Enter your keyword

Monday, 30 May 2011

यूँ ही कभी कभी ...



यूँ ही कभी कभी   
ठन्डे पड़ जाते हैं  
मेरे हाथ 
तितलियाँ सी यूँ ही 
मडराने लगती हैं पेट में. 
ऊंगलियाँ  
करने लगती हैं अठखेलियाँ
यूँ ही एक दूसरे से 
पलकें स्वत: ही हो जाती हैं बंद 
और वहाँ  
बिना किसी जुगत के ही 
कुछ बूंदे 
निकल आती हैं धीरे से 
काश कि तेरे पोर उठा लें 
और  कह दें उन्हें मोती 
या बिना हवा के ही 
उड़ जाये ये लट 
तेरी सांसो से
तो ये धूप भी 
पलकों पर  बैठ जाये 
और चमक जाये 
फूलझड़ी सी 
माना ये सब 
बातें हैं फ़िज़ूल की 
पर फिर भी   
कभी कभी यूँ ही 
थोडा सा रूमानी होने में 
 बुरा क्या है

77 comments:

  1. बहुत बढ़िया... स्पंदित करती कविता...

    ReplyDelete
  2. शिखा जी बहुत अच्छी लगी ये जानकारी जिसे पड़कर लगता है की आप एक अच्छी लेखक है आप लोग मेरे ब्लॉग पर भी आये जहा आपको मिलेगा बहुत कुछ लेबल में से अपनी पसंद की रचना चुने मेरे ब्लॉग पर आने के लिए यहाँ क्लिक करे

    ReplyDelete
  3. सुन्दर ....बिलकुल होइए रोमानी और जब-जब होइए तब-तब इसी तरह हमें भी अवगत कराते रहिये....बढ़िया.
    पंकज झा.

    ReplyDelete
  4. जी बिलकुल ...थोडा सा रोमानी होने में कोई हर्ज़ नहीं है ... खास कर अगर मौसम भी साथ दें और साथी भी !!

    ReplyDelete
  5. कुछ भी बुरा नहीं है, बल्कि जिन्दगी के कुछ पल ऐसे ही होने चाहिए और होते भी हैं. जिसमें मनचाहा हो तो दिल खुश हो जाता है.

    ReplyDelete
  6. aiwen hi..............:D
    par sach me koi farak nahi parta..!!
    khud ko khush karna kab se bura hone laga!!

    ReplyDelete
  7. कभी कभी क्यों , हमेशा रूमानी रहना चाहिए । आखिर ये जिंदगी होती ही कितनी लम्बी है ।

    ReplyDelete
  8. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है... kuch bura nahi... chalo thoda rumani ho len

    ReplyDelete
  9. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है --- बुरा तो बिल्कुल नहीं...बल्कि बेहद खूबसूरत होता है हर पल रोमानी होना :)
    अपनी ही एक कविता की एक पंक्ति.... "मेरे पास सिर्फ एक लम्हा है जो प्यार से लबालब भरा है..उसे हर पल जीने दो..हर पल पीने दों" ज़िन्दगी बस यही इक पल है..

    ReplyDelete
  10. थोड़ा-सा रुमानी होने में कोई बुरा नहीं है जी....

    ReplyDelete
  11. फिज़ूल की न कहें...बिना रुमानियत के भला कोई जिन्दगी है....बहुत खूब!!!!

    ReplyDelete
  12. कविता के भाव रूमानियत बिखेर रहे हैं ...
    बधाई आपको इतनी सुंदर कविता के लिए ...!!

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्दर..रूमानियत से भरपूर..बहुत कोमल अहसास..

    ReplyDelete
  14. अंदाज़ कुछ जुदा सा...
    अच्छा लगता है.

    ReplyDelete
  15. कोई बुराई नहीं हैं... बल्कि आवश्यक है जीवन जीने के लिए ! शुभकामनायें आपको !

    ReplyDelete
  16. बहुत ही खूबसूरत !
    मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion

    ReplyDelete
  17. थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    बहुत ही सुंदर.... यूँ ही कभी कभी..... रूमानियत भी ज़रूरी है : )

    ReplyDelete
  18. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 31 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर बहुत कोमल अहसास..

    ReplyDelete
  20. हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

    ReplyDelete
  21. बहुत मधुर भाव समेटे है..

    ReplyDelete
  22. माना ये सब
    बातें हैं फ़िज़ूल की
    पर फिर भी
    कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है

    the very basic nature of human being. We always make exceptions !!

    ReplyDelete
  23. रुमानी भाव लिए रोमानी कविता ... हृदय को स्पन्दित कर गई।

    ReplyDelete
  24. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है...

    बहुत सुन्दर रचना,
    - विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    ReplyDelete
  25. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है.

    ये भी सच कहा. हाँ थोड़ी फ्रिकुएँसी बढाई भी सकती है. दिल कुश कर दिया. बढ़िया.

    ReplyDelete
  26. या बिना हवा के ही
    उड़ जाये ये लट
    तेरी सांसो से
    तो ये धूप भी
    पलकों पर बैठ जाये
    और चमक जाये
    फूलझड़ी सी


    आदरणीय शिखा जी
    बहुत भावपूर्ण लेकिन नए अंदाज में रची गयी रचना ....मन के भावों को उद्वेलित करती है ...आपका आभार

    ReplyDelete
  27. रुमानी होने पर ही रुमानी कविताएं होती हैं।
    इसलिए रुमानी होना चाहिए।

    सुंदर भावाभिव्यक्ति

    आभार

    ReplyDelete
  28. 'थोडा सा रूमानी होने में बुरा क्या है' सवालिया तरीके से मानों नसीहत.

