Enter your keyword

Monday, 23 April 2012

डूबते सूरज की चमक ..

बचपन से राजा महाराजाओं ,राजघरानो के किस्से सुनते आये हैं.उनके वैभव, राजसी ठाट बाट, जो कभी भी किसी भी हालत में कम नहीं होते थे. बेशक जनता के घर खाली हो जाएँ पर राजा का खजाना कभी खाली नहीं होता था.. राज परिवार में से किसी की  भी सवारी नगर से निकलती तो सड़क के दोनों और जनता उमड़ पड़ती.बच्चे ,बूढ़े, स्त्रियाँ सभी करबद्ध खड़े जयजयकार करते रहते.घर में बच्चे भूखे हों फिर भी राजा को भेंट दी जाती. राज्य में अकाल पड़े या कोई और आपदा हो तो  जनता पर कर बढ़ा दिए जाते परन्तु राजसी वैभव और रिवाजों पर कोई फर्क  नहीं पड़ता. कहने का आशय है कि देश की जनता की गरीबी का कोई असर राजा या राजघराने पर कभी नहीं होता था.

तब से अब तक कई सदियाँ बीत गईं,.औद्योगिक  क्रांति हुई, ह्युमन राईट की बातें की जाने लगीं. राजे रजवाड़े दुनिया से ज़्यादातर ख़तम हो गए .कहीं  इक्का दुक्का ही बचे. पर उन में राजसी वैभव  और उसके प्रदर्शन का रिवाज़ जस का तस बना रहा.इस पर ना किसी व्यवस्था का फरक पडा ना जाति,  धर्म, देश या परिवेश का.


इन्हीं कुछ चुनिन्दा रजवाड़ों में एक मुख्य है इंग्लैंड,जो एक समय में विश्व का सबसे बड़ा साम्राज्य था. जिसके लिए कहा जाता था कि सूरज ब्रिटेन के साम्राज्य में ही उदय भी होता है और अस्त भी.उस दौरान अपने गुलाम देशों से बहुत सा बैभव उन्होंने बटोरा और सदियों तक शासन किया.कालांतर में गुलाम देश आजाद होते गए और ब्रिटेन के साम्राज्य के साथ ही इसकी आर्थिक स्थिति भी सिकुड़ती गई.और आज इंग्लैंड भी बाकी देशों की तरह आर्थिक मंदी से गुजर रहा है.और ऐसे दौर में इंग्लैंड की रानी इस वर्ष अपनी हीरक जयंती मना रही हैं.और इसी उपलक्ष  में देश भर में तैयारियां जोरों पर हैं,तरह तरह के आयोजन शुरू हो गए हैं इनमें ही एक के तहत रानी ने अपने जनता से मिलने का दौरा  ( जुबली टूर ) पिछले दिनों रेडब्रिज नाम के इलाके से शुरू किया.इस इलाके में उसदिन करीब १ किलोमीटर तक सुबह ७ बजे से ही लगभग १०,००० लोग जमा हो गए थे.इलाके के सभी प्राईमरी और सेकेंडरी  स्कूलों के कुछ चुनिन्दा बच्चों को रानी से मिलने का गौरव प्रदान करने के लिए  वहीँ सड़क पर धूप में घंटों पहले जमा कर दिया गया.सबके हाथों में यूनियन जेक,पोस्टर थे. माँएं अपने नवजात बच्चों को लिए रानी के दुर्लभ दर्शनों के लिए घंटो सड़क पर खड़ी इंतज़ार कर रहीं थीं. निर्धारित समय पर रानी की सवारी आई साथ में एडिनबरा के राजकुमार भी.कार से उतर कर दोनों तरफ लोगों की भीड़ से घिरी एक सड़क पर कुछ दूर चलीं, जो लोग सड़क के निकट थे उन्हें एक झलक नसीब हुई. उसके बाद उन्होंने कुछ औपचारिकतायें निभाईं फिर वह अपनी कार में स्कूली बच्चों के बीच से निकलीं, बच्चों को कार से एक हाथ हिलता दिखाई दिया और कुछ बड़े बच्चों को एक झलक चेहरे की भी मिल गई .और बस हो गया जनता का रानी का गौरवपूर्ण दर्शन समारोह संपन्न.और बच्चे रानी से मिलने का गर्वित अहसास लिए लौट आये.


