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Wednesday, 2 November 2011

इतिहास की धरोहर "रोम".(.पार्ट २ )

बचपन से सामान्य ज्ञान की पुस्तक में पढ़ते आये थे कि दुनिया का सबसे छोटा देश है "वेटिकेन सिटी " तब लगता था छोटे से किसी द्वीप या पहाड़ी पर छोटा सा देश होगा.पर ये कभी नहीं सोचा था कि एक देश के अन्दर क्या बल्कि एक शहर के अन्दर ही ये अलग देश है.करीब ४४ हेक्टेयर में बना हुआ कुल ८०० लोगों की आबादी वाले इस देश का अपना राजा है, इसकी राजभाषा है लातिनी । ईसाई धर्म के प्रमुख साम्प्रदाय रोमन कैथोलोक चर्च का यही केन्द्र है, इस साम्प्रदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप का यही निवास स्थान है और उन्हीं की यहाँ सत्ता है, अपने अलग कानून हैं.यहाँ तक कि अपना अलग रेडियो स्टेशन, अपनी अलग मुद्रा है और अपना अलग पोस्ट ऑफिस भी. जो अपनी डाक टिकट तक अलग बनाते हैं.यहाँ तक कि ज्यादातर रोम वासियों द्वारा इटालियन डाक सेवाकी जगह वेटिकन डाक सेवा इस्तेमाल की जाती है क्योंकि ये ज्यादा तेज़ है..वेटिकेन सिटी अपने खुद के पासपोर्ट भी जारी करती है जिसे पोप, पादरियों ,कार्डिनल्स और स्विस गार्ड के सदस्यों ( जो इस देश में मिलिट्री फ़ोर्स की तरह काम करते हैं) को दिए जाते हैं.और इतना सब होने पर भी यह कोई अलग देश नहीं लगता .रोम के अन्दर ही बस एक अलग सा केंद्र लगता है एक वृहद और बेहद खूबसूरत प्रतिमाओं से सजा एक कैम्पस.
जिस दिन हम वेटिकेन सिटी पहुंचे, रविवार था. और वहां खास प्रार्थना का आयोजन था जिसमें हिस्सा लेने के लिए महँगी टिकट के वावजूद लम्बी लाइन थी. अन्यथा चर्च में आम लोगों का प्रवेष निषेध था .परन्तु म्यूजियम खुला हुआ था. हममे से किसी को भी ना तो धर्म में, ना ही प्रार्थना में इतनी रूचि थी कि महँगी टिकट लेकर २ घंटे की लाइन में लगते अत: फैसला हुआ कि यहाँ दोपहर का खाना त्याग कर लाइन में लगने से बेहतर है कि म्यूज़ियम देखकर ही निकल लिया जाये और बाकी का दिन रोम की बाकी जगह देखने में बिताया जाये.तो हम भव्य प्रतिमाओं को निहारते हुए और बाहर खड़े गार्ड्स के साथ तस्वीरें
खिचवाते हुए म्यूजियम में पधारे जहाँ की भव्यता देख कर पहली बार एहसास हुआ कि वाकई किसी अमीर राज- घराने में आ पहुंचे हैं.खैर म्यूजियम तो बहुत ही बड़ा था पर उसका छोटा सा चक्कर लगा कर हम निकल आये और सोचा कि अब कुछ खाने का जुगाड़ किया जाये.
पिछले कुछ दिनों से इटली के अलग अलग शहरों में घूमते हुए पिज्जा, पास्ता और पनिनी ही खा रहे थे. अब चूँकि राजधानी रोम में थे और अब हम रोम की मुख्य सड़क पर खड़े थे, माहौल कुछ कुछ अपने देश जैसा ही लग रहा था. अत: एक आशा हुई कि शायद कोई दाल रोटी वाला भारतीय भोजनालय मिल जाये.परन्तु हमारा ये कयास भी गलत साबित हुआ. इटली में उनका ही भोजन इतना प्रसिद्ध है कि किसी और देश के व्यंजनों की शायद गुंजाइश ही नहीं.हाँ कुछ एक चीनी रेस्टोरेंट्स जरुर दिखाई दिए पर भारतीय के नाम पर एक -दो बांग्लादेशियों के रेस्टोरेंट्स ही नजर आये जहाँ अपनी किस्मत अजमाने से अच्छा हमने और एक दिन पिज्जा पर बिताना ही बेहतर समझा.या फिर क्यों ना उन खास
सजावटी बेहद खूबसूरत आइस क्रीम पर हाथ अजमाया जाये जिनकी म्यूजियम जैसी दुकाने उस सड़क के हर कोने में उसी तरह दिखाई पढ़ रही थीं जैसे इटालियन ब्रांड और डिजाइनर सामानों के छोटे- बड़े शो रूम्स.शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो उनके आकर्षण से अछूता रहता हो.दुनिया भर के जितने फ्लेवर आप सोच सकते हो आपको वहां मिल जाते हैं.औरे वहां टहल रहे हर यात्री के हाथ में एक खूबसूरत कोन दिखाई पढ़ जाता है.खैर कीवी,रम,वाइल्ड बैरी, मेलन, जैसे अलग अलग फ्लेवर की आइसक्रीम लेकर हम पहुंचे कुछ ऐसी विचित्र सी सीढ़ियों पर जिन्हें यूरोप की सबसे व्यापक सीढियां कहा जाता है.ये नीचे "पिआजा दे स्पंगा" से ऊपर चर्च "त्रिनिता दे मोंटी को जोड़ती हैं. क्योंकि इन्हें स्पेन की एम्बेसी को चर्च से जोड़ने के लिए बनाया गया था इसलिए शायद इसका नाम स्पेनिश स्टेप्स है.एकदम खड़ी चढ़ाई पर चढ़ती हुई इन १३८ सीढ़ियों को एक फ़्रांसिसी राजनयिक ने विरासत में मिले धन से बनवाया था.खैर स्वादिष्ट आइस क्रीम से मिली ऊर्जा को ३२ डिग्री की गर्मी में इन सीढ़ियों पर चढ़कर एक चर्च को देखने में गवाने का हमारा मन ना हुआ और हमने वहां से कूच किया कुछ दुकानों की तरफ
कि आखिर इटली आयें और कुछ गुच्ची या अरमानी जैसे ब्रांड की चीजें ना लीं तो क्या खाक इटली आये? परन्तु ये नाम सिर्फ नाम के बड़े ही नहीं दाम के भी बड़े हैं. और शायद इटली की दुकानों से सस्ते लन्दन की दुकानों में मिल जाते हैं. अत: उन्हें सिर्फ निहार कर कुछ निराश से जब हम बाहर सड़क पर निकले तो एक बार फिर हमारे निराशा में डूबे मन को उबारा कुछ अपने ही तरह के लोगों ने. उन बांग्लादेशियों ने जो वहां सड़क पर ही एक चादर पर सभी प्रसिद्ध इटालियन ब्रांड का सामान लगाये बेच रहे थे. वो भी कौड़ियों के दाम और बिलकुल अपने देशी स्टाइल में. जैसे ही किसी पुलिस वाले को देखते, तुरंत सभी सामान चादर में लपेट ऐसे घूमने लगते जैसे कोई पर्यटक ही हों. उनके जाते ही फिर से अपना बाजार लगा लेते और ग्राहकों को पटाने लगते. हालाँकि वह सामान हमें दिल्ली के पालिका बाजार जैसा ही लगा परन्तु दिल के बहलाने को ग़ालिब ये ब्रांड अच्छा है. की तर्ज़ पर हमने भी कुछ खरीद लिया और पहुंचे

