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Tuesday, 14 February 2012

और अंत में प्रेम ..............





चॉकलेट,मिठाई 
आलिंगन, चुम्बन.
गुलाब और टैडी 
सारे पड़ावों से गुजर 
आखिर में 
प्रेम का नंबर आ ही गया 
सुना है आज प्रेम दिवस है.
*************

रीत कुछ हम भी निभा लें,
कुछ लाल तुम पहन लो 
कुछ लाल मैं भी पहन लूं 
चलो हाथ में हाथ डाल 
कुछ दूर यूँ ही टहल आयें
कमबख्त लाल फूल भी आज 
बहुत महंगे हैं.
******************* 







खाली बगीचे से मन 
हाथों में सुर्ख गुच्छे 
संकीर्ण दिलों के बीच 
बड़ा सा दिल बने तकिये
महंगे स्वाद हीन पकवान.
और 
खाली होती जेबों के मध्य 
दिवस तो मन रहा है 
पर 
प्रेम नदारद है.

63 comments:

  1. खुदा खैर करे ... कहाँ से शुरू कर कहाँ पहुंचा दिया आपने !

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  2. अब तो शायद सदा ही प्रेम नदारत होता है इसलिए तो एक दिन प्रेम दिवस मनाया जाता है कि इस बहाने ही सही ज़िंदगी से कुछ समय चुरा कर ज़रा देर के लिए प्रेम कर लिया जाये मगर अफसोस कि आज के दिन भी फूल,चॉकलेट,teddy ,गुलाब सब कुछ होते हुए भी केवल प्रेम ही नदारत होता है।

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  3. इसे कहते हैं प्रैक्टिकल ओब्ज़र्वेशन, न कि इमोशनल ओब्ज़र्वेशन!! बहुत.. बहुत सुन्दर!!!

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  4. आज सुबह से शिकायतें ही सुन रहा हूं। जब दफ़्तर जाने लगा तो श्रीमती जी की शिकायत कि अभी तक तुमने विश नहीं किया। मैंने पूछा किस बात की, तो बोलीं आज तो भोलंटाइन बाबा का दिन है।

    मैं टाल कर निकल गया।

    शाम जब घर आया तो मेरे हाथ को देखते हुए शिकायत कीं, कोई गिफ़्ट नहीं लाए ..?

    उफ़्फ़ ..

    मैंने कहा गिफ़्ट की क्या ज़रूरत है?
    जब जीवन में हर परिस्थिति का सामना करना ही है तो प्रेम से सामना क्‍यों न करें?

    वो अटल थीं, पर गिफ़्ट?

    मैंने कहा ... गिफ़्ट में क्या प्रेम रखा है? जो प्रेम किसी को क्षति पहुँचाए वह प्रेम ही नहीं।

    अब देख रहा हूं कि उनके हाव भाव से प्रेम छिटक रहा है ... कब वह (प्रेम) बरस पड़े पता नहीं।

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  5. ओब्ज़र्वेशन तो बढ़िया है, यहाँ भी दुकानें सजी हुई हैं, प्यार नदारद है :)
    वैसे भी प्यार का केवल एक दिन नहीं हो सकता :)

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  6. काव्य समाप्त हो गया ,बस गणित शेष है अब जीवन में..

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  7. तुम जो बसती हो जवानी के समनजारों में ,
    अपनी ही तनहाई के एहसास से खुद में वीरां भी हो |...अनु

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  8. पर जो भी स्वीट सी तो लगी ही :) :)

    एक फिल्म का एक डायलोग याद आ गया इस पोस्ट से...

    Random thoughts for Valentine's Day- Today is a holiday invented by greeting card companies. To make people feel like crap.

    :D

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  9. बहुत महंगाई है जी .प्रेम दिवस भी एक दिन मनाने में विदेशी शक्ति का हाथ है. हम तो रोज ही सत-चित्त से प्रेम निमग्न रहते है वो भी . बिना जेब खाली किये .यकीन आज इस बाबा ने जबरी खाली करा ली जेब .

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  10. @ कमबख्त लाल फूल भी आज
    बहुत महंगे हैं.

    यह मामला कुछ समझ नहीं आया .....प्रेम में सब कुछ जायज है ....वैसे आपकी तस्वीर ?????

