Enter your keyword

Monday, 29 April 2013

जंगल, फन और "मोहब्बतें"...

मैंने अपनी पिछली गाँव वाली पोस्ट में जिक्र किया था कि वहां की योजना बनाते वक़्त बच्चों के थोबड़े  सूज गए थे,और हमें समझ में आ गया था कि जब तक इन बच्चों के लायक भी किसी स्थान का चयन नहीं किया जाएगा हमारी भी गाँव यात्रा खटाई में पड़ी रहेगी। अपनी आँखों और मन को विटामिन G देने के लिए जरूरी था की  उनके विटामिन M (मस्ती ) का इंतजाम किया जाता। 

अभी इसी विषय पर जब दिमाग , मन और जेब की मंत्रणा चल रही थी इत्तेफाकन तभी टीवी पर फिल्म मोहब्बतें (यश  चोपड़ा निर्देशित, अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ खान आदि अभिनीत) दिखाई जा रही थी ,शायद पहली बार किसी फिल्म से इतना डायरेक्ट फायदा हुआ , याद आया कि उसमें दिखाया जाने वाला गुरुकुल यहीं कहीं लन्दन के आसपास का कोई ऐतिहासिक महल है, तुरंत ही गूगल बाबा से संपर्क किया गया तो मालूम हुआ कि लन्दन से करीब 109 मील दूर ही यह लॉन्गलीट नाम की जगह है जहाँ यह भवन है, जिसका नाम भी "लॉन्गलीट हाउस" है और इसी कैंपस में है यू के का सबसे बड़ा सफारी और वहीँ पर है बच्चों के लिए एडवंचर पार्क भी। 
अब बच्चों को खुश करने के लिए और एक दिन हमारी खातिर उन्हें गाँव झिलवाने के लिए इस थ्री इन वन से अच्छा उपाय हमें नहीं सूझा, शाहरुख़ खान के प्रशंसक, खुले में दुनिया के जंगली जानवर देखने का रोमांच और उसपर एडवंचर पार्क भी ,भला इससे ज्यादा आकर्षक ऑफर उनके लिए और क्या हो सकता था. अत: सर्वसम्मति से इस योजना पर फाइनल मुहर लगा दी गई। और हम निकल पड़े अपनी दो दिन की यात्रा पर। जिसमें पहला दिन बच्चों के अनुसार हमें ब्रिटेन के गांवों की ख़ाक छाननी थी और फिर दूसरे  दिन लॉन्गलीट में आनंद से गुजारना था. 


अत: एक दिन प्रकृति के बीच टहल कर हमने रुख किया लॉन्गलीट का। यूँ लन्दन से करीब ढाई घंटे का  सड़क का सफ़र है परन्तु हम जहाँ से जाने वाले थे वहां से सिर्फ 45 माइल था और ज्यादा से ज्यादा डेढ़ घंटा लगने वाला था।मौसम बसंत का हो और आप यूरोप के कंट्री साईट में ड्राइव कर रहे हों तो ये डेढ़ घंटा तो जैसे यूँ बैठे और यूँ पहुंचे सा प्रतीत होता है अत : जैसे पलक झपकते ही हमें लॉन्गलीट की सीमा दिखाई देने लगी थी। 
सुबह का समय था और हमने वहां की तीनो जगहों का संयुक्त, पूरे दिन का टिकट ले रखा था इसलिए निर्णय किया गया कि पहले सफारी का लुत्फ़ उठाया जाए। 

सैकड़ों एकड़ भूमि पर बना यह ड्राइव थ्रू सफारी यू के का सबसे बड़ा सफारी है और कहा जाता है की अफ्रीका के खुले सफारी के बाद यही पहला भी है, जिसे 1966 में पहली बार आम जनता के लिए खोला गया, जहाँ शेर, चीता जैसे जंगली जानवर जंगल की तरह बाकी पशुओं के हाथ में हाथ डाल कर बेफिक्री से घुमा करते हैं और आप अपनी कार के बंद शीशों के एकदम सामने उन्हें उनकी हर प्रकार की प्राकृतिक अवस्था में देख सकते है।
सो हम अपनी कार लेकर उस जंगल में प्रवेश कर गए। 