रोम के सुप्रसिद्ध त्रेवी फाउन्टेन पर.
२६ मीटर उंचा और २० मीटर चौड़ा ये रोम का सबसे ब
ड़ा और दुनिया का सबसे प्रसिद्ध फव्वारा है.फव्वारे में जो प्रतिमा है वह सागर के देवता नेपच्यून की है. जो सीपी और २ समुद्री घोड़ों के रथ पर सवार हैं.इनमें से एक घोड़ा शांत और आज्ञा कारी है और दूसरा अशांत. जो कि सागर के मूड को दर्शाते हैं.यह फव्वारा रोम वासियों के पीने के पानी की आपूर्ति के लिए बनाया गया था परन्तु अब इसे चखने की कोशिश भी नहीं कीजियेगा क्योंकि अब यह पानी सलोरीन और अन्य रासायनिक पदार्थों का सागर है.इस फव्वारे के बारे में एक किवदंती भी प्रचलित है कि जो इसमें सिक्का डालता है वह दुबारा रोम जरुर आता है. रोम अभी काफी देखना बाकी था परन्तु समय अभाव ने हमें भी उस फव्वारे में एक सिक्का डालने पर मजबूर कर दिया इस आशा में कि किवदंतिया भी किसी ना किसी आधार पर ही बनती होंगी.शायद इस सिक्के के बहाने हमारा दुबारा रोम आना संभव हो ही जाये. इसी आशा के साथ हमने एक सिक्का आँख बंद करके उस इच्छाधारी फव्वारे में डाला और फ्लोरेंस के लिए निकल पड़े .

