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Friday, 17 June 2011

इन्द्रलोक में ब्लॉगिंग...


देश के गंभीर माहौल में निर्मल हास्य के लिए :)
पृथ्वी  पर ब्लॉगिंग  का नशा देख कर कर स्वर्ग वासियों को भी ब्लॉग का चस्का लग गया. और उन्होंने भी  ब्लॉगिंग  शुरू कर दी. पहले कुछ बड़े बड़े देवी देवताओं ने ब्लॉग लिखने शुरू किये, धीरे धीरे ये शौक वहां रह रहे सभी आम और खास वासियों को लगने लगा यहाँ तक कि यमराज के भी कुछ गणों  ने ब्लॉग बना लिए और उत्पात मचाने लगे.कुछ लोगों ने अपना अपना मुखिया भी चुन लिया .जब कुछ छोटे देवी देवता अच्छा लिखने लगे और उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स भी मिलने लगा तब इंद्र का सिंहासन  डोलने लगा. स्वर्ग में हडकंप मचने लगा .सबको अपनी अपनी कुर्सी और रोटी  की चिंता सताने लगी.तो इंद्र ने एक सभा बुलाई देखिये एक झलक ---
सबसे पहले नारद का दल आया -.दुहाई है प्रभु दुहाई है .आज कल ब्लॉग में इतना मौलिक और अच्छा सामान मिलने लगा है हमारी तो रोजी छिन रही है प्रभु .पहले जिस चीज़ के लिए अख़बारों के मालिक हमें पैसे देते थे हमारी चिरौरी  करते थे, अब उन्हें वो सब फ्री में मिल रहा है .प्रभु वो अब हमें पूछते ही नहीं .जहाँ जगह खाली मिलती है कोई ब्लॉग की पोस्ट लेकर ठोक  देते हैं . कुछ करिए प्रभु ....कुछ करिए.
इंद्र.- हाँ समस्या तो गंभीर है तुम ऐसा करो पहले खुद एक ब्लॉग बनाओ फिर ब्लॉगरों से दोस्ती हो जाये तो उन्हें बरगलाना शुरू करो.उन्हें कहो कि अपनी पोस्ट अख़बारों में ना दें फ्री में. उन्हें पैसे का लालच दो ,उन्हें कहो कि अखबार वाले उन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं.उनकी कीमती चीज़ का इस्तेमाल फ्री में कर रहे हैं.देखो !ये पढने लिखने वाले लोग बड़े सैंटी  होते हैं. ये तरीका जरुर काम करेगा और वो इसके  खिलाफ आवाज़ उठाएंगे. अब अखवार वाले हर किसी को तो पैसे देने से रहे .और मान लो देने भी लगे, तो पैसे के चक्कर में लोग वह लिखेंगे जो उनसे लिखने को कहा जायेगा और फिर ब्लॉग पोस्ट की सहजता और रोचकता ख़तम हो जाएगी.तो अखबार वाले फिर से तुम्हारे पास चले आयेंगे और तुम्हारी चांदी ही चांदी.
 दल  - अरे महाराज ये भी किया अब तक कर रहे हैं. कुछ ब्लॉगर  तो झांसे में और पैसे के लालच में आ भी गए. पर कुछ तो बहुत ही ढीठ  हैं वो कहते हैं हम तो ब्लॉग लिखते हैं अपनी ख़ुशी के लिए, अपने विचार ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए, फिर वो कैसे भी पहुंचे. चाहे अखबार से या रेडिओ से हम तो खुश ही होंगे.और ब्लॉग लिखने में कौन से हमें पैसे मिलते हैं जो कहीं और छपने से पैसे की उम्मीद करें .बस हमारी बात हमारे नाम से ज्यादा लोगों तक पहुँच रही है तो हम तो खुश हैं.
उस पर भगवान हमें तो सारी राजनीति  देख कर लिखना पढता है ये ब्लॉगरों  की तो कोई जबाबदेही है नहीं , बिंदास लिखते हैं तो जनता हाथों हाथ ले रही है.बहुत कहा कि स्वर्ग की ब्लॉगिंग में कचरा है, हनुमान की सेना है उसपर उसके हाथ में उस्तरा पकड़ा दिया है.पर कोई सुनता ही नहीं.चुपचाप बस अपना काम करते रहते हैं.
तभी भड़भड़ाता  दूसरा दल आया  -
महाराज एक और विकट  समस्या है .वो है टिप्पणियों की .  कुछ लोगों के ब्लॉग में इतनी  टिप्पणी आती है कि पूछो मत हाँ ये और बात है कि वो लिखते भी ठीक ठाक ही हैं, और दूसरों को सराहते भी  हैं. लेन देन  है महाराज.और हम अपनी अकड़ में कहीं जा नहीं पाते.इत्ते इत्ते लिंक भेजते हैं लोगों को कि इनबॉक्स रोने लगे फिर भी  हमें कम टिप्पणी मिलती हैं . बहुत दुखी हैं महाराज क्या करें.
इंद्र. - तुम ऐसा करो कि एक एक अभियान छेड़ दो, कि ये टिप्पणी वगैरह  सब बेकार है. जो स्तरीय लिखने वाला है उसे इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए और इसका आप्शन ही बंद कर देना चाहिए.
दल  - अरे ये भी किया था प्रभु ! और कुछ दोस्त तो साथ भी आ गए.कुछ देवताओं को उनकी महानता का  वास्ता देकर साथ मिलाया कि इन टिप्पणियों से उनका स्तर गिर जाता  है .पर प्रभु उन लोगों का क्या करें जो महा जिद्दी हैं .कहते हैं कि हमारा तो दो शब्दों से भी उत्साह बढता है .आखिर हर कलाकार अपनी कला पर तालियाँ और वाह वाह चाहता है वही उसकी उर्जा है. फिर हम क्यों नहीं .
और प्रभु उसपर स्वर्ग की देवियों और अप्सराओं ने भी ब्लॉगिंग शुरू कर दी है .अब तक तो वे देवताओं के कामों में ही उलझी रहती थीं अब जब से लिखना शुरू किया है कमाल हो गया है ऐसा लिखती हैं कि सब खिचे चले जाते हैं .हमने तो यहाँ तक फैलाया कि अप्सराओं के लेखन पर नहीं, वे अप्सराएँ हैं इसलिए लोग जाते हैं उनकी पोस्ट पर.परन्तु  कोई फायदा नहीं प्रभु! उनके लेखन में ताजगी है,मौलिकता है और उनके पास समय भी है प्रभु .हमें तो कोई पूछता ही नहीं .अब कितना किसी को भड़काएं ..
तभी ब्रह्मा का दल दौड़ा दौड़ा आया - प्रभु गज़ब हो गया .हर कोई आम ओ ख़ास  लिखने लगा है. हर कोई कवितायें,कहानियां ,संस्मरण लिख रहा है कोई विधा नहीं छोड़ी भगवन ! साहित्य की  तो ऐसी तेसी हो गई है प्रभु !.उनके लेखन में  इतनी ताजगी है हमारा साहित्य तो किलिष्ट लगता है लोगों को .उनकी पोस्ट धडाधड छप रही है प्रभु .ईमानदार  अभिव्यक्ति होती है तो लोग खूब पसंद कर रहे हैं .पर भाषा के स्तर  का क्या प्रभु? हमें कौन पूछेगा फिर ? अनर्थ हो रहा है अनर्थ.