इस उपलक्ष्य में लन्दन के मेयर बोरिस जोंसन ने २५०० स्कूलों में एक मीटर का यूनियन जेक बांटने का इरादा किया है जिसकी कीमत £२०,००० तक आएगी.उनका कहना है लन्दन के स्कूली बच्चों को अपने गौरव शाली अतीत पर गर्व होना चाहिए और रानी के इस हीरक जयंती के उपलक्ष  में झंडे फहराने चाहिए.
वहीँ भारत में पैदा हुए इस्ट इंडिया कम्पनी के चीफ एक्ज्यूकेटिव संजीव मेहता ने इस उपलक्ष में दुनिया का सबसे महंगा सुविनियर (स्मृति चिन्ह ) बनाया है.£१२५,००० के सोने के इस सिक्के पर हीरों का मुकुट पहने रानी की छवि अंकित है.उन्होंने १किलो के ऐसे ६० सिक्के बनवाये हैं जो रानी के स्वर्णिम ६० सालों के शासन काल को दर्शाते हैं. ६० सिक्के चांदी के भी बनाये जायेंगे,हर एक कीमत £२५,००० होगी.संजीव मेहता के अनुसार यह पूर्व ब्रिटिश साम्राज्य रूपी मुकुट में एक गहने के रूप में भारत की प्रतिष्ठा का प्रतीक है.और  देश की इतने वर्षों तक सेवा करने वाली इस महिला को सम्मान है.
पूरा यूरोप किस आर्थिक मंदी से गुजर रहा है अब यह छुपा नहीं. पर बढ़ता बेरोजगार और गरीबी जैसी समस्याओं का असर इस वैभव प्रदर्शन पर पड़ता कहीं भी दिखाई नहीं देता.क्योंकि हालात कैसे भी हों जनता पर कर बढ़ाने का सुगम उपाय तो आज भी है.आम सुविधाओं पर फीस, जुर्माना, इलाज आदि सभी पर बढ़ा ही दिया गया है.जरुरत पड़ने  पर और बढाया जा सकता है.परन्तु राजसी वैभव के प्रदर्शन से कोई समझौता संभव नहीं.आखिर वर्षों पुरानी साख और गौरवपूर्ण इतिहास का सवाल है.


नवभारत (अवकाश २२/४/२०१२) से सभार .

53 comments:

  1. gauravpurn itihas ko deekhane ke liye apne ko kangaal bana dena.....:)
    par koi nahi ho jaye ye angrej kangaaal! hame to achchha hi lagega:-D
    apart from joke... Shikha, aap ki reporting itni pyari hoti hai, ki jis se koi matlab nahi, fir bhi ham sab samay dete hain, usko padhte hain...bahut behtareen!
    navbharat times pe aapke aalekh ke liye badhai aur shubhkamnayen:)

    ReplyDelete
  2. queen is queen after all.......

    ब्रिटेन में आज भी जनता, रानी को दिल से चाहती है और इज्ज़त देती है...हाँ मगर उनका प्रतिशत धीरेधीरे कम होता जा रहा है.....व्यवहारिक कारणों की वजह से

    सादर.

    अनु

    ReplyDelete
  3. राजसीपन बरकरार है इस परम्‍परा में.

    ReplyDelete
  4. सार्थक शीर्षक.

    ReplyDelete
  5. सार्थक लेख है और इसमें ब्रिटेन के राजसिपन का स्पस्ट चित्रण है |

    ReplyDelete
  6. एक साम्राज्य जिसमें कभी सूरज नहीं डूबता था और अब डूबते सूरज की चमक.. इस आर्थिक मंदी के दौर में ये आयोजन और समारोह "डूबते सूरज की चमक" कम "बुझते दिए की लपट" अधिक लग रही है!!
    आपने जिस प्रकार एक निष्पक्ष और तटस्थ होकर इस लेख के माध्यम से जानकारी दी है, उसमें ऐसा लग रहा कि हम एक रिपोर्ट पढ़ रहे हैं. यही इस आलेख की विशेषता है.. कोई पूर्वाग्रह नहीं और कहीं कोई लगाव नहीं!!
    बहुत बहुत बधाई!!

    ReplyDelete
  7. ब्रिटिश सामाज्य...डूबता सूरज...ही तो हो!...अब भी महारानी जी अपने ऐश्वर्य की चमक को किसी भी कीमत पर बरकरार रखना चाहती है!...बहुत बढियां जानकारी!....आभार!

