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Friday, 28 October 2011

इतिहास की धरोहर "रोम"..



<span title=
इटली की राजधानी रोम - इस नाम से जूलियस सीजर नेरो जैसे कई नाम ज़ेहन में चक्कर लगाने लगते हैं.इतना कुछ है रोम में कि ना जाने कब से आपको इसकी यात्रा कराने के बारे में सोचा और हर बार यह सोच कर रुक गई कि कहाँ से शुरू करूँ और कहाँ ख़तम. अब जब लिखने बैठी हूँ तो शायद कई किश्त लग जाएँ परन्तु मेरी कोशिश रहेगी कि इस ऐतिहासिक नगरी के साथ थोडा सा न्याय कर सकूँ. विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक रोम.अपने नाम के साथ ही इतिहास के पन्नो की तरफ ले जाता है.कुछ वर्ष पहले जब इटली जाने का कार्यक्रम बनाया तो सोचा था रोम के लिए कम से कम ४ दिन तो निकाले जायेंगे.मेरी तमन्ना रोम की एक-एक दिवार पर पडी इतिहास की हर एक लकीर पढ़ लेने की थी.परन्तु हमेशा ऐसा थोड़े ना होता है जैसा कि आप सोचें.परिवार में मेरे अलावा किसी को इतिहास में रूचि नहीं. तो पहले तो इटली जाने के लिए ही उन्हें ब्लैक मेल करना पडा.वेनिस और पीसा के नाम के ललकारे देने पड़े और चूँकि रोम इटली की राजधानी है इसलिए उसे भी देख लेने की मेहरबानी करने के लिए वे तैयार हो गए परन्तु शर्त यह कि वेनिस, मिलान,फ्लोरेंस और पीसा के बाद बचे हुए सिर्फ २ दिन में जितना हो सकेगा रोम घूमा जायेगा. उसपर तुर्रा यह कि और भला चर्च और खंडहरों को कब तक निहारोगी ? खैर भागते भूत की लंगोटी भली. ये सोच हम रोम देखने के सपने सजाने लगे. <span title= इस भव्य नगर की स्थापना लगभग 753 ईसा पूर्व में हुई थी। और इसके बसने को लेकर एक बहुत ही चर्चित कहानी भी है .कि मंगल देवता के दो जुड़वां पुत्र थे - रोमुलस और रिमस। एक बार तेबर नदी में बाढ़ आने से ये दोनों बहते हुए पेलेटाइन पहाड़ी के पास पहुंच गए। इन बच्चों को एक मादा भेडि़या ने दूध पिलाया व एक चरवाहे ने दोनों को पाला। बड़े होकर इन दोनों भाइयों ने एक नगर की स्थापना की जिसका नाम रोमुलस के नाम पर रोम रखा गया व रोमुलस इसके सम्राट बने। <span title= इटली पहुँचने के लिए लन्दन से हमारी उड़ान मिलान की थी और फिर वहां से वेनिस और वेनिस से रोम हमें योरोस्टार (ट्रेन ) से पहुंचना था.यूँ यह ट्रेन काफी सुविधाजनक थी परन्तु पूरी इटली में एक समस्या बहुत विकट है वह यह कि वहां बस में चढो या ट्रेन में सिर्फ टिकट लेने से काम नहीं चलेगा उसे वहां लगी कुछ मशीनों पर वैलिडेट (पंच )भी करना पड़ेगा. वर्ना वो टिकट कोई मायने नहीं रखती.खैर असली समस्या यह नहीं थी , परेशानी तो यह थी कि यह सब अगर आप पहले से नहीं जानते तो वहां जाकर आपको कोई बताने वाला नहीं मिलेगा और भाषा की अनभिज्ञताकी वजह से वहां कुछ लिखा आप पढ़ नहीं पाएंगे.और अगर आप टिकट बिना वैलिडेट कराये बस या ट्रेन में पहुँच गए तो आपको कह दिया जायेगा कि टिकट वैलिड नहीं है.