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Thursday, 29 December 2011

स्मृति रथ.



स्मृतियाँ ...बहुत जिद्दी किस्म की होती हैं..कमबख्त पीछा ही नहीं छोड़तीं जितना इनसे दूर जाने की कोशिश करो उतना ही कुरेदती हैं और व्याकुल करती हैं अभिव्यक्त करने के लिए. फिर चाहे वह किसी भी रूप में हो.घर में बच्चों को कहानी के तौर पर  सुनाने के रूप में या ,किसी संगी साथी से बाटने के रूप में.कहीं किसी डायरी के किसी पन्ने पर उकेरने या फिर यूँ ही कभी किसी एकांत जगह पर आँखें बंद किये खुद से ही बतियाने के रूप में .सच्चाई यही है कि मनुष्य अपनी यादें और अनुभव किसी ना किसी रूप में बांटना चाहता है .वह चाहता है कि उसने जो अपने अनुभवों से सीखा या जाना उसे दूसरों तक भी पहुंचा सके.और ऐसा करके उसे एक सुकून और आत्म संतुष्टि की अनुभूति शायद होती है.
साल २०११ बहुत कुछ सिखा कर गया ..बहुत कुछ पाया, बहुत से सपने देखे और फिर उन्हें पूरा होते भी देखा.स्मृतियों को खंगालने का मौका भी मिला और शिद्दत से मिला. एक ऐसा मंच भी जहाँ उन्हें बांटने से सुख भी मिला और सुकून भी और ना जाने कब यूँ ही यादों को बांटते बांटते राहें बनती गईं ,और स्वप्न रथ यथार्थ की धरती पर उतरता गया. उस रथ को खींचने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बहुत लोग थे,जिन्होंने उसे निरंतर गतिमान बनाये रखा,  वह स्मृतियाँ अनवरत बहती रहीं और अब इस साल के जाते जाते एक खूबसूरत प्रत्यक्ष रूप में अवतरित हो गईं .
इस ब्लॉग पर वक़्त वक़्त पर स्पंदित होती मेरी स्मृतियों की माला के कुछ पुष्प आप सब देख चुके हैं.और सम्पूर्ण माला एक पुस्तक के रूप में आ चुकी है.आज आप सबके सामने मुझे वह पुस्तक रखते हुए सुखद  एहसास हो रहा है.कुछ ही समय पहले इसी साल मार्च में एक पोस्ट के दौरान इसी पुस्तक को इस साल के अंत तक आपके हाथों में सौंपने का वादा किया था मैंने. और अब आप सबकी दुआओं से वह वादा पूरा कर पा रही हूँ. इस तरह के अवसरों पर अक्सर लोग कुछ स्टीरियो  टाइप शब्द बोलते देखे जाते हैं " जैसे धन्यवाद ऊपर वाले का , इसका श्रेय जाता है आप सब को अगर आप लोगों का सहयोग ना होता तो यह नामुमकिन था , मैं आभारी हूँ अपने परिवार वालों के सहयोग का .आदि आदि" .कितना  नाटकीय सा लगता है ना यह सब? खासकर मुझे तो बेहद हास्यप्रद  लगा करता था. .परन्तु ना जाने क्यों आज हू ब हू यही शब्द कहने का मन कर रहा है.जाने क्यों यही शब्द सबसे सटीक लग रहे हैं.तो इन्हीं शब्दों के साथ अपनी यह पहली पुस्तक "स्मृतियों में रूस " (प्रकाशक - डायमंड बुक्स नई दिल्ली ) मैं आप सबके समक्ष रखती हूँ .

स्वप्न रथ मेरा
मेरे मन के आउट हाउस में खड़ा था
लग रही थी जंग उसे
अर्जे पुर्जे सब ढीले थे
घोड़े यहाँ वहां फिरते रहते
आवारा से
कसक उठती देख
जब भी नजर पढ़ जाती
पर उसे फिर से इकठ्ठा कर
गतिमान बनाने की
राह नहीं दिखती थी.
फिर अचानक
दिखी एक पगडंडी
मिले कुछ कोचवान
डाला जाने लगा तेल कल पुर्जों में
दिया जाने लगा दाना पानी घोड़ों को
और फिर से चल पड़ा
मेरा अपना स्वप्न रथ.