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  11. प्रेम तो एक मुस्कान में है ... पर यहाँ तो पैसा महान है ... प्रेम दिवस नहीं , पैसा दिवस

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  12. खाली होती जेबों के मध्य
    दिवस तो मन रहा है
    पर
    प्रेम नदारद है.ekdam sahi soch hai aapki.....

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  13. बहुत खूब कहा शिखा जी...
    यहाँ तो १५ तारिख को पिताजी के जन्मदिन के लिए भी फूल खरीदना दूभर हो जाता है...
    लाल के साथ पीले/सफ़ेद गुलाब भी महंगे..

    रोचक लेखन के लिए बधाई..

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  14. .....
    खाली होती जेबों के मध्य
    दिवस तो मन रहा है
    पर
    .. सच तो यह भी है कि खाली जेबों के अतिरिक्त भावनाशून्य हृदय भी स्नेह और समर्पण से रीता है..
    .. इसलिये
    प्रेम नदारद है.

    अस्तु सामयिक अभिव्यक्ति

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  15. प्रेम की परिभाषा सबके लिए अलग अलग है ।
    भूखे को रोटी मिल जाए , मजदूर को अच्छी मजदूरी , या किसी का बिगड़ा कम बन जाए तो दिल में प्रेम फूट पड़ता है । यह तो बस एक मनोदशा है ।
    वैसे लाल रंग बड़ा भड़कीला होता है ।

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  16. सच्चा प्रेम एक ऐसे प्रेत की तरह है जिसकी चर्चा सब करते हैं लेकिन देखा किसी ने नहीं.

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  17. और अंत में प्रेम...... प्रेम नदारत है. सही कहा आपने. सुंदर प्रस्तुति.

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  18. :):) प्रेम पर भी बाज़ारवाद हावी है ...
    बस भेड़ चाल हो कर रह गया है यह दिन ... और लोग माना रहे हैं तो हम क्यों नहीं ...यही भावना रह गयी है ॥प्रेम है या नहीं इसका पता नहीं :):)

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  19. कुछ दूर यूँ ही टहल आयें
    कमबख्त लाल फूल भी आज
    बहुत महंगे हैं.
    sunder bhav
    aaj aesa hi hai..................shayad
    rachana

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  20. This comment has been removed by the author.

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  21. प्रेम इसलिए नदारद है क्योंकि भारतीयता नहीं है... बहुत ही शानदार रचना और फोटो भी..

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  22. विचारणीय..... सशक्त अभिव्यक्ति

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  23. दिवस मन रहा है , प्रेम नदारद है ...
    सार तत्त्व ही भूल गया है , बाजार जो न करवा दे !

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  24. बाज़ार ही याद दिला दे तो सही - प्रासंगिक रचना!

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  25. बिलकुल सही लिखा है...

    यह सब बाज़ारवाद की देन है... दिखावों का दौर है, देखते जाओ आगे-आगे क्या-क्या होता है!

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  26. जय जय जय जय, प्रेम दिवस जय..

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  27. खाली बगीचे से मन
    हाथों में सुर्ख गुच्छे
    संकीर्ण दिलों के बीच
    बड़ा सा दिल बने तकिये
    महंगे स्वाद हीन पकवान.
    और
    खाली होती जेबों के मध्य
    दिवस तो मन रहा है
    पर
    प्रेम नदारद है.
    Shikha ji sach hi kaha apne aj ka prem arth kendrit ho chuka hai .....ab koi hriday ke sapndano ko nahi samjhana chahta ,,....bs ak swarth ki bhookh poori karana hi prem ka pryay banta ja raha hai ....adami sirf ak chalata firata yantr bn chuka hai ....kr bhi kya sakate hain privartan to shashwat hai na.

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  28. बेहद प्यारी रचना ... ये पंक्तिया आप के लिए
    लाल फूल महंगे थे
    लाल खिलौने भी
    होटल का बिल भरने
    की हिम्मत नहीं थी
    आँखों में भर प्यार
    हाँथ जो थामा उसने
    कान से गाल तक
    सुर्ख हो उठे
    सच प्यार का रंग
    लाल ही तो है

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  29. प्रेम तो एक तमाशा बन गया है और दिल हर जगह लटके-अटके बिखरे दिखाई दे जायेंगे .