और अगर आपकी किस्मत अच्छी है तो कोई आपको समझाने वाला मिल जायेगा कि आपको करना क्या है.लेकिन जब तक आप समझ कर टिकट वैलिड कराने जायेंगे आपकी बस या ट्रेन छूट जाएगी.या फिर आपको जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.खैर इस मामले में हमारी किस्मत अच्छी थी और कुछ ऐसा होता है ये हम कहीं नेट पर पढ़ चुके थे तो एक ही बार के झटके में हमें समझ में बात आ गई और आगे से यह काम सबसे पहले याद रखा गया. खैर शाम को करीब पांच बजे हम रोम के ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे.और वहां पहुँचते ही एहसास हुआ कि हमारे भारतीय मित्र कितनी अफवाह उड़ाते हैं उन्होंने हमें कहा था कि रोम और नई दिल्ली में कोई फरक नहीं है. परन्तु स्टेशन से बाहर निकलते ही उनकी बात का मर्म हमें समझ में आने लगा. वाकई भारत के ही किसी बड़े शहर के जैसा माहौल था.वही छोटे छोटे खोमचे, फुटपाथ पर ही चादर बिछा कर सामान बेचते लोग और अपनी -अपनी कम्पनियों के पैकेज बेचने को बेताब ट्यूरिस्ट गाइड.मोलभाव करते हमारे पीछे पीछे भाग रहे थे. फर्क था तो बस इतना कि वे सारे भारतीय की जगह बंगला देशी थे. हालाँकि देखने से तो सारे साउथ एशियन एक जैसे ही लगते हैं.पर हमें फ़िक्र थी अपने होटल पहुँचने की जो कि शहर से कुछ बाहर था और हमें वहां तक पहुँचाने के लिए एक बस आनेवाली थी जिसका कि बताई हुई जगह पर कोई अता पता नहीं था.और उस तक पहुँचने में हमें काफी मशक्कत करनी पडी . इन सब समस्यायों को देखते हुए.और रोम के दर्शनीय स्थलों की संख्या देखते हुए सर्वसम्मत्ति से ये फैसला हुआ कि २ दिन का बस टूर ले लिया जाये.इससे बेशक समय की थोड़ी पाबन्दी रहेगी परन्तु कम समय में काफी कुछ कवर किया जा सकेगा.अत: वहीं एक बंगाली भाई से २ दिन का टूर बुक करा के हमने होटल के लिए प्रस्थान किया. दूसरे दिन उसी स्टेशन से हमारी रोम यात्रा शुरू हुई और सबसे पहला पड़ाव आया कोलेजियम. रोमन आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना। इसकानिर्माण तत्कालीन शासक वेस्पियन ने 70-72वीं ईस्वी में प्रारंभ किया था, जिसे उनके बाद सम्राट टाइटस ने 80 ईस्वी में पूरा किया। 81 से 96 के बीचडोमीशियन के राज में कुछ और परिवर्तन किए गए। इसका नाम सम्राट वेस्पियन और टाइटस के पारिवारिक नाम फ्लेवियस के कारण एम्फीथिएटरम्‌फ्लावियम रखा गया परन्तु वर्तमान में यह कोलेजियम के नाम से ही प्रसिद्ध है. हालाँकि इसके अब खंडहर ही शेष हैं परन्तु इन खंडहरों को देख कर अनुमान लगाया जा सकता है कि इमारत कितनी विशालकाय और यहाँ होने वाली गतिविधियाँ कितनी भयावह रही होंगी. यहाँ योद्धा अपनी युद्ध कला का प्रदर्शन करते थे और यहाँ तक कि कई दिनों से भूखे रखे जंगली जानवरों से लड़कर उन्हें अपने कौशल का प्रदर्शन करना होता था.इन जानवरों को प्रतियोगिता स्थल तक लाने के लिए भूमिगत मार्ग का उपयोग किया जाता था.