पहले नजर आये जिराफ़, हिरन, जेब्रा जैसे शाकाहारी और मनुष्य को नुकसान न पहुँचाने वाले जीव जंतु। इसीलिए तब तक अपनी कार की खिड़कियाँ खोलकर चलने की इजाजत थी। फिर आये बन्दर, और तब सन्देश आया कि खिड़कियों के शीशे न खोले जाएँ। क्योंकि इन इंसानों के पूर्वज कहे जाने वाले जीव को उछल कूद की आदत है और लगभग सभी कारों पर बड़ी शान से वे सवारी करते जा रहे थे। हमने भी बड़ी कोशिश की, कि इनमें से कोई हमारी भी कार की छत पर विराजमान हो जाये परन्तु शायद हमारी कार के अंदर वे अपनी ही प्रजाति के दो, उन से भी खतरनाक जीवों से डर गए और पास नहीं फटके , आखिर उन्हें वहीँ छोड़ कर हम आगे  बढ़े । और फिर ऐसे ही कुछ छोटे बड़े जानवरों को निहारते , पुचकारते , खिलाते हम पहुंचे जंगल के राजा के दरबार  में , जहाँ प्रवेश करने से पहले खतरे और सुरक्षा की हिदायतों के अलावा थे दो बड़े बड़े लोहे की सलाखों के गेट, जो कि एक- एक करके ऐसे खुलते हैं जैसे बता रहे हों कि सावधान! अब आप खतरनाक ज़ोन में प्रवेश करने वाले हैं। और फिर शुरू होता है वह दृश्य जिसे देखकर खुद अपनी ही आँखों पर यकीन नहीं होता, निमग्न अपनी ही धुन में ,बेफिक्र  घूमते , खाते ,सोते , निहारते जंगल के वे जीव जिन्हें यूँ खुला देख सांस अटक जाए , इतने खूबसूरत लगते हैं कि अपनी कार से उतर कर उनके साथ खेलने को जी कर आये। सबसे ज्यादा कारों का कारवां वहीँ देखने को मिलता है। हर कोई जितना हो सके वहां रुक कर उन दृश्यों को आँखों में भर लेना चाहता है।, परन्तु पार्क में अभी और भी बहुत कुछ देखना बाकी था अत : सभी धीरे धीरे आगे बढ़ते जा रहे थे और फिर उसके बाद चीता , हाथी , गैंडा आदि सभी जंगल वासियों से मिलते मिलाते हम उनकी गृह सीमा से बाहर आ गए .


अब बारी थी एड्वंचर पार्क की - जिसमें बच्चों के झूलों , पार्क , खाने पीने के स्टाल के अलावा मुख्य आकर्षण था - "एनीमल किंगडम" जहाँ दुनिया के दुर्लभ जीवों को करीब से देखा जा सकता है, और एक बड़ी सी झील में विचरते सी लायन को देखने के लिए क्रूज की सैर की जा सकती है . उस नौका विहार के दौरान उन सी लायंस  का नौका से दर्शकों द्वारा फेंकी गई मछलियों को पाने के लिए उछल उछल कर आना , एक  दूसरे  से टक्कर लेना और अपनी मार्मिक सी गुर्राहट में खाने के लिए चिल्लाना एक अजीब सा रोमांच पैदा करता है।
 
इसके अलावा बच्चों के लिए भूल भुलैया , जंगल की सैर करने के लिए छोटी सी रेलगाड़ी और "आसमान के शिकारी " नामक एक शानदार पक्षियों का एक शो भी होता है और यह सब मिलकर पिछले ६ ०  वर्षों से एक पारिवारिक पिकनिक के लिए बेहतरीन और सर्वप्रिय जगह के रूप में इस जगह की पहचान बनी हुई है. 

अत: इन सभी जगहों का  आनंद  लेने के बाद जब हम बाहर निकले तो वहां बर्गर , पिज़्ज़ा  आदि खाद्य पदार्थों के स्टाल और कुछ कैफ़े से आती हुई सुगंध ने पेट के चूहों को भी कूदने का मौक़ा दे दिया अत: उन्हें शांत करने के पश्चात हमने प्रवेश किया उस महल में जिसे देखने के लिए हम अब तक बेताब थे और जो एक तरफ बड़ी खूबसूरत झील , दूसरी तरफ लंबा हरा मैदान और अपनी उत्कृष्ट वास्तु कला से हमें सुबह से ही लुभा रहा था।

करीब 900 एकड़ भूरी मिट्टी के मैदान पर बना यह "लॉन्ग लीट हाउस" ब्रिटेन में उच्च एलिज़ाबेटन वास्तुकला का सबसे अच्छा उदाहरण है और आम जनता के देखने के लिए खुले सबसे सुंदर और आलीशान घरों में से एक माना जाता है.
1568 में सर जॉन थायेन द्वारा बनाया गया, लॉन्ग लीट हाउस, बाथ के सप्तम मार्कीस (राजकुमार) अलेक्जान्द्र थाएन का घर है। जिसका दौरा 1575 में एलिजाबेथ प्रथम ने किया और उनके हस्ताक्षर वहां रखी एक पुस्तक में अब भी दृष्टिगत हैं. यह पहला ऐसा शानदार घर था जिसे 1 अप्रैल 1949 को पूरी तरह से व्यावसायिक आधार  पर जनता के लिए खोला गया. 