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  30. Shikha ji
    namaskar,aapki kavita badi acchi lagi,vaise ek baat sahi hain aaj-kal sab ek dikhava jaise ho gaya hain.mere hisaab se to har din prem divas hona chahiye.:)

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  31. वाह ...बहुत खूब ..प्रेम दिवस के साथ विश्‍लेषण भी सार्थकता लिए हुए ...

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  32. यही है इस दिन का सच्।

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  33. प्रेम सतही दिखावे की नहीं अनायास अनुभव की जानेवाली भावना है. हाँ,एक शगल के रूप में लिया जाय तो बात अलग है .

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  34. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  35. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 16-02-2012 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज...हम भी गुजरे जमाने हुये .

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  36. सुना है आज प्रेम दिवस है....बधाई तो ले ही हो...बाकी किस्से छोड़ो!!

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  37. बाहरी चमक-दमक से दूर होकर उसी प्रेम को तो पकडना है शिखा जी जो हमारे दिल से दुरियां बना रहा है। बहुत सही और सटीक रचना है।

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  38. खाली बगीचे से मन
    हाथों में सुर्ख गुच्छे
    संकीर्ण दिलों के बीच
    बड़ा सा दिल बने तकिये
    महंगे स्वाद हीन पकवान.
    और
    खाली होती जेबों के मध्य
    दिवस तो मन रहा है
    पर
    प्रेम नदारद है.बाहरी चमक-दमक से दूर होकर उसी प्रेम को तो पकडना है शिखा जी जो हमारे दिल से दुरियां बना रहा है। बहुत सही और सटीक रचना है।

    ReplyDelete
  39. बहुत सही। प्रेम में किसी दिवस की जरूरत ही कहां होती है?

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  40. दिवस तो मन रहा है
    पर
    प्रेम नदारद है....

    सही कहा शिखा जी आपने... प्रेम नदारद है तभी तो दिखावे के साथ दिवस मनाने की जरुरत पड़ती है... जहाँ सचमुच प्रेम हो वहां तो साँस साँस प्रेम में ही डूबी होती है.. दिवस मनाने की न जरुरत होती है न ही सुध.... सुंदर अभिव्यक्ति
    सादर
    मंजु

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  41. teesari vaali photo bahut achchhi. ekdam gulabi. :)

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  42. खाली होती जेबों के मध्य
    दिवस तो मन रहा है
    पर
    प्रेम नदारद है...

    बहुत खूब...
    सादर.

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  43. कहना मुश्किल है कि ये कहीं नजदीक से देखा गया सच है प्रेम दिवस का या एक उदासीन दूरी से... पर नयी सोच तो है..
    nice, really nice.

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  44. बाजारीकरण ....हरेक चीज़ का...हरेक भावना का .

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  45. लाली मेरे लाल की,जित देखूँ तित लाल
    लाली देखन मैं गयी,मैं भी हो गयी लाल

    प्रेम में जब देखने से ही लाल हुआ जा सकता है,
    तो मुए फूल क्या करेंगें,शिखा जी.

    लाल रंग में गजब ढा रहीं हैं आप.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर भी आ जाईयेगा जी.

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  46. सच्ची एवं अच्छी प्रस्तुति के लिये बधाई.....
    नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)

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  47. विडंबना तो यही है कि प्रेम नदारद है -चेताती कविता !

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  48. जीवन की सच्चाई यही है ...

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  49. सामयिक लेखन के लिए बधाई..

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  50. dhero prem prasfutit ho rahe hain mohtarma... bas dhundhne ki baari hai...:))
    waise prem diwas ke baad bhi kuchh din aate hain.......:)

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  51. जहां औपचारिकताएं होंगी वहां प्रेम कहां होगा?

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  52. prem diwas ki badhai. bahut pyari kshanikaayen hain.

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  53. क्या प्रेम के लिए किसी दिवस का होना जरूरी है ... शायद तभी है जब इसे रस्मी तोर पे मनाना हो ...

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  54. "कमबख्त लाल फूल भी आज
    बहुत महंगे हैं"
    बहुत सुन्दर.

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  55. दिवस तो मन रहा है
    पर
    प्रेम नदारद है.
    यदि प्रेम हो यथार्थ तो हर रोज मने प्रेम दिवस।
    सुन्दर प्रस्तुति। बधाई।।।

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