इंद्र - अरे तो आप मुहीम चलाइये कि स्तरीय लिखा जाये , सार्थक लिखा जाये. अपने को ऊँचा और दूसरे के लेखन को निम्न बताइए.लोगों को भडकाइये  कि पॉपुलर  लोगों की पोस्ट पर ना जाएँ .उन्हें लिखना नहीं आता.भाषा और विधा के नाम पर फेंकिये पत्थर उनपर .जरुर असर होगा .फिर आप ही आप होंगे और भाषा भी जहाँ की तहां रहेगी .
दल- वही तो  कर रहे हैं प्रभु! कुछ लगाये भी हुए हैं इसी काम पर. परन्तु  जैसे कुछ लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती महाराज, रिएक्ट ही नहीं करते हंगामा ही नहीं होता फिर क्या करें. हमें तो सार्थक लेखन के नाम पर बार बार ना जाने कितनी निरर्थक पोस्ट लिख डालीं.पर कोई असर नहीं हुआ. .
 सहायता कीजिये भगवान रहम कीजिये हर उपाय कर लिया है.कुछ ब्लॉगरों  को ब्लॉगिंग  छुडवाने के लिए टंकी पर भी चढ़ाया पर अब उसे भी कोई भाव नहीं देता. तो बेचारे खुद ही उतर आते हैं थोड़ी देर में. माना कि ब्लोगिंग सहज, सरल अभिव्यक्ति का मंच है पर अगर वो हमारे क्षेत्र में घुसपेठ करेंगे तो गुस्सा तो आएगा ना प्रभु ! 
दुहाई है ...दुहाई है...दुहाई है.....
स्वर्ग लोक में से आता शोर सुनकर यमराज के कुछ गणों के भी कान खड़े हो गए .उन्हें उत्पात करने का मौका  मिल गया .सोचा चलो बहती गंगा में हमऊँ हाथ धो लें इसी बहाने दो चार पर भड़ास निकाल आयें .
सो उन्होंने आकर सभा में उत्पात मचाना शुरू कर दिया और सभा बिना किसी हल या नतीजे के ही समाप्त हो गई.