    ReplyDelete
  8. कमाल का शीर्षक है शिखा और बहुत सार्थक मुद्दा भी. किसी भी पत्रकार की पैनी नज़र ऐसे समारोहों के औचित्य पर होनी ही चाहिये. बधाई.

    ReplyDelete
  9. भारत में भी अभी भी तमाम राजे रजवाड़ों की चमक बाकि है... तत्कालीन ग्वालियर (सिंधिया) रियासत के वंशजों को यहाँ की जनता आज भी राजा मानकर सम्मान देती है...
    आपके आलेख से तमाम जानकारियां हासिल हुईं... साथ ही राजा-महाराजाओं की कहानियां याद हो आई...

    ReplyDelete
  10. अच्छी रपट है :)
    साख पर बट्टा न लगे बस ..... और गौरवपूर्ण इतिहास का सवाल तो खैर है ही ..
    मेरे एक परिजन लन्दन में थे ...एक अंग्रेज भिखारी एक दिन उनसे टकराया ...
    "वुड यू प्लीज लेंड मी अ पौंड? मतलब उधार दे दो ,फिर एक सवाल और ..
    "व्हिच कंट्री यू हैव कम फ्राम"
    मेरे परिजन इस अचानक आयी मुसीबत से संभल ही रहे थे कि मुंह से बेसाख्ता निकल पड़ा ..
    "इंडिया "
    वंस वी रूल्ड दैट कंट्री -उसने गर्व से कहा .... :)
    रस्सी जल गयी है मगर अकड़ बरकरार है ..
    वैभव का भोंडा प्रदर्शन तो कोई इनसे सीखे ...
    आप कैसे टालरेट करती हैं यह सब ?

    ReplyDelete
  11. the britishers are known to be well educated people. and as u wrote they also follow this foolish like celebrations.

    aur ye to yaha bhi hota hai! then what is the difference between them and rest of the world. "Hamam me sabhi nanage hote hain" ! nice stare, Title is Amazing! infact Suraj ko jabardasti uga rakha hai!

    ReplyDelete
  12. किसी भी हालत में एक स्तंभ बचा कर रखा है वहाँ पर, यहाँ तक कि हम भी अपना गौरवशाली इतिहास वहीं पर तलाश कर रहे हैं।

    ReplyDelete
  13. बहुत बढियां जानकारी

    ReplyDelete
  14. आप वहीँ हैं, तो चार-पांच सिक्के उड़ा के इधर भिजवा दीजिए तो मजा आ जाए :)

    वैसे ये आलेख बहुत पसंद आया..ब्रिटेन की महरानी के बारे में बहुत से किस्से सुन चूका, पढ़ चूका हूँ, देख चूका हूँ(फिल्मों में)..

    ReplyDelete
  15. समय सदा एक सा नहीं रहता. आज वि‍श्‍व बदल रहा है

    ReplyDelete
  16. फोर एवेरी नेशन ... इट्स टाइम टू चेंज दी हिस्ट्री ... हिस्ट्री व्हिच डेपिक्ट्स कोलोनियलिज्म एंड इम्पेरीयलिज्म... मस्ट रीडिफाइन विदिन इटसेल्फ... वैरी नाइज़ आर्टिकल... कौन्ग्रेट्स फोर बींग पब्लिश्ड ....

    ReplyDelete
  17. जानकारी मिली ।

    आभार ।।

    ReplyDelete
  18. सार्थक पोस्ट, आभार.
    कृपया मेरे ब्लॉग meri kavitayen की 150वीं पोस्ट पर पधारने का कष्ट करें तथा मेरी अब तक की काव्य यात्रा पर अपनी प्रति क्रिया दें , आभारी होऊंगा .

    ReplyDelete
  19. इस आलेख के माध्यम से तुमने बहुत कुछ बताया

    ReplyDelete
  20. जनता का हाल कुछ भी हो, राजाओं के राजसी ठाठ में कभी कमी नहीं आती. लेकिन जनतंत्र में भी शासकों का व्यवहार और सोच राजाओं से कम नहीं है. बहुत रोचक आलेख...