69 comments:

  1. सुंदर एवं रोचक विवरण सदा की तरह.
    पंकज झा.

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  2. रोचक यात्रा विवरण, वेटिकेन सिटी के बारे में पढा था, अब आपके साथ घूम भी लिए।

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  3. वेटिकन सिटी के बारे में जानकर विस्मय हुआ ।
    सिक्का डालने का प्रचलन वहां भी है , हैरानी है ।

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  4. ह्म्म्म तो दूसरे दिन का प्रमुख आकर्षण वेटिकन सिटी ही रहा ..ना जाने क्यों मुझे लग रहा है कि मैं ने भी आपके पीछे से चुपके से एक सिक्का उस जादुई फौव्वारे में डाल दिया है ...देखते हैं !! :)

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  5. सुन्दर चित्रों के साथ बढ़िया व रोचक विवरण

    Gyan Darpan
    Matrimonial Service

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  6. bahut khushi hoti hai jab koi apni matra bhasha ko itna samman aur pyaar deta hai ...kaash sab log iski ahmiyat koi samajhte accha laga aap ki soch jankar ... maintain the same spirit.. ..mritunjay sahni

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  7. इस बार का आपका यह अनुभव बहुत अपना सा लगा क्यूंकि मेरी इटली vist लगभग आपके और मेरे अनुभवों से मिलती है हर एक छोटा बड़ा अनुभव बिलकुल एकसा है हमारा ...और सबसे अच्छी बात मुझे यह लगी "कुछ एक चीनी रेस्टोरेंट्स जरुर दिखाई दिए पर भारतीय के नाम पर एक-दो बांग्लादेशियों के रेस्टोरेंट्स ही नजर आये जहाँ अपनी किस्मत अजमाने से अच्छा हमने और एक दिन पिज्जा पर बिताना ही बेहतर समझा". जो सौटका सही है :-)आज आपको अपने उस ब्लॉग का लिंक देती हूँ पढ़कर ज़रूर बताना कैसा लगा
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/2010/11/italy-visit.html

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  8. प्रत्येक दृश्य की धड़कन को छूते हुए विवरण ने प्यारे-न्यारे अहसास से भर दिया क्षणों को । 'स्पेनिश स्टेप्स' की सही जानकारी मिली । 'त्रेवी फ़ाउन्टेन' पर शिल्पित नेपच्यून की प्रतिमा को जैसे रुक-ठहर कर देखा हो- चित्रात्मक हो उठे हैं शब्द । खुले आसमान की छाँव में रस-रंग घोलते पिज़्ज़ा, पास्ता, पनिनी और किस्म-किस्म की मिठास-महक भीनी आइसक्रीमों से रूबरू होते हुए मन ललचाए बिना नहीं रह सका । पानी में सिक्का डालने से जुड़े रोमवासियों के विश्वास ने, हम लोगों के जलधारा में सिक्के डालने से जुड़ी आस्था में नए अर्थ ढाल दिए । बेहद रोचक मनमोहक वर्णन की प्रशंसा करता हूँ शिखा जी । --अश्विनी कुमार विष्णु

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  9. Aapke likhe yatra vivaran padhne kaa ek alag hee maza hota hai!

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  10. आपकी घुमक्कड़ी के साथ पाठकों को ज्ञानार्जन और पर्यटन दोनों का विशुद्ध लाभ होता है . पोप के देश का रोचक विवरण , पिज्जा वाले देश का जिवंत आँखों देखी हाल.. क्या डूबकर लिखती हो आप , सिक्के डालकर मोती उठा लाती हो.

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  11. aapka likha padh kar to yahan jane ka man kar raha hai .kash me bhi vahan jaun aesi asha hai .aapke varnana ne meri asha aur badhai hai.
    rachana

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  12. मतलब ललचवा रही हैं घुमक्कड़ी बन्दे को.. वहाँ की कल्पना मात्र से मन रोमांचित हो जा रहा है. नसीब में हुआ तो हम भी सिक्का डालने जरूर जायेंगे.. पूरा रोम घूमें या न घूमें.. :)

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  13. khubsurat yatra vritant...sabhi rango ko samete huye.....