85 comments:

  1. ब्लोगिंग जिंदाबाद.........
    स्वर्ग की सत्ता नहीं चलेगी..इंद्र की मठाधिसी नहीं चलेगी नहीं चलेगी नहीं चलेगी......
    जहां हो ब्लोगर वहां ना हों मठाधिस....स्वर्ग की सत्ता हम उखाड़ फेकेंगें...

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  2. वाह धरती पर बैठे बैठ ही आपने हम सब को स्वर्ग के दर्शन भी करवा दिए ... जय हो आप की महिमा अपार है ... ;-)

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  3. kya baat hai ha ha ha ha ha ....
    aapki soch ko salam vyang ke sath hasya kamal hai
    is pr to natak kiya ja sakta hai .
    iska manchan ho to maja aajaye
    rachana

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  4. इन्द्रलोक में ब्लॉगिंग के माध्यम से ब्लॉगिंग पर लिखा गया व्यंग्य काफी रोचक लगा। साधुवाद।

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  5. आज यह भी पता चल गया कि सुंदर लड़की भी अच्छी व्यंगकार हो सकती है...

    हैट्स ऑफ टू यौर व्यंग्य ...........सेन्स....

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  6. आज यह भी पता चल गया कि सुंदर लड़की भी अच्छी व्यंगकार हो सकती है...

    हैट्स ऑफ टू यौर व्यंग्य ...........सेन्स....

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  7. Blogging ka ek naya roop, sateek or karara vyang........

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  8. वाह ..
    क्‍या बात है !!
    बहुत खूब !!

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  9. एक पहली भी ऐसी ही गुगली आप की आयी थी और आज यह -
    फंतासी तो फंतासी व्यंग की भी टीस...धन्य हैं आप?
    गनीमत है कि चस्का अभी इन्द्रलोक तक ही है ,ब्लॉगर अभी भी स्वर्गवासी तो नहीं हुए :)

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  10. ये झगडा है ब्लोगिंग के महान ब्लोगरों का
    टिप्पणियो की मारामारी का
    इस ब्लोगिंग का यारों क्या कहना
    ये ब्लोगिंग है ब्लोगरों का गहना

    मज़ा आ गया शिखा…………सारी पोल खोल दी……………ऐसे व्यंग्य आते रहने चाहिये ताकि कोई ब्लोगर यदि सिर उठाये तो कुचला जा सके अपने व्यंग्यों से…………हा हा हा

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  11. अनर्थ हो रहा है अनर्थ.

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  12. तुम ऐसा करो कि एक एक अभियान छेड़ दो, कि ये टिप्पणी वगैरह सब बेकार है. जो स्तरीय लिखने वाला है उसे इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए और इसका आप्शन ही बंद कर देना चाहिए

    बहुत सही लिखा है
    धन्यवाद
    कभी हमारे ब्लॉग पर भी विजिट करे
    vikasgarg23.blogspot.com

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  13. बिल्कुल नया अंदाज.. बहुत बहुत बधाई

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  14. आपकी यह उत्कृष्ट प्रविष्टी कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी है!

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  15. सभा बिना किसी हल या नतीजे के ही समाप्त हो गई.
    .
    यही होता है अधिकतर . अच्छा लिखो अच्छा पढो बाकी जो हो रहा है फरेब है.

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  16. बस फेसबुक की तरह

    एक देवताबुक की

    जरूरत और है

    वो भी खुलवा दीजिए।

    अति रोचक किस्‍सा।

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  17. मजा आ गया. ऊर्जा बनी रहे.