महल में प्रवेश करते ही एक तरफ कुछ राजसी पोशाक लटकी हुई दिखाई देती हैं जो कि दर्शकों के लिए हैं। जिसे पहन कर यदि वे चाहें तो पूरे महल के दर्शन कर सकते हैं और बेशक कुछ समय के लिए ही सही खुद के एक राजसी परिवार का सदस्य होने का मुगालता पाल सकते हैं। अत: यह कसर हमने भी नहीं छोड़ी और एक अच्छा सा गाउन लटका के आगे प्रस्थान किया। अब शुरू होते थे राजसी परिवार की भव्यता को दर्शाते वे बड़े बड़े आलिशान कमरे जिनमें शामिल हैं बड़े बड़े पुस्तकालय , खाने के  कमरे जो भव्य बर्तनों से सजे हुए थे , बैठने , सोने और नहाने के कमरे , श्रृंगार गृह , आलीशान लॉबीज़ और सलून जो अपने भव्य इतिहास के साथ अपनी अनुपम बनावट की कहानी भी कहते चलते है।

महल की दिवार पर बने बड़े पारिवारिक वृक्ष के अलावा  एक जगह ऐसी भी है,जो एक अनुचर के वध की गाथा कहती है। एक किंवदंती के  अनुसार वेमाउथ की दूसरी वेसकाउनटेस लूसिया कॉरट्रेट जिसे "ग्रे लेडी" के नाम से जाना जाता है, की आत्मा इस महल में निवास करती है जो अपने उस वफादार अनुचर को ढूंढती है, जिसका इस जगह पर क़त्ल कर के दफना दिया गया था। और बाद में इस महल की मरम्मत के दौरान एक कंकाल और शुरूआती सत्रहवी शताब्दी के कुछ कपडे इस जगह से बरामद हुए थे, माना जाता है कि वे इसी अनुचर के ही थे. 

इस तरह इस महल की भव्यता और इतिहास को देख - समझ कर ब्रिटेन के एक भूतिया महल को देखने की भी इच्छा पूर्ति के साथ हम इस आलिशान घर से जब बाहर निकले तो उन राजसी चोगों को उतार कर वापस करते हुए एक युग से वापस वर्तमान में दाखिल होने का एहसास लिए हुए थे। 
और इसी एहसास के साथ वहां की एक दूकान से एक सुविनियर खरीद कर हमने वापसी का रास्ता ले लिया।
इस सिर्फ एक दिन में हमने गुजारा था बेहद खुशनुमा , रोमांचकारी और मनोरंजक समय जो आगे कुछ महीनो के लिए शहरी भाग दौड़ से टक्कर लेने के लिए जरूरी ऊर्जा देने के लिए काफी था .


37 comments:

  1. सही है इंसान के लिए विटामिन बेहद जरूरी है ... चाहे ... G हो या M ... समय समय पर दोनों का ही सेवन करते रहना चाहिए ... ;)

    ReplyDelete
  2. यात्रा वृतांत में तो आपको महारत हासिल है....
    सुन्दर तस्वीरें....और बाकी तस्वीरे आपके शब्दों से खीच ली...

    अनु

    ReplyDelete
  3. रोचक ढंग से प्रस्तुत वृत्तान्त, जंगल के बीच कितना कुछ..

    ReplyDelete
  4. आनंद आया घूमकर .... और जानकारी भी मिली

    ReplyDelete
  5. yatra vritant ke liye yatra jaruri hoti aur fir shabd.. dono me maharat haasil hai... aisee yatrayen jahan ham soch bhi nahi sakte... aur soch/shabd ka jabab nahi...:)
    too good :)
    rochak.....

    ReplyDelete
  6. वाह...मज़ेदार यात्रा वृतांत. खूब मज़ा आया शिखा जैसे तुम्हारे साथ घूम रहे हों :)

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार के "रेवडियाँ ले लो रेवडियाँ" (चर्चा मंच-1230) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  8. bahut sundar foto sahit yatra ki janakari ...

    ReplyDelete
  9. हाय ! हम भटकते रहे जंगल जंगल और सारे शेर पहुँच गए विलायत में। सचमुच शेरों को इतने पास से स्वछन्द विचरते देखना बड़ा मनमोहक लगता है। मोहब्बतें वाला महल देखकर मोहब्बतें की याद आ गई। शानदार पोस्ट।

    ReplyDelete
  10. सुंदर चित्र और जीवंत चित्रण ..... आपने मन से लिखा है, वहां जाकर ज़रूर बहुत अच्छा ही लगा होगा ....