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  14. बहुत बढ़िया चित्र और रोचक जानकारी.....

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  15. बड़ा ही रोचक संस्मरण..

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  16. यह सही है भाई ... घर बैठे बैठे ... दुनिया भर की घुमाई ... जय हो ...

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  17. रोचक यात्रा संस्मरण .. शब्दों के साथ साथ घूम लिए हम भी ..तुम्हारे संस्मरण लिखने की शैली से हर जगह के बारे में वहाँ की विशेषता भी पता चलती है .. जो नहीं देखा या पता है की नहीं देख पायेंगे उसके बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है ... सुन्दर संस्मरण

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  18. सुंदर शैली ने ज्ञान-वर्धन भी किया और आनंदित भी.

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  19. बढिया जानकारी।
    अच्‍छा यात्रा वृतांत।
    आभार।

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  20. रोचक संस्मरण अपने इटली प्रवास की याद दिला गया । विश्व का सबसे छोट देश है वेटिकन सिटी ।

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  21. रोम पर लिखी आपकी दूसरी किश्त भी बेहद सुन्दर और रुचिकर लगी |अद्भुत जानकारी हमसे शेयर करने के लिए आभार |

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  22. रोम पर लिखी आपकी दूसरी किश्त भी बेहद सुन्दर और रुचिकर लगी |अद्भुत जानकारी हमसे शेयर करने के लिए आभार |

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  23. यात्रा का वर्णन तो बहुत अच्छा लगा यह जानकर की ब्वेतिकन की अवदी केवल ८०० है ये जानकारी हमारे लिए नयी है यहाँ धार्मिक शासन है पोप का साम्राज्य है.यही से सरे कैथोलिक राज्यों पर शासन और चर्च द्वारा आतंकबाद फैलाना.

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  24. रोचक शैली में वृतांत को पढ़ते हुए जैसे स्वप्न में हम भी घूम आये ...

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  25. एकाध चित्र उन बांग्लादेशियों का भी होना था।
    बाकी आनन्द आ गया।

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  26. रोम की यात्रा में वेटिकन सिटी का तड़का ...रोचक यात्रा संस्मरण !

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  27. आपका जिक्र यहाँ भी है ……http://redrose-vandana.blogspot.comये आपकी धरोहर है

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  28. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ .प्रवीण जी और पूजा .दर्पण जी के ब्लॉग पर कई बार आपके कमेन्ट देखे आज भी एसे ही भटकती सी आ गई यहाँ तक.अच्छा लगा ब्लॉग देखकर....बहुत ही सुन्दर यात्रा विवरण लिखा हैआपने

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  29. बड़ा ही रोचक संस्मरण.

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  30. रोचक यात्रा संस्मरण .. शब्दों के साथ साथ घूम लिए हम भी .

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  31. आज 03 - 11 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


    ...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
    _____________________________

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  32. रोचक यात्रा संस्मरण..अपने साथ हमें भी घूमाने के लिए आभार..

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  33. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-687:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  34. bure log!! ek sikka ham jaise saat samundar dur wale dosto ke liye bhi fenk ke to aate....sayad kuchh bhala ho jata:):)

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  35. बहुत रोचक तरीके से आपने वर्णन किया , ऐसा लगा जैसे वेटिकन सिटी ही घूम ली ....

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  36. बेहतरीन जानकारी से भरी पोस्ट,आभार.

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  37. चित्रों के साथ जानकारी का अच्छा सामंजस्य बिठाया | रोचक विवरण |

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  38. हम तो बिना सिक्‍का डाले ही आपके साथ रोम घूम आए। हा हा हा हा।

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  39. वाह ,रोम-भ्रमण का आनन्द आ गया .आभार!

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  40. bin pasport ke rom me ghumane ka shukriya

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  41. दीदी आप यात्रा संस्मरण गज़ब का लिखती हैं...इस बार रोम के बारे में पढ़ कर दिल खुश हो गया,..,.