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  18. वाह खूब स्वर्ग का नाम लेखे अपनों की बखिया उधेड़ दी अब नाप बताने का प्रयास मत करियेगा नहीं तो बहुतो को ब्लॉग्गिंग से संन्यास अवासंभावी है

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  19. स्वर्ग में इन्द्र का आसन डगमगा रहा है , धरती के ब्लोग्गर दुन्दुभी बजा रहे है (गाल नहीं बजा रहा मै ) , वो क्या कहते है ना एक तीर से कई निशाने , ऐसे ही लगाये जाते है . भाई इत्ता तो पता है की हमरा लिखा कूड़ा कचरा कोई अख़बार वाला अपने मन से तो लेता नहीं , तो पैसे मांगने की बात तो अभी कोसो दूर . वैसे एक बात और है इन्द्र ने अगर पत्रकारों को कॉपी राइट की सलाह दी होती ना तो टंकी पर चढाने की जरुरत ही नहीं पड़ती . दे मारा है आपने करारा वाला व्यंग . लोटने दीजिये सांप चाहे जिस लोक में लोटे .

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  20. बहुत खूब! बहुत सटीक व्यंग...

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  21. वाह , बहुत मज़ेदार ..

    सच भी है, देवलोक के लोग भी मनुष्य की मौज मस्ती से ईर्ष्या करते हैं ।

    अब वे भी ब्लागिंग के रोमांच से पुलकित होना चाह रहे होंगे ।

    एक नए पहलू को बखूबी छुआ आपने ।

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  22. बस जी हम तो यही जानते हैं की स्वर्ग भी यहीं है और नर्क भी यहीं ... अब इंद्र देवता कौन हैं सोच रहे हैं ...

    लेख पढ़ कर लगा कि स्वर्गवासी भी हो गए तो कोई बात नहीं ब्लॉगिंग वहाँ भी जारी रह सकती है ..और कमोवेश यहाँ जैसा ही माहौल मिलेगा ..मन प्रसन्न हो गया .. अब तो बाद कि भी चिन्ता नहीं .:):)

    शानदार व्यंग ... एक ही बात सटीक है कि अच्छा लिखो बाकी सब बेकार है :):)

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  23. पृथ्वी निवासियों की तो कोई सुनता नहीं । हो सकता है कि इन्द्रलोक से आती गुहार ही काम कर जाये ।
    पुराने विषय पर नया अंदाज़ --बढ़िया रहा जी ।
    बधाई ।

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  24. ब्‍लॉगरी सभा और बेनतीजा (बेफजीता) हो ही नहीं सकता जी.

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  25. हंसी हंसी में बहुत नसीहत कर दिया आपने ब्लागरो को
    बेहतरीन व्यंग

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  26. चलिए कम से कम ये तो पता चल गया की मरने के बाद ऊपर भी हम सभी ब्लोगरो को ब्लोगिंग करने की पूरी सुविधा मिलेगी |

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  27. सुन्दर प्रस्तुति.

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  28. aapne bilkul sahi kaha hai you r right

    yaha par aapki link jodi gai hai hindi blog ko aage tak le jaane ke liye thank ब्लॉग जमावड़ा

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  29. This comment has been removed by the author.

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  30. शिखा दी..पढ़ के मजा आ गया ...बहुत ही बखुबी आपने ब्लागिंग में पनप रहे समस्या को हास्य के माध्यम से बताया है......बहुत ही उम्दा और सुंदर व्यंगय।...लाजवाब।

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  31. बड़े तरीक़े से जो आपने समझाने की कोशिश की है समझ में आ गई। मैं तो टिप्पणी के लिए ही लिखता हूं। फिर भी टिप्पणी न आए तो ...
    आज समझ में आया कि ये तो इन्द्र की चाल है ...!

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  32. हा हा हा, आपने लिंक दि्या था तब से हँस रहा हूँ जब हँसी बंद हुयी तो 37 कमेंट आ चुके थे। :))

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  33. समय समय पर इंद्र का सिंघासन डोलते सुना है। देवताओं की चिंता जायज है।

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  34. इस बहाने महिला ब्‍लागरों की तो खूब तारीफ हो गयी, हम तो गद गद हुए। अब चाहे दिव्‍या की हो या रश्मि रविजा की लेकिन हमें तो लगता है कि हम सबकी ही हो गयी। अपने मियां मिठ्ठू बन गए हैं जी। बढिया लिखा है, डोलने दो इन्‍द्र का सिंहासन, बस कहीं उस पर भी इंन्‍द्राणी ना बैठ जाए! हा हा हा हा।

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  35. और प्रभु उसपर स्वर्ग की देवियों और अप्सराओं ने भी ब्लॉगिंग शुरू कर दी है .अब तक तो वे देवताओं के कामों में ही उलझी रहती थीं अब जब से लिखना शुरू किया है कमाल हो गया है ऐसा लिखती हैं कि सब खिचे चले जाते हैं...