बीते साल में जितना स्नेह , आशीष आप सभी ने दिया, आने वाले साल में भी बनाय रखियेगा.
हैप्पी न्यू इयर टू ऑल ऑफ़ यू.





67 comments:

  1. नव वर्ष की पूर्व बेला पर एक शानदार तोहफा दिया है आपने शिखा जी ।
    बधाई ।
    निश्चित ही बहुत बढ़िया लिखा होगा ।
    नव वर्ष की शुभकामनायें ।

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  2. ओफ्फ्फ..अब तो जैसे ही दिल्ली पहुंचना है, ये किताब खरीदना है..कितनी बेसब्री से इसका इंतज़ार था :)

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  3. नव वर्ष की शुभकामनायें!!साथ ही साथ आपको ढेरों बधाई.

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  4. बहुत बहुत धन्यवाद इस उपहार के लिए साथ साथ बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  5. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ, और हाँ कविता के लिए भी बधाई।

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  6. bahut bahut badhai!! aur nav-varsh ki shubhkamnayen...!!

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  7. :)) pressure pe comment:D:D:

    shikha ke blog pe hamne bahut baar Russia ki yaatra ki wahan ke church dekhe, wahan ki sabhyata dekhi, wahan ki bus aur tram yatra tak kar li... ab wo hard copy me milne wala hai... par iske liye kuchh rupye kharch karne padenge...:)...
    uff!! kaise kharidun:))
    apna gullak todna hi padega...!!
    ye lo Shikha bina formal wali badhai.....ab sambhalo:)

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  8. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ
    स्नेह बनाए रखिएगा

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  9. in advance we wish you a very happy and prosperous new year....to you and your family ....

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  10. पहली पुस्तक के प्रकाशन की बहुत-बहुत बधाई
    नव वर्ष की शुभकामनायें

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  11. वर्ष के अंत में इतनी खूबसूरत भेंट!! बधाई और शुभकामनाएँ.. पुसतक के लिए भी और नव वर्ष के लिए भी!!

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  12. शिखा, शुभकामनाये, अभी तो ये अंगडाई है, आगे और चढ़ाई है.
    अभी और आगे जाना है, अभी कहाँ विश्राम है.
    हर पल सर्जन , हर पल चिंतन, यही हमारा काम है.
    शिखा सदा यूं ज्योतिर्मय हो, दूत बने तरुणाई की,
    पंथ सृजन का पथरीली है, मगर बहुत अभिराम (सुन्दर) है

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  13. बधाई और शुभकामनाएं.

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  14. बहुत बहुत बधाई पुस्तक प्रकाशन के लिए, इंडिया आते ही पढ़ा जायेगा इसे, नोट कर लिया गया है|
    आपको भी नववर्ष की ढेरों शुभकामनायें!!!!!

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  15. आपका स्मृति रथ ऐसे ही गतिमान रहे और ध्वज पताका यूँ ही लहराती रहे . नव वर्ष में स्मृतियों का रथ अपनी अभीष्ट मंजिल की तरफ बढ़ता रहे . हमारी शुभकामनाये .

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  16. बहुत ख़ूबसूरत, बधाई.

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  17. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं और " एक और पुस्तक " के लिए अग्रिम शुभकामनाएं .....!

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  18. kitna pyara tohfa hai shikha ji aapko bahut bahut badhai .
    nav varsh mangalmy ho khushiyan sada aapke aur aapke parivar ke sath rahen
    rachana

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  19. स्‍मृतियां जिद्दी न हों तो जीवन के अनुभव में वृद्धि कैसे हो सकती है??
    उम्‍मीद करती हूं आपके अनुभव आनेवाली पीढी के लिए लाभदायक हों ..
    पुस्‍तक के लिए बधाई और शुभकामनाएं ..
    आनेवाला वर्ष आपके लिए मंगलमय हो !!