    ReplyDelete
  21. शाही ठाठ बाठ ।
    फिर भी हीरो वर्शिपिंग वहां भी होती है ।

    ReplyDelete
  22. शीर्षक आपने बहुत ही सही दिया है .. ये चमक दमक अब उनके डुबते हुए सूरज की ही है जिनके राज में कभी सूरज डूबता ही नहीं था।

    ये राजसी ठाट-बाट ये लोग कब तक दिखाते रहेंगे। और इस चकाचौंध से किसकी आंखें चौंधियाना चाहते हैं।

    आलेख के द्वारा कई नई जानकारियां मिलीं। आपकी लेखन शैली चमत्कृत करती है।

    ReplyDelete
  23. इंगलिस्तान के रानी साहिबा की हुकूमत के ६० साल , हीरक जयंती. लूटी हुए संपत्ति तो अब ख़तम हो ही गई होगी. बिना किसी प्राकृतिक संसाधन के इत्ते दिनों तक रंगबाजी चली ये क्या कम है . सूरज डूबना क्या , दिये भी बुझेंगे . मैंने भी निकाल लिया गुबार .

    ReplyDelete
  24. एक उम्दा आलेख ... बधाइयाँ और शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  25. हम त यही सुनते आये हैं कि अंग्रेजों के राज में सूरज कब्भी नहीं डूबता। जब्कि आपने लिखा है (-सूरज ब्रिटेन के साम्राज्य में ही उदय भी होता है और अस्त भी) :) ये फ़रक शायद अंग्रेजों के इलाके में होने और उससे अलग इलाके में होने के चलते है।

    ReplyDelete
  26. हम त यही सुनते आये हैं कि अंग्रेजों के राज में सूरज कब्भी नहीं डूबता। जब्कि आपने लिखा है (-सूरज ब्रिटेन के साम्राज्य में ही उदय भी होता है और अस्त भी) :) ये फ़रक शायद अंग्रेजों के इलाके में होने और उससे अलग इलाके में होने के चलते है।

    ReplyDelete
  27. डूबते सूरज की चमक .... बस अब दिखावा ही बचा है ... राजशाही का दिखावा .... बहुत अच्छी जानकारी दी है ...

    अंग्रेजों के राज में सूरज कभी नहीं डूबता था ... मतलब की कहीं न कहीं दिन रहता था ... वैसे अलग अलग जगह तो उदय भी होता था और अस्त भी ... तो उनके राज में उदय और अस्त होने वाली बात तो सटीक ही है ...

    ReplyDelete
  28. पूरा लेख पढ़ने के बाद बस कुछ सोचने सा लगा हूँ..

    ReplyDelete
  29. राजसी वैभव और उसके प्रदर्शन का रिवाज़ जस का तस बना रहा.इस पर ना किसी व्यवस्था का फरक पडा ना जाति, धर्म, देश या परिवेश का.
    ACTUALLY IT IS A PART OF OUR TRADITION ,COSTUM AND CULTURE SO IT WILL TAKE TIME TO SINK.

    ReplyDelete
  30. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    ReplyDelete
  31. ऐसा ही शायद ..... बहार कुछ भीतर कुछ , दिखावे की परम्परा या परम्परा का दिखावा

    ReplyDelete
  32. राजशाही समाप्त होने के बाद के ये दिखावटी जलवे हैं !
    सच ही कहा कि रस्सी जल गयी , बल नहीं गया !

    ReplyDelete
  33. अंग्रेज घमंडी रहे हैं ...
    हमें तो इस सिक्का अपना सा लग रहा है :)
    बढ़िया पोस्ट ..

    ReplyDelete
  34. समर्थ कहीं का भी हो ...प्रदर्शन से बाज़ नहीं आता।

    ReplyDelete
  35. जानकारी तो मिली ही, आलेख ने विचार को विवश भी किया। ऐसे प्रसर्शनों को ही कई बार राष्ट्रगौरव मान लिया जाता है।

    ReplyDelete
  36. अच्छा आलेख है......विचारणीय भी।

    ReplyDelete
  37. पूरे विश्व में राजाओं की चमक तो बाकी है ... भारत जैसे देश में जहां आज कानूनन राजा नहीं रहे वहां पे भी इनकी टोर आज भी राजा जैसे ही है ...
    पर ये सच है की ब्रिटेन का मामला अलग है ...

    ReplyDelete
  38. bahut khoobsurti ke saath likhi hain....wah.