    लगता है टीआरपी बढ़ाने के लिए वही नुस्खा अपनाना पड़ेगा जो बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान से निकलने के लिए अपनाया था...शिखा जी, आप तो लंदन में रहती है...ये ज़रा क्रिस्टी या सॉदबी वालों से पता लगवा कर तो दीजिए कि बाबा ने जो दुपट्टा, सलवार, कमीज पहना था, उसका ऑक्शन कब होगा...बोली के लिए मेरा नाम अभी से लिखवा दीजिए...

    जय हिंद...

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  36. थ्री चीर्स ...जोरदार धमाकेदार ...मज़ा आ गया सेव कर रही हूँ

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  37. वाह...बहुत मजेदार व्यंग...मजा आ गया...

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  38. वाह ... बहुत खूब कहा है आपने ..बेहतरीन ।

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  39. पृथ्वीवासी ब्लागरों की समस्याएँ नभवासी इन्द्रलोक में भी । चलिये आगे के लिये भी एक निश्चिंतता बनी ।

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  40. शिखा
    पूरी पोस्ट पढ़ ली एक बात छुट गयी वो ये की देवता ब्लोगर एक दूसरे को टेक बहुत देते हैं . एक देवता ब्लोगर दूसरे को देवता ब्लोगर पर पोस्ट लिखते हैं तारीफों की . कोई किसी को महान कहता हैं कोई किसी को रजनीकांत , कोई किसी की तारीफ़ में उसको छोटा भाई कहता हैं तो किसी को बड़ा भाई और तो और कुछ तो बस यही करते हैं और अपनी दूकान चलाते हैं .
    और अप्सराओं में शायद ही कोई हो जिसने दूसरी अप्सरा की तारीफ़ में कोई पोस्ट लिखी हो . इस लिये नहीं की वहां कोई जलन हैं बस इसलिये की वहाँ लिखने को बहुत कुछ हैं और देवताओ के पास बस सोशल नेट्वोर्किंग हैं

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  41. गज़ब!
    आनंद आ गया पढ़कर।

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  42. गज़ब!
    आनंद आ गया पढ़कर।

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  43. बहुत खूब! बहुत सटीक व्यंग|

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  44. ये ऊपर वाली टिप्पणी हमारे नाम से न जाने किस वीरबालक ने की है जो इतना कमजोर है कि अपना नाम भी नहीं लिख सकता।

    रचनाजी से अफ़सोस जाहिर करता हूं कि मेरे नाम से किसी ने उनके प्रति बेहूदी टिप्पणी की ।

    शिखाजी अगर हो सकें तो पता लगायें कि वह टिप्पणी कहां से की गयी है।

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  45. सटीक व्यंग्य है शिखा जी!!

    किन्तु यह उहापोह भस्मासुर का है।, शिव से वरदान पाया भस्मासुर अतिउत्साह में नृत्य-मगन है। बस अब जलद ही अपने सर अपना हाथ धरने वाला है।

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  46. वाह , बहुत मज़ेदार .. बहुत सटीक व्यंग...

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  47. वाह , बहुत मज़ेदार .. बहुत सटीक व्यंग...

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  48. देशनामा पर स्‍पंदन देख कर वापस आया, तो पढ़ कर नये अर्थ खुले, सभी ब्‍लॉगर देवी-देवताओं को नमन.

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  49. "@ अनूप जी ! ये टिप्पणी किसने कि है ये पता लगाना मुझे नहीं आता.हाँ अगर आपने वह नहीं कि है तो वह टिप्पणी में हटा रही हूँ.

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  50. हा हा हा हा ....सुन्दर.
    पंकज.

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  51. रोचक व्यंग्य |
    साबित कर दिया अप्सराएँ वाकई अच्छा लिखती है :)

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  52. हे देवियों और अप्सराओं ...
    देवताओं का क्या होने वाला है अब ...
    शानदार व्यंग्य ...गुदगुदाती रही रचना ...
    बहुत खूब !