    ReplyDelete
  11. खुशनसीब है की वहां के नॅशनल पार्क में जानवर है , यहाँ हम हजारी बॉग में गए थे बाहर तो बड़े बड़े जानवरों की फोटो लगी थी , अन्दर जब भैस को चराते चरवाहों को देखा तो सारी पोल खुल गई एक हिरन तक न दिखा हा अन्दर जंगल में रिसोर्ट तक बन गए थे , सोचिये ये तो हालत थी ।

    ReplyDelete
  12. समझ में नहीं आ रहा था कि आलेख पढ़ें या चित्र देखें। १६ वीं सदी के भवन कोक रख रखाव काबिले तारीफ़ है.

    ReplyDelete
  13. बहुत सुंदर प्रस्तुति ! घुमने में मजा आ गया!

    ReplyDelete
  14. एक सम्पूर्ण पर्यटन और संस्मरण -इतना कुछ एक साथ ? भाई वाह ! भारत में तो यह पॅकेज दुर्लभ है !बंदरों की मुलाक़ात उनके आधुनिक संस्करणों से होनी चाहिए थी :-)

    ReplyDelete
  15. सभी चीजे सुन्दर होती हैं देखने का नजरिया और प्रस्तुतीकरण उसे और भी खुबसूरत बना देता है .....

    ReplyDelete
  16. रोचक यात्रा का रोचक वर्णन ।

    ReplyDelete
  17. उम्दा जानकारी भरी यह पोस्ट...किन्तु काश की आप अपनी राजसी पोषक वाली तस्वीर भी डालते तो सोने मे सुहागा होता .. :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. देखिये एक डाली है, बेटी पहन के घूम रही है :).

      Delete
  18. बहुत सुन्दर दृश्यावलि है.

    ReplyDelete
  19. अच्छा रहा यह जानना भी और घूमना भी .....!!!

    ReplyDelete
  20. बढिया प्रस्तुति

    ReplyDelete
  21. वाह बहुत खूब |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    ReplyDelete
  22. बहुत जीवन्त वर्णन -चित्रों ने और आनन्द ला दिया !

    ReplyDelete
  23. आपके साथ हमको भी मिला विटामिन जी और एम् भी !
    काश ऐसा कुछ इंतजाम भारत में भी होता!
    महा रोचक !!

    ReplyDelete
  24. वाह शिखा ..मज़ा आ गया ...इतना जीवंत डिस्क्रिप्शन .....उस जगह को देखने की उत्कंठा के साथ एक तृप्ति भी हुई ....की एक वर्चुअल टूर तो कर ही लिया ...आगे मौका लगा तो साक्षात् भी देख लेंगे ....!!!

    ReplyDelete
  25. रोचक यात्रा संस्मरण ..... बढ़िया रहा ये थ्री इन वन पैकेज .... आप यूं ही यात्राएं करिए और हमें घुमाइए जी और एम विटामिन देते रहिए ।

    ReplyDelete
  26. itni acchhi trip mujhe bhi aana hai :-)

    ReplyDelete
  27. आपके साथ साथ हम भी घूम आए ... रोचक वृतांत ... सभी फोटो लाजवाब, मस्त ... ओर विटामीन जी ओर एम् भी ले लिया ....

    ReplyDelete
  28. रोचक यात्रा संस्मरण... परिवार के साथ सुखद रहा.

    ReplyDelete
  29. मज़ेदार यात्रा वृतांत

    ReplyDelete
  30. तस्वीरें फेसबुक पर देखी थीं और आज इनके बारे में पढकर तो बस विटामिन एम् की सारी कमी पूरी हो गयी.. वैसे भी लेखन की इस विधा पर आपकी पकड़ देखते बनती है, पढ़ने वाले को पकड़कर बिठा लेती हैं!! शुक्रिया इतने अच्छे यात्रा वृत्तांत का!!

    ReplyDelete
  31. बहुत ही रोचक आलेख
    आप शब्दों से यूं घुमवाती हैं ,कि लगता है ,अपनी आंखो से देख रही हूँ,वहीं जाकर ...

    ReplyDelete
  32. ऐसा लगा कोई आडियो देख रहे हों
    आप यात्रा को इतना रोचक बना देती हैं कि लगता है हम वहीँ है
    शब्दों की जादूगिरी तो कोई आपसे सीखे
    बधाई

    आदरणीया मेरे ब्लॉग में भी पधारें बेहद ख़ुशी होगी
    एवं लेखन को उर्जा मिलेगी
    आपके विचार की प्रतीक्षा में
    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    jyoti-khare.blogspot.in
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

    ReplyDelete
  33. आपने बडी खूबसूरत जगह की सैर कराई।

    ReplyDelete

पसंदीदा पोस्ट्स

ईमेल से जुड़ें

संपर्क

Name

Email *

Message *