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  42. सूक्ष्म निरीक्षण के साथ लिखा हुआ यह संस्मरण और यात्रावृत्तांत इतना आकर्षक है कि एक पल को भी नहीं लगा कि इस यात्रा में हम आपके साथ न थे। एक कुशल गाइड की तरह आपने विस्तार से रोम के हर पहलु को हमें समझाया और हमने भी इस यात्रा का भरपूर आनन्द उठाया।

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  43. रोचक यात्रा विवरण वेटिकेन सिटी के बारे में पढा था, अब आपके साथ घूम भी लिए.....वेटिकन सिटी के बारे में जानकर विस्मय हुआ ।
    सिक्का डालने का प्रचलन वहां भी है,हैरानी है.....ह्म्म्म तो दूसरे दिन का प्रमुख आकर्षण वेटिकन सिटी ही रहा ..ना जाने क्यों मुझे लग रहा है कि मैं ने भी आपके पीछे से चुपके से एक सिक्का उस जादुई फौव्वारे में डाल दिया है ...देखते हैं !!...सुन्दर चित्रों के साथ बढ़िया व रोचक विवरण....प्रत्येक दृश्य की धड़कन को छूते हुए विवरण ने प्यारे-न्यारे अहसास से भर दिया क्षणों को,'स्पेनिश स्टेप्स' की सही जानकारी मिली ,'त्रेवी फ़ाउन्टेन' पर शिल्पित नेपच्यून की प्रतिमा को जैसे रुक-ठहर कर देखा हो-चित्रात्मक हो उठे हैं शब्द,खुले आसमान की छाँव में रस-रंग घोलते पिज़्ज़ा,पास्ता, पनिनी और किस्म-किस्म की मिठास-महक भीनी आइसक्रीमों से रूबरू होते हुए मन ललचाए बिना नहीं रह सका,पानी में सिक्का डालने से जुड़े रोमवासियों के विश्वास ने, हम लोगों के जलधारा में सिक्के डालने से जुड़ी आस्था में नए अर्थ ढाल दिए,बेहद रोचक मनमोहक वर्णन की प्रशंसा करता हूँ शिखा जी.....आपकी घुमक्कड़ी के साथ पाठकों को ज्ञानार्जन और पर्यटन दोनों का विशुद्ध लाभ होता है . पोप के देश का रोचक विवरण , पिज्जा वाले देश का जिवंत आँखों देखी हाल.. क्या डूबकर लिखती हो आप , सिक्के डालकर मोती उठा लाती हो......मतलब ललचवा रही हैं घुमक्कड़ी बन्दे को.. वहाँ की कल्पना मात्र से मन रोमांचित हो जा रहा है. नसीब में हुआ तो हम भी सिक्का डालने जरूर जायेंगे.. पूरा रोम घूमें या न घूमें.. :).....यह सही है भाई ... घर बैठे बैठे ... दुनिया भर की घुमाई ... जय हो ...

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  44. आपका ब्लॉग भी बहुत ख़ूबसूरत और आकर्षक लगा । अभिव्यक्ति भी मन को छू गई । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद . ।

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  45. वाह! इतिहास ज्ञान के साथ यात्रा…बढ़िया…रूचि लेकर पढ़े दोनों हिस्से…

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  46. 1983 men hum vatican city gaye the.....aaj aapne sari yaden taza kar di.

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  47. Diosa,
    Its likeable, but frankely saying aap se kuchh or behtar ki ummid hamesha rahti hai, wah puri nahi hui aisa laga jaisa last kuchh visits ne is behtreen mehnat ko thoda sa feeka kar diya, as a Regualr Stupid me not satisfied. waiting next.

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  48. आदरणीया शिखा जी
    सस्नेहाभिवादन !

    हमारे लिए तो विदेश-भ्रमण की कोई संभावना ही नहीं …
    ऐसे में आपके रोचक यात्रा-संस्मरणों के माध्यम से घर बैठे सैर किसी बड़े तोहफ़े से कम नहीं … :)
    आप पूरी दुनिया घूमती रहें , और हम
    … … … वो गीत है न
    इन नज़ारों को तुम देखो ,
    और मैं तुम्हें देखते हुए देखूं
    मैं बस तुम्हें देखते हुए देखूं … … …


    … तो सफ़र जारी रहे ! शुभ यात्रा !!