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  53. मजेदार है! अब शायद कोई देवता अवतार लेगा ब्लागिंग के लिये। उसे ब्लागर देवता के नाम से जाना जायेगा। :)

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  54. iLove
    blogging...

    जैसे सांसों का विस्तार होता है वैसा अब के ब्लॉग्गिंग का भी विस्तार है...
    और यह विस्तार कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ है, उसे शीखा जी के इस
    ब्लॉग लेखन में देखा जा सके...

    रसमय लेखन शैली, कुछ छोटी-छोटी पंक्तियाँ i.e. 'इन बोक्ष' रोने लगे...
    या 'ब्लॉग पर इतना मौलिक व अच्छा सामान मिलने लगा है' etc.,etc...विस्मित
    करे...'कुछ ब्लोग्गर्स को टंकी पर चढ़ाया'...जैसा आलेख में समावेशी कल्पना-
    विलास सटीक...चकित करे, विस्मित करे...

    शिखा जी द्वारा इतना अतिक्रमण है कि इन्द्रलोक तो ठीक, 'इहलोक' में भी हडकंप मच जाए...धीरे-धीरे चिंताओं का रेला हमारे professional लेखन-कर्मियों,प्रिंट-संस्थानों के पैर तले ही नहीं, दिल तले भी आ रहा है...

    आलेख पसंद आया...

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  55. हे भगवान् ये क्या लिखा है दी ?? हा हा हा..:D

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  56. जय हो ... किस किस को घायल किया है इस एक ही तीर से ... जैसा की समीर लाल जी ने कहा ... अनर्थ हो रहा है ...

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  57. इब्ब आएगा मज़ा
    खूब शांति पाठ पढ़्वा रए थे देवता लोग
    जब कुहराम मचेगा न एकाध मीट तो होये देयो
    जे मठाधीष का होता है... आज़ तक अपने पल्ले नईं पड़ा इसका अर्थ, क्या वो ही मठाधीष होवै हैं जो जड़ों में मठा डालत ह्वैं... अपना बताईए.. यदी वोईच्च हैं तो हम भी हीं लिये घूम रए हैं...

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  58. बहुत उम्दा पोस्ट मज़ेदार
    वाह

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  59. शिखा जी सुंदर पोस्ट बधाई |

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  60. शिखा जी सुंदर पोस्ट बधाई |

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  61. बहुत...बहुत ही बढ़िया व्यंग्य...
    अति उत्तम
    भाषा अगर धारा-प्रवाह हो तो पढ़ने का आनद कई गुणा बढ़ जाता है

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  62. bahut badhiya hai ji dene wala jab bhi deta deta chappar faad ke.....
    blogging bhi chappar faad kar faili hai to upar wale bhi khali kyun baithe.hahaha....:):)))
    is ke liye 3 cheers 2 u.

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  63. अब आप इतना बिंदास लिखेंगी तो देवताओं को चिंता तो होगी ही ना....निश्चित तौर पर बाकी अप्सराये भी बहुत खुश होंगी.....हाहाहा ...मजेदार है.

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  64. wah Shikah ji, Swarg Lok ke madhyam se Prithvi lok ki khoobsurti se khinchai kar dali hai apane!

    achhca chta-pata malsedar hasye-vyang

    badhai kabule!

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  65. गंभीर हास्य का सृजन किया है आपने इस आलेख में.
    ------------------------------
    कल 21/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की गयी है-
    आपके विचारों का स्वागत है .
    धन्यवाद
    नयी-पुरानी हलचल

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  66. हा हा हा... सही चित्रण किया आपने. पढकर मजा आ गया.

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  67. ब्लोगिंग भी तो समाज का ही हिस्सा है फिर अच्छाइयों के साथ कमियां भी स्वर्गलोक जायेंगी ही
    ...वो घबरा कर कहते हैं कि मर जायेंगे
    वहाँ भी चैन न पाया तो कहाँ जायेंगे ..
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति

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  68. he gyani sundari!! tumne ham sabki aankhe khol di...!!
    par fir ham to aankhe band rakhenge ..pahle ki tarah ..apne sade hue posts se logo ko pareshan karenge...upar se mail pe mail kar ke kahenge........ek comment ka daan kar do....:D:D

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  69. kya baat hai shikha ji, kya kalpana hai, sundar ati sundar.
    S.N.Shukla

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