और फिर बुरी तरह से घायल और शहीद योद्धाओं को रखने की भी अलग व्यवस्था थी.कोलेजियम में घूमते हुए अक्सर ही लगता जैसे अभी उस द्वार से भूखे शेर निकल कर आयेंगे . वहां खड़े ज्यादातर दर्शकों के इस कल्पना मात्र से रौंगटे खड़े हो जाते थे. खैर वहां से राम राम करते बाहर निकले तो कुछ रोमन - "रोमन एंड कंट्री मेन" स्टाइल में(पारम्पारिक रोमन वेश भूषा) बाहर घूम रहे थे, और लोग उनके साथ तस्वीरें खिचवा रहे थे. जाहिर है ये मौका हम भी नहीं खोना चाहते थे तो उचक कर पहुँच गए और बत्तीसी निकाल कर खड़े हो गए. फोटो लिया गया और जैसे ही हम धन्यवाद कह कर हटे उसने हमें पकड़ लिया और बोला फीस निकालो. हमने कहा कहाँ लिखा है ? तो महाशय बोले ३० डिग्री की गर्मी में ये लबादा लादे हम यहाँ फिर रहे हैं पागल नहीं हैं. फोटो खिचवाने के पैसे हैं. वो देने पड़ेंगे .पर हम अड़ गए कि ऐसा कहीं लिखा नहीं है. और आपने पहले कहा भी नहीं था. इसलिए हम तो नहीं देंगे पर वो जोर जबरदस्ती पर उतर आया और कहने लगा कि फिर फोटो डिलीट करो हमने कहा ठीक है कर देते हैं और उसे फोटो डिलीट करके दिखा दी. अब वह अपनी जीत पर गर्व करता चला गया परन्तु उसे यह नहीं पता था कि उसका पाला हिन्दुस्तानियों से पडा था.जो उस ज़माने में ज्ञानी कहलाते थे. जिस ज़माने में उसके पूर्वजों को मुँह भी धोना नहीं आता था.असल में हमने उसे जो डिलीट करके दिखाया था वो वीडियो रेकॉर्डिंग था और उसके बाद का स्टिल फोटो हमारे कैमरे में सही सलामत था :). रोम में एक रोमन को चकमा देकर हम पहुंचे वहीं पास के एक महल में जहाँ के खंडहर में भी भव्यता और एश ओ आराम झलक रहा था.सभ्यता के आरम्भ में भी उस महल में प्रयोग होने वाला मार्बल किसी उच्च कोटि के मार्बल से ज्यादा अच्छा प्रतीत होता था. और यह सिद्ध भी कर दिया हमारे साथ की गाइड ने,वहीं एक जगह पर एक ग्लास पानी डाल कर. पानी पड़ते ही उस जगह एक धूल पड़े पत्थर की जगह बेहद खूबसूरत,रंगीन और चमकदार नजर आने लगा वैसे यहाँ यह कहना भी आवश्यक होगा भवन निर्माण हो या मूर्ति कला रोम की अपनी एक अलग ही पहचान है.जगह जगह लगे हुए स्टेचू इतनी सूक्ष्म मानवीय शारीरिक बनावट का नमूना हैं कि देखने वाला दांतों तले उंगली दबा लेता है.अभी तक मैंने भारत का कोणार्क हो या फ्रांस का लौर्व ज्यादातर जगह मूर्तियों,प्रतिमाओंया चित्रों में स्त्री को ही कलात्मक रूप में देखा था परन्तु रोम में ( पूरे इटली में ही ) इसके इतर पुरुष के नग्न स्टेचू दिखाई पढ़ते हैं जो वहाँ के मूर्तिकार की कारीगरी,मानवीर शरीर संरचना विज्ञान और उच्च कलात्मकता को बताते हैं. सुविनियर के तौर पर भी इसी तरह की मूर्तियों की वहां सर्वाधिक बिक्री होती देखी जातीहै. रास्ते में रोम की पुरातन दीवार और और बहुत से कलात्मक स्मारकों से गुजरते हुए हमारा अगला पड़ाव था वैटिकन सिटी. --क्रमश:

68 comments:

  1. वाह.... बहुत बढ़िया आलेख आपने तो इस लेख के माध्यम से मेरी Itly vist की सारी यादें ताज़ा करवादीं। :-) सच में roma,florence pisa,vanice हर एक जगह बहुत खूबसूरत है। वैसे खूबसूरत तो हमारा इंडिया भी कम नहीं है। मगर इन सब जगह को देख कर लगता है कि काश हमारे यहाँ भी हमारे देश की ऐतिहासिक और प्राचीन स्भ्यता को ऐसे ही संभाल कर रखा जाता। जितना कि इन लोगों ने रखा है। तो कितना अच्छा होता

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  2. a shikha... tum kitne achhe se likhi ho... main agyaani bhi samajh gai - sachchi

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  3. बढ़िया जानकारी मिली ... और खूब घुमे ... आभार शिखा जी !

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  4. रोम का नाम सुनते ही वो जुमला याद आता है की " रोम वाज नोट बिल्ट इन अ डे ".. महान रोमन साम्राज्य और सभ्यता इतिहास की अमूल्य सम्पदा है . आपकी नजरों से रोम को जानने का अवसर मिल रहा है वो भी बहुत सुरुचिपूर्ण और रोचकता से . हम आभारी है और इस क्रमशः रूपी बाधा को बहुत दिनों तक झेलना पसंद नहीं करेंगे . .

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  5. bahut pahle rome gayee thi lekin aaj aapki wazah se sari yaden taza ho gayeen....thank you.

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  6. रोम के बारे में ऐतिहासिक जानकारी ..वहाँ की संस्कृति , कला सभी के दर्शन हो गए ...लेखन शैली ऐसी है कि मेरे लिए इतिहास रुक्ष विषय होते हुए भी रुचिपूर्वक एक साँस में पढ़ गयी ..

    ऐतिहासिक धरोहर " रोम " के विषय में काफी जानकारी देता अच्छा लेख ..

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  7. इतिहास की भव्यता समेटे रोम, सुन्दर विवरण।

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  8. रोम के बारे में बढ़िया जानकारी! आभार!


    Gyan Darpan
    RajputsParinay

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  9. चलो जी हमें तो भारत से ही फ़ुर्सत नहीं हुई है आप की नजरों से ही देख लेते है, अच्छा वर्णन।

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  10. ऐतिहासिक धरोहर " रोम " के विषय में काफी जानकारी देता अच्छा लेख ..

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  11. आपके माध्यम से एक महान सभ्यता का परिचय हो रहा है। आपको जैसा भी बताने वाला मिला हो न मिला हो हमें तो एक हुन्दुस्तानी मिला है जो हमारी भाषा में हमें हमारी नज़रों से इस सभ्यता के इतिहास में ले जा रहा है।

    आपकी शैली जबर्दस्त है और आलेख अपनी रोचकता से हमें बांधे हुए है।

    आगे भी साथ रहेंगे।

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  12. भवन निर्माण हो या मूर्ति कला रोम की अपनी एक अलग ही पहचान है.जगह जगह लगे हुए स्टेचू इतनी सूक्ष्म मानवीय शारीरिक बनावट का नमूना हैं कि देखने वाला दांतों तले उंगली दबा लेता है.
    चित्रों से ही महसूस हो रहा है .. कितनी कलाएं बिखरी हुई हैं दुनियाभर में !!

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  13. Jaankaaree aur rochaktaa se bharpoor aalekh! Bada hee maza aaya padhne me!