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  49. आदरणीय महोदया
    प्रेम की उपासक अमृता जी का हौज खास वाला घर बिक गया है। कोई भी जरूरत सांस्कृतिक विरासत से बडी नहीं हो सकती। इसलिये अमृताजी के नाम पर चलने वाली अनेक संस्थाओं तथा इनसे जुडे तथाकथित साहित्यिक लोगों से उम्मीद करूँगा कि वे आगे आकर हौज खास की उस जगह पर बनने वाली बहु मंजिली इमारत का एक तल अमृताजी को समर्पित करते हुये उनकी सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखने के लिये कोई अभियान अवश्य चलायें। पहली पहल करते हुये भारत के राष्ट्रपति को प्रेषित अपने पत्र की प्रति आपको भेज रहा हूँ । उचित होगा कि आप एवं अन्य साहित्यप्रेमी भी इसी प्रकार के मेल भेजे । अवश्य कुछ न कुछ अवश्य होगा इसी शुभकामना के साथ महामहिम का लिंक है
    भवदीय
    (अशोक कुमार शुक्ला)

    महामहिम राष्ट्रपति जी का लिंक यहां है । कृपया एक पहल आप भी अवश्य करें!!!!

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  50. बहुत सुंदर और रोचक यात्रा वृतांत...सारे द्रश्य आँखों के सामने घूमने लगे..

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  51. बहुत अच्छा संस्मरण ! कृपया पधारेँ । http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

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  52. रोम हमने भी घूम लिया आपके यात्रा वृत्तांत के रोचक संस्मरण और तस्वीर के साथ. बहुत अच्छा लिखा है और विस्तृत जानकारी भी. किसी और देश की यात्रा के संस्मरण का इंतज़ार रहेगा. शुभकामनाएं.

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  53. बहुत ही सुन्दर यात्रा विवरण.........

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  54. mene kbhi socha bhi nhi tha rom ko itne kreeb se dekhunga shukriya shikha ji agli bar hme aap new york ki ser kra dijiye

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  55. ऐसी विस्तृत जानकारी पाकर
    मन को बहुत प्रसन्नता मिली
    आपका भ्रमण
    हम सब पढने वालों के लिए
    मनोहारी और मनोरम ही रहा ...
    अभिवादन स्वीकारें .

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  56. humne to pahle bhi is sunder yatra pr kuchh likha tha pata nahi kahan gaya .sada ki taha aapka andajebaya bahut juda hai kamal ka
    rachana

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  57. रोम के बीच वेटिकन सिटी.. क्या ये सच है कि वहाँ कोई भी महिला नागरिक नहीं हैं?? आपके लेखन की विशेषता यही है कि आप चित्र खींच देती हैं (चित्र लगना तो एडीशनल मज़ा होता है.. ऐसा लगता है कि हम आपके साथ घूम रहे हैं और आप गाइड की तरह सब बताती चल रही हैं!!
    अच्छी और अविस्मरणीय रही यह सैर!!

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  58. सलिल जी क्या सवाल उठाया है .मुझे भी पता नहीं था. पर क्योंकि पोप का साम्राज्य है इसलिए संभव प्रतीत हुआ आपका कथन. और जानने की उत्सुकता वश कुछ खोजबीन की तो ये कथन मिला -

    There are only 32 female citizens in the Vatican City compared to 540 men, according to new statistics released by the smallest state in the world.
    Out of the 572 citizens with Vatican passports, there are 306 diplomats, 86 Swiss guards, 73 cardinals, 31 lay people and a nun. But only 223 of them actually reside in the Vatican.
    The tiny state also has 221 residents, the majority of which are clerics, monks or nuns
    Source: The Herald Sun

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  59. भावन चित्रों के साथ रोचक यात्रा विवरण. खासकर यूरोप की सबसे व्यापक सीढियां और मनचद्दर में लिपटा बांग्लादेशी बाज़ार पसंद आये.

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  60. आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ । पोस्ट रोचक लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है । धन्यवाद ।

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  61. बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

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  62. आभार शिखा जी इस जानकारी के लिए!! वैसे भी वेटिकन में जिसकी नागरिकता समाप्त कर डी जाती है वह स्वतः ही इटली का नागरिक हो जाता/जाती है... इसलिए भी इस गणना में कुछ हेर फेर और कन्फ्यूज़न रहा होगा जिससे मुझे ऐसी जानकारी प्राप्त हुई!!
    आभार पुनः, आपके प्रत्युत्तर का!!

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  63. awesome... n thank you so much again...
    i wish could throw a coin from here, so that be there...

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  64. रोचक विवरण...आनन्द आया.

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