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  20. शिखा जी, आपके लिए तो निस्सन्देह ये क्षण विशेष होंगे ही क्योंकि कृति में अंकित एक एक शब्द कई कई दृश्यों की पुनर्सर्जना करेगा उन स्थितियों मनस्तिथियों से आपको जोड़ेगा जो आपके प्रत्यक्ष अनुभव का हिस्सा रहीं, मेरा मानना है, किसी न किसी रूप में 'स्पन्दन' से संबद्ध हम सभी के लिए भी ये क्षण हर्षातिरेक के ही हैं, विभोर और विह्वल कर देने वाले। आपने क्रमशः शब्दचित्रों के माध्यम से कई बार हमें पर्यटन के अवसर दिए हैं । आपके और हमारे अनुभवों की साकार परिणति है 'स्मृति रथ'! इस श्रेष्ठ उपलब्धि पर हृदय से अभिनंदन आपका शिखा जी, और शुभकामनाएँ भी कि आने वाले वर्ष में आपकी रचनात्मक ऊर्जा नए क्षितिजों का संस्पर्श करे !!

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  21. आपकी स्मृति ऐसी ही जिद्दी बनी रहे और उसका जिद्दीपना केवल रूस तक ही सीमित न रह कर अपने सखा-सहेलियों-पाठकों-दोस्तों तक के मामले में भी ऐसा ही बना रहे इसी कामना के साथ नव वर्ष अभिनन्दन. ऐसे में क्या पता आपका अगला ग्रन्थ हो जाय 'स्मृतियों में मित्र.' पुनः मंगल कामना.

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  22. नव वर्ष और पहली पुस्तक के प्रकाशन के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं ....

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  23. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ, और
    कविता के लिए भी बधाई।

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  24. Aapko bahut badhayee ho!
    Naye saal kee dheron shubh kamnayen!

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  25. १." जैसे धन्यवाद ऊपर वाले का , इसका श्रेय जाता है आप सब को अगर आप लोगों का सहयोग ना होता तो यह नामुमकिन था , मैं आभारी हूँ अपने परिवार वालों के सहयोग का .आदि आदि" .कितना नाटकीय सा लगता है ना यह सब?खासकर मुझे तो बेहद हास्यप्रद लगा करता था. .परन्तु ना जाने क्यों आज हू ब हू यही शब्द कहने का मन कर रहा है.जाने क्यों यही शब्द सबसे सटीक लग रहे हैं.
    अच्छी नाट्य प्रस्तुति। :)

    २. पुस्तक प्रकाशन की बधाई।
    ३. पोस्ट का शीर्षक कुछ अधूरा सा लगा रहा है। मुझे पूरा करने को कोई कहे तो मैं लिखूंगा- स्मृति रथ पर आरूढ शिखा वार्ष्णेय।

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  26. पुस्तक का मुख्यपृष्ठ ... लाजवाब है!!

    आपको और आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  27. बहुत बहुत बधाई-इस नव-वर्षोपहार के लिए :
    प्रकाशक भी जाने माने हैं!संस्मरण साहित्य में निश्चय ही आपका एक महनीय अवदान दर्ज हो गया !

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  28. पुस्तक के लिए बहुत बधाई ...
    नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें !

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  29. बहुत खूब! इस पुस्तक के लिये हार्दिक बधाइयाँ और आने वाली अन्य पुस्तकों के लिये शुभकामनायें!

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  30. बधाई हो आपको।

    नववर्ष की शुभकामनाएं.......

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  31. अभी तो इब्तिदा-ए-इश्क (पहली पुस्तक) है,
    आगे-आगे देखिए होता है क्या...

    जय हिंद...