    ReplyDelete
  39. प्रजा को राजा की तरह सोचने का हक़ नहीं है |
    राजा राजा है, प्रजा प्रजा |

    ReplyDelete
  40. उम्दा पोस्ट।

    राजनैतिक दृष्टि से देखें तो दुनियाँ में दो ही जाती पाई जाती है...शोषक और शोषित। जब तक मानव है यह कभी नहीं बदलेगा। राजा राज करेगा उसी हाँका मस्ती में। प्रजा जीती रहेगी उसी फाँका मस्ती में। लोकतंत्र हो या राज तंत्र..जन जन की दुश्वारियाँ कम नहीं होंगी। यही कटु सत्य है। कभी एक शेर लिखा था....

    रहनुमा बदलने से दुश्वारियाँ नहीं जातीं
    मालिक भेड़ बकरी का सदियों से कसाई है।

    ReplyDelete
  41. महत्वपूर्ण प्रश्न. वह बर्तानिया की रानी है. हीरक जयंती से जुड़े उस वैभवपूर्ण आयोजनों का अनुमान लग ही रहा है.

    ReplyDelete
  42. bhtreen jankari ......................shukriya

    ReplyDelete
  43. बहुत अच्छी सार्थक प्रस्तुति.
    सबका रिवाज अपना अपना.

    मेरे ब्लॉग पर आपके आने का आभारी हूँ.

    ReplyDelete
  44. इस मामले में तो ज़माना न कभी बदला है न बदलेगा और कहीं हो न हो मगर यहाँ राजाओं का राजसी पन बरकरार रहेगा,फिर चाहे प्रजा को कर के रूप में कितनी भी दिक्कतों और परेशानियों का सामना क्यूँ ना करना पड़े। बहुत बढ़िया आलेख शुभकामनायें....

    ReplyDelete
  45. जानकारी तो अच्छी थी, और जैसा कई लोगो ने लिखा शीर्षक सार्थक है | इस तरह पैसा बर्बाद करना तो यही दर्शाता है कि रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया :) खैर देश-देश की बात है !!!

    बाकी इस्ट इंडिया कम्पनी के चीफ एक्ज्यूकेटिव संजीव मेहता तो पहले एक और एलान कर चुके हैं कि वो महंगे ब्रांड मार्केट में उतारना चाहते हैं (http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2010-08-16/india/28311109_1_brand-new-avatar-sanjiv-mehta) |
    उन्होंने आग्रह भी किया है कि उनकी बात मानी जाये, ये भारत हित में है, रानी तो उनसे बहुत खुश होंगी !!!! :) :) :)

    ReplyDelete
  46. रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गए...​
    ​​
    ​​
    जय हिंद...

    ReplyDelete
  47. sunder jankari rani to rani hain
    rachana

    ReplyDelete
  48. सुबह उगने वाला सूरज ...शाम होने पर अस्त भी होता हैं ..ऐसा ही कुछ अब ब्रिटेन की रानी और देश के साथ भी हो रहा हैं

    ReplyDelete
  49. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...!

    ReplyDelete
  50. राजाशाही और उसकी चकाचौंध हमारे दिलों में घर कर लेती है। इसकी आड़ में हम नहीं देख पाते अपनी भूख और गरीबी। बस एक क्षण की चमक-धमक ही हमारी खुशी का कारण बन जाता है। अमीर और गरीब का खेल हमेशा खेला गया है और हमेशा खेला जाता रहेगा। अच्‍छा सार्थक आलेख।

    ReplyDelete
  51. Raja raniyon kee chamak to ab nammatr ke Raja raniyon kee bhee hai.
    Fir ye to sekadon salon tak wishw ke pratyek mahatwpeerna desh par sattadhariyon ka sawal hai. Jo Raja nahee hain we rajneta bhee to yahee sab karate hain han level alag alag hota hai.
    srthak aalekah.

    ReplyDelete
  52. राज राजवाडों के शान-शौकत का अपना ही अंदाज़ होता है चाहे भारत हो या किसी भी देश में. आर्थिक मंदी के दौर से लगभग सभी देश गुजर रहे हैं, परन्तु सभी देश अपने अपने तरह से सरकारी तंत्र और संपत्ति का उपयोग करती है भले देश की जनता पर बोझ बढ़ जाए. इंग्लैण्ड की रानी का सम्मान वहाँ की जनता भी चाहती होगी और आलिशान आयोजन होना भी चाहिए, आखिर रानी हैं. अच्छी जानकारी मिली, शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete

पसंदीदा पोस्ट्स

ईमेल से जुड़ें

संपर्क

Name

Email *

Message *