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  14. बहुत सुन्दर!
    --
    कल के चर्चा मंच पर, लिंको की है धूम।
    अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।

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  15. रोम पर रोमानी लेख पढ़कर हम तो रोमांचित हो गए ।
    वैसे ये बंगलादेसी भी सब जगह पहुंचे हुए हैं ।
    रोम में रोमानी को चूना लगाना भी कमाल का रहा ।

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  16. akele akele chalil gain na mujhe bhi lejati sath .
    khaer ye to majak hai pr aapne bahut hi sunder jankari di hai chitr ke sath aapki bhi ek photo hoti to aanand aajata .
    rachana

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  17. अश्विनी जी की मेल से प्राप्त टिप्पणी.-
    Ashwini Kumar Vishnu दिलचस्प जानकारियाँ प्रस्तुत करता है यात्रा-लेख । रोम की सभ्यता, रोम-राज्य की ख़ासियतें-कमजोरियाँ उत्सुकता और रोमांच से भरी तो हैं ही । तथ्यपूर्ण विवरण के साथ उन्हीं में से कुछ को दर्शाता वृत्तांत रुचिकर है । कालेजियम/एम्फिथिएटर की भयावहता को इंगित करता चित्र प्रभावशाली है । 'भेड़ियन' का दूध चोंखते रोमुलस और रिमस अच्छे लगे । रोमन पुरुष स्टेच्यु उत्कृष्ट शिल्प की मिसाल माने जाते हैं । प्रवाहपूर्ण शैली में रेखांकित किया है आपने। आगे और भी जानने का कौतूहल रहेगा..

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  18. jab rashmi di jaise agyani ke samajh me aa gaya...to hame to samajhna hi tha.............hahahah
    achchha laga tumahre sansmaran ko padh kar...
    ham to aise hi bhraman karte rahenge:)

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  19. बहुत सुंदर रही यात्रा, हम तो मुफ्त मे ही रोम घूम लिए।

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  20. ये हुई ना बात ... रूस के बाद रोम मज़ा आ गया अगला पार्ट जल्दी लिखिए ..

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  21. वाह! ब्लॉगिंग करते-करते रोम घूमि आये। बढ़िया जानकारी। शिखा जी वो वाली फोटू तो बड़ी दमदार है।

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  22. वाह! ब्लॉगिंग करते-करते रोम घूमि आये। बढ़िया जानकारी। शिखा जी वो वाली फोटू तो बड़ी दमदार है।

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  23. सचित्र,रोचक और विस्तृत जानकारी,आभार.

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  24. विश्व की प्रचीनतम सभ्यता में से एक सभ्यता रोम को आपने जिस तरह से प्रस्तुत किया है ,बहुत ही अच्छा लगा । इस ज्ञान से परिचित करवाने के लिए धन्यवाद । मेर पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा ।

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  25. यादें ताज़ा कर दीं आपने ...एक बार दुबारा जाने का दिल करता है !
    शुभकामनायें !

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  26. बढिया जानकारी भरा लेख।
    आभार....

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  27. रोम के विषय में ऐतिहासिक जानकारी लिए बेहतरीन आलेख.....

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  28. महोदय/महोदया जैसा कि आपको पहले ही माननीय श्री चन्द्र भूषण मिश्र 'ग़ाफ़िल' द्वारा सूचित किया जा चुका कि आपके यात्रा-वृत्त एक शोध के लिए सन्दर्भित किए गये हैं उसको जिस रूप में प्रस्तुत किया गया है वह ब्लॉग ‘हिन्दी भाषा और साहित्य’ http://shalinikikalamse.blogspot.com/2011/10/blog-post.html पर प्रकाशित किया जा रहा है। आपसे अनुरोध है कि आप इस ब्लॉग पर तशरीफ़ लाएं और अपनी महत्तवपूर्ण टिप्पणी दें। हाँ टिप्पणी में आभार मत जताइएगा वरन् यात्रा-साहित्य और ब्लॉगों पर प्रकाशित यात्रा-वृत्तों के बारे में अपनी अमूल्य राय दीजिएगा क्योंकि यहीं से प्रिंट निकालकर उसे शोध प्रबन्ध में आपकी टिप्पणी के साथ शामिल करना है। सादर-
    -शालिनी पाण्डेय

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  29. सबसे आगे हिन्‍दुस्‍तानी, मजेदार तस्‍वीर.