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  32. पुस्‍तक की शुभकामनाएं तो पूर्व में ही दी जा चुकी हैं। बस यही कामना है कि आप ऐसा ही लिखती रहें। पुन: शुभकामनाएं।

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  33. पुस्तक के प्रकाशन की बहुत-बहुत बधाई
    नव वर्ष की शुभकामनायें

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  34. जिद्दी स्मृतियों को तुमने सहेजने की कोशिश की ... डाक खर्च , पुस्तक की कीमत के साथ मुझे भी भेजो
    ...........बधाई और शुभकामनाएं

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  35. Its beautiful poetry, hope for more such poetry in future.

    follow me on..
    http://rhythmvyom.blogspot.com/

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  36. ये 'स्‍मृति रथ' हर मन के आंगन में पहुंच चुका है आपको इसके लिए बहुत-बहुत बधाई नववर्ष की अनंत शुभकामनाएं ।

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  37. बीते वर्ष में जिस रथ पर आरूढ़ होकर सफर तय किया बहुत ही सुहाना था. इसकी उपलब्धियों पर मिएरी हार्दिक बधाई और आने वाले वर्ष में ये रथ यूं ही और दोगुनी गति से भागे और उपलब्धियों का संग्रह करे ये दुआ है.
    पुस्तक प्रकाशन के लिए बधाई.

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  38. आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को नव-वर्ष २०१२ की ढेरों शुभकामनाये, शिखा जी !

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  39. स्मृतियों के रथ पर सवार हो घोड़ों को खूब साधा है ... पुस्तक प्रकाशन के लिए बधाई और यूँ ही अनवरत लेखन चलता रहे इसीकामना के साथ नए वर्ष की शुभकामनायें .

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  40. आपको भी नववर्ष की शुभकामनायें....

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  41. पहली पुस्तक के प्रकाशन पर बहुत-बहुत बधाई साथ ही
    नव वर्ष की शुभकामनायें
    vikram7: आ,मृग-जल से प्यास बुझा लें.....

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  42. पुस्तक के लिये ढेरों बधाई और नव वर्ष की शुभकामनायें।

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  43. नया साल आप को भी बहुत बहुत मुबारक हो

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  44. पुस्तक "स्मृतियों में रूस " के लिए बधाई।
    साथ ही नव वर्ष की शुभकामनायें ।

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  45. kal jab tak aapne ise post kiya hoga tab main train mein baith chuka tha...so dekhne mein der ho gayi..khair ab to ghum-fir ke wapas aa gaye hain to ek-do din mein iska order de denge ab..fir aaraam se padha jayega..aur haan hamein lagta hai ki un bahut se kochwaanon mein se shayad ek hum bhi rahe hain (apratyaksh roop se..kya karein hamara ye kambakht slow connection aapka blog kholne mein itni der jo laga deta hai)..to ab jabki ham apne munh miyaan mitthoo ban gaye hain to is baat pe aapko bhi badhaai aur hamein bhi badhaai.. :):)

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  46. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......
    आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की शुभकामनाएं...........

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  47. स्मृतियाँ होती ही इतनी मधुर...... और पन्नों पर उतर जाये तो फिर क्या कहने. नव वर्ष की शुभकामनायें.

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  48. पुस्तक प्रकाशन की बहुत बधाई....
    नव वर्ष की शुभकामनायें....

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  49. आपकी इस पुस्तक का परिचय संगीता स्वरूप जी के ब्लॉग से पहले पहल मिला था. पुस्तक प्रकाशन पर आपको बहुत बधाई और शुभकानाएँ. नव वर्ष आपके लिए और आपकी सृजन प्रतिभा के लिए मंगलमय हो.

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  50. बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ

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  51. बहुत सुन्दर वाह! गुरुपर्व और नववर्ष की मंगल कामना

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  52. इस सुंदर उपलब्धि के लिए ...बधाई ,.....
    नया साल सुखद एवं मंगलमय हो,....

    मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--

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  53. आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  54. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष की अशेष शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  55. नववर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ

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  56. बहुत खूब....
    नववर्ष मंगलमय हो..
    सादर.

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  57. नव वर्ष मंगलमय हो ..
    बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें

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  58. इतना सुन्दर उपहार!...आज तो मजा गया !....ढेरों बधाइयाँ और नव वर्ष पर अनेको शुभकामनाएं!

