if I am standing infront of an almirah and saying all this! touching!

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