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  30. रोमन सभ्यता के साथ ही पर्यटक स्थल तक पहुँचने की जानकारियां और सावधानियां , सब है आपके संस्मरण में !
    रोचक !

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  31. बहुत सुन्दर, बधाई

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  32. मेरी रोम यात्रा भी आप ही अनुभव से मिलती जुलती है!...टिकट पंचिंग की बात छोडिए, मेरी तो टिकट ट्रेन में ही गुम गई थी ...लेकिन लगता है विश्वास पर अब भी दुनिया कायम है...टी.टी. महाशय ने सौहार्द पूर्ण व्यवहार दिखाया और मै मोटे जुर्माने से बच गई!...रोम, इटली,वेनिस, पेरिस, वैटिकन सीटी वाकई देखने लायक जगहें है!

    ...वहुत सुन्दर और विस्तुत वर्णन आपने दिया है, धन्यवाद!

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  33. बहुत रोचकता से बता रही हो मगर क्रमश: ने सब गड्बड कर दिया…………॥

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  34. arvind mishra drarvind3@gmail.com to me

    Shikha ji ,
    I am afraid this comment is taking too long a time to be posted at your blog ..please do it yourself and oblige!
    शिखा जी हम लोहा मान गए आपका .... इतली वासी भी गच्चा खा गया आप से
    वे तो बड़े ठग माने जाते हैं !
    रोमांचपूर्ण

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  35. रोम की अच्छी यात्रा करवा रही हैं।

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  36. ईश्वर की कृपा ही है की जरा सा असमय मिला और स्पंदन में आगया..और जब रोम यात्रा पढ़ना शुरू किया तो वाह ...अब तो बस सारा रोम आपके साथ ही घूमना है यात्रा वृत्तांत पढ़ने के दौरान दो बार फोन बजा मेरा, दोनों बार मुझे बहुत बुरा लगा इस तरह डूबे हम...खैर वो तो आपकी लेखनी का जादू है...जब भी कभी जो भी आप लिखते हो उसका एक स्तर होता है
    बहुत दिन बाद कुछ अच्छा पढ़ा| धन्यवाद आपको शिखा जी ! पैसे आपने खर्च किये और लाभ हमें मिल रहा है ! :)

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  37. Great! Loved your blog...Will Keep visiting to read in details..:-)

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  38. यात्रा वृतांत अच्छा लगा...|
    सचित्र प्रस्तुति... खुद के रोम में होंने की अनुभूति करा देती है|
    अच्छा लगा|

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  39. सचित्र यात्रा वृतांत खुद के सफर में होने का अहसास कर देती है|
    अच्छा लगा पढ़ कर!

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  40. रोम रोम रोममय हो गया :)

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  41. इतिहास और संस्कृति की उम्दा जानकारी देती सुन्दर पोस्ट |

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  42. इतिहास और संस्कृति की उम्दा जानकारी देती सुन्दर पोस्ट |

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  43. इस वर्ष जून में रोम जाने का मौका मिला था.
    वास्तव में रोम इतिहास की धरोहर है.
    आपने भी खूब चकमा दिया वहाँ के मक्कारों को.
    यदि कुछ लेना हो तो पहले बताना चाहिये.
    रोम में भाषा की भी बहुत समस्या है.
    अंग्रेजी आती होगी तो भी जानबूझ कर नही समझेंगें.

    सुन्दर चित्रों के साथ प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  44. बहुत रोचक और खूबसूरत। धन्यवाद।

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  45. काफी दिनों बाद आपका ट्रावेलोग पढ़ने को मिला.. मेरे पसंदीदा स्थलों में से एक है रोम (और दूसरा कैरों).. चित्र ख़ूबसूरत हैं और जानकारी महत्वपूर्ण!!