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  59. ढेर सारी बधाईयाँ. नव वर्ष मंगलमय हो.

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  60. शिखा जी मेरी टिप्पड़ी जरा अलग है .....:)विस्तार से पुस्तक पढ़ने के बाद !
    Diamond Books
    Hello, Anand Dwivedi

    Thank you for your order from Diamond Books. Once your package ships we will send an email with a link to track your order.

    Your order confirmation is below. Thank you again for your business.
    Your Order #100001661 (placed on 6 January 2012 17:14:24 IST)

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  61. पुस्तक के लिए बहुत बहुत बधाई शिखा जी. आपका स्मृति रथ पूरी दुनिया में घुमे और हम इसका आनंद लें. शुभकामनाएं.

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  62. अभी अभी "स्मृतियों में रूस" पढ़ी है , कैसा इत्तेफाक है कि बिना रूस गए ही एक रूस मेरी स्मृतियों में भी बसा हुआ था ! बात मेरे बचपन की है मेरे पडोसी थे गांव में कामरेड मोहनलाल विश्वकर्मा , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भा क पा के लोगों के लिए रूस उन दिनों वही अहमियत रखता था जैसे मुसलमानों के लिए मक्का मदीना ईसाईयों और यहूदियों के लिए यरुसलम ! लियोनिद ब्रेझनेव वहाँ के राट्रपति / सत्ताप्रमुख हुआ करते थे उन दिनों ......तो कामरेड विश्वकर्मा हमेशा उस देश कि जादुई तस्वीर लोगों के सामने उतारा करते थे जिनमे बहुत सारी तस्वीरें मेरे भी बाल मन पर अंकित हो गयीं थी ... आज भी याद है मुझे जब आज से कोई ३० साल पहले विश्वकर्मा जी बताया करते थे कि कैसे उस देश में सीढियां आदमियों को स्वयं लेकर ऊपर और नीचे आती जाती हैं (स्क्लेटर ) आपको अपने पांव नहीं चलाने पड़ते बस उन सीढ़ियों पर खड़े हो जाना भर होता है| लोग समूहों में उनकी स्वप्नलोक जैसी बातें सुनते थे और मैं उन सबमे सबसे आगे हुआ करता था |
    खैर बात 'स्मृतियों में रूस' की ......
    सरल ग्राह्य भाषा में लिखी गयी पुस्तक शुरू से अंत तक पाठक को बांधे रखने में सक्षम है प्रस्तुतिकरण ऐसा कि आप पढ़ना शुरू करें तो बस पढ़ कर ही खतम करें रूस हमेशा से ही भारतवासियों के लिए बहुत अहम रहा है | एक सच्चा मित्र देखा है हमने और पाया भी है | वहाँ के रहन सहन वहाँ के खान पान, भाषा और विशेषकर रूसियों के मन में झांककर भारतीयों के प्रति उनके सहज विश्वाश को परिलक्षित करती हुई ये पुस्तक आपके सामने विखंडन के दौर के रूस की मुकम्मल तस्वीर रखती है साथ में ये भी बताती है कि कैसे एक भारतीय परिवेश में पली बढ़ी लड़की नितांत अजनबी वातावरण जहाँ की भाषा का A B C भी उसे पता नहीं था कैसे अपने आपको उन परिस्थितियों के अनुरूप ढालती है और एक स्वर्णिम सफलता के साथ स्वदेश वापस आती है !
    पुस्तक में दिए गए चित्र पुस्तक की विशेषता हैं जो पाठकों को रूस की एक छवि बनाने में मदद करते हैं कुल ७६ पृष्ठों की पुस्तक जो की भारतीय मानसिकता के अनुसार हाथ में लेते समय कुछ मंहगी लगती है (३०० रूपये मूल्य + ४२ रपये टैक्स और डाक खर्च इत्यादि ) मगर पुस्तक पढ़ कर खतम करते समय पहली भावना के एकदम उलट एक संतुष्टि दे जाती है |
    शिखा जी आप को अच्छे संस्मरण लेखन के लिए बहुत बहुत बधाई !

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