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  46. आनन्‍द में पूरी तरह डूब चुके थे कि लिखा दिखायी दे गया क्रमश:। कोलेजियम की बिल्डिंग बड़ी शानदार लग रही है। आगे की कड़ी का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

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  47. रोम के बारे में ऐतिहासिक जानकारी
    ऐतिहासिक धरोहर " रोम " के विषय में काफी जानकारी देता अच्छा लेख

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  48. वाह ओने तो रोम की सैर घर बैठे ही करवा दी ... क्या गज़ब के कमरे से हर कोण को समेटा है इस पुरातन शहर को ...

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  49. आपका पोस्ट अच्छा लगा । .मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  50. आपका ये वृतांत पढ़कर तो रोम रोम में रोम बस गया...

    इटली सरकार और यूरोपियन यूनियन को आपको टूरिज़्म अंबेसडर बनाने में देर नहीं लगानी चाहिए...

    जय हिंद...

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  51. कोलेजियम रोम में हमारा अंदर से देखने से रह गया था,आपके सुन्दर चित्र ने यह कमी भी पूरी कर दी.वैसे वरोना में हमने छोटा कोलेजियम अंदर से देखा था.

    मेरे ब्लॉग पर आप आयीं,इसके लिए आपका बहुत बहुत आभारी हूँ,शिखा जी.

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  52. रोम-रोम स्पंदन हो गया तो. सुन्दर अति सुन्दर.
    पंकज झा.

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  53. रोम के विषय में रोचक शैली और चित्रों के साथ इतनी जानकारी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद शिखा जी...अगली कड़ी का इंतज़ार है.

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  54. WAAH...ITANA PYARA LEKH? AB ISASEE BHI APNI PATRIKA ''SADBHAWANA DARPAN'' KA SHRINGAAR KARANA HOGA.

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  55. ऐसे लेखों से उत्सुकता बढ़ा देती हैं आप... दुनिया घूमने का मन अभी शैशवावस्था में है उंगली दिखती है तो थामने का मन करता है. कि मैं भी अपने पैरों पर दो कदम चलूँ.

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  56. ...और आपने जो डिलीट किया वो रीकवर भी हो सकता है... यहाँ तक कि भूल से मेमोरी चिप फार्मेट भी हो जाये तो भी... ;) आखिर हम हिन्दुस्तानी जो ठहरे.. भूतपूर्व/अभूतपूर्व ज्ञानी!! ;)

    कैमरे में आधुनिक मेमोरीचिप होनी चाहिए जो रिकवरी करने योग्य हो.. सोनी ने बहुत पहले लांच भी कर दिया था..

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  57. जानकारीवर्धक लेख.....
    चित्र ...बहुत सुन्दर

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  58. यह ठीक नहीं लगा कि तस्वीर खिंचवाकर ठग लिया गया…बेचारों का तर्क सही था…डिलीट भी करके चतुर बनना…अच्छा चलिए…

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  59. aapke yaatra-vritaant ka sundar chitran hamein bhi desh duniya ke sair karata hai. bahut achchha likha hai, shubhkaamnaayen.

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  60. @असल में हमने उसे जो डिलीट करके दिखाया था वो वीडियो रेकॉर्डिंग था
    :) सचित्र और रोचक जानकारी!

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  61. yadi sach kahu to, aaj aapke blog mei bahut dino baad aayi hu... jo latest post hai, uski heading maatra padhkar is post ko pahdne aa gai...
    Italy, mujhe bhi hamesha ROManchit karta raha hai... waha ka architecture, engineering, culture... n food... bas poochhiye mat..
    n heartly thank you for writing so nicely... har baat likh di aapne...
    ab bhaag rahi hu second part padhne... catch u there... :)

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  62. दूसरा भाग पहले ही पढ़ लिया...ये भी अति रोचक विवरण...

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