    ReplyDelete
  29. रूमानियत छलक रही है हर लफ्ज से , बड़ी सुँदर और रूमानी मुद्राये कल्पना में आती है आपके..ऐसे ही बने रहिये रूमानी और हम सबको रूहानी कविताये पढने की मिलती रहेगी.

    ReplyDelete
  30. लगता है लन्दन की बर्फ पिघल रही है :)

    ReplyDelete
  31. या बिना हवा के ही
    उड़ जाये ये लट
    तेरी सांसो से


    वाह ... क्या बात है ! बहुत सुन्दर !

    ReplyDelete
  32. rumaaniyat se bhari rachna kamaal hai.bahut achche shabdon ka prayog kiya hai.really awesome creation.

    ReplyDelete
  33. कभी-कभी रूमानी होने में बुरा क्‍या है? अरे रोज ही होइए, उम्र है आपकी। अच्‍छी कविता।

    ReplyDelete
  34. Very appealing creation Shikha ji !

    ReplyDelete
  35. bahut hi rumaani,premmai kavitaa badhaai aapko.



    please visit my blog and feel free to comment.thanks.

    ReplyDelete
  36. माना ये सब बातें हैं
    फ़िज़ूल की
    पर फिर भी
    कभी कभी
    यूँ ही थोडा सा रूमानी
    होने में
    बुरा क्या है...

    अरे किसने कहा कि ये बातें फ़िज़ूल की हैं ...कितनी खूबसूरत कल्पना ..पलकों पर धूप आ कर बैठ जाये .. साँस से चेहरे पर पड़ी लट हट जाए .. वाह वाह ..जैसा सोचोगी वैसा ही महसूस भी करोगी ...

    सुन्दर रचना ...रुमानियत से भरी हुयी

    ReplyDelete
  37. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है

    बहुत बढ़िया शिखा जी ....

    ReplyDelete
  38. kaun kehta hai burai hai romantic hone mein ...is gulabi hawa ke asar waali poem bahut pyaari lagi

    ReplyDelete
  39. पर फिर भी
    कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है

    शानदार :)

    ReplyDelete
  40. rumaniyat ki khumariyat to khoob kahi aapne!burai ye hai ki kabhikabhi kyun hua jaye, ye to sadabahar falsafa hona chahiye!
    achha laga padhna!

    ReplyDelete
  41. माना ये सब
    बातें हैं फ़िज़ूल की
    पर फिर भी
    कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    nahi koi burai nahi hai.sundar abhivyakti.

    ReplyDelete
  42. बहुत सुन्दर अभिवयक्ति
    विकास गर्ग
    vikasgarg23.blogspot.com

    ReplyDelete
  43. वाह ... बहुत खूब ।

    ReplyDelete
  44. फिर भी कभी कभी यूँ ही थोडा सा रूमानी होने में बुरा क्या है

    अरे किसने कहा…………पूरी तरह रोमानी होना चाहिये हर लम्हे को कैद कर लेना चाहिये ……………बहुत सुन्दर लिखा है सुन्दर भाव पिरोये है।

    ReplyDelete
  45. बहुत बढ़िया... स्पंदित करती कविता...मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आपका दिन शुब हो !
    Download Free Music + Lyrics - BollyWood Blaast
    Shayari Dil Se

    ReplyDelete
  46. बिलकुल भी कुछ बुरा नहीं है शिखाजी ! यह रूमानियत ही है जो जीने के लिये थोड़ा सा मकसद दे जाती है ! बहुत मीठी सी कोमल सी रचना ! अति सुन्दर !

    ReplyDelete
  47. बिना हवा के ही
    उड़ जाये ये लट
    तेरी सांसो से
    तो ये धूप भी
    पलकों पर बैठ जाये
    और चमक जाये
    फूलझड़ी सी
    माना ये सब
    बातें हैं फ़िज़ूल की
    पर फिर भी
    कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है....
    ..
    अजी शिखा जी....कभी कभार रूमानी हो ही जाना चाहिए.....अब मशीनें कहाँ रूमानी होती है देखो
    आप कमाल का लिखते हो ....!

    ReplyDelete
  48. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है

    सच कहा ...प्यार का एहसास ही रोमानी होने के लिए काफी है ...

    ReplyDelete
  49. इसे आप थोड़ा सा रूमानी होना कहती हैं???? ठन्डे हाथ, भीगी पलकें, पलकों पर चमकते मोती, काली लटे... अब बाकी ही क्या रहा जिसे आप "थोड़ा" कह रही हैं!!

    ReplyDelete
  50. यूँ ही थोडा सा रूमानी होने में बुरा क्या है ... कुछ भी बुरा नहीं ! बहुत अच्छी लगी आपकी रचना ..

    ReplyDelete
  51. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    कोई बुराई नहीं है रूमानी होने में .खुबसूरत अहसास , मुबारक हो

    ReplyDelete
  52. दिल की गहराइयों से निकली आपकी यह कविता सबके दिलों को छू गयी .

    ReplyDelete
  53. चलो थोड़ा रूमानी हो जायें।

    ReplyDelete
  54. aummm ! ahem ahem ! Romance in air shikha ! I loved it lady ! :-)

    ReplyDelete
  55. shikha ji
    bahut hi behtreen-------

    तेरी सांसो से
    तो ये धूप भी
    पलकों पर बैठ जाये
    और चमक जाये
    फूलझड़ी सी
    माना ये सब
    बातें हैं फ़िज़ूल की
    पर फिर भी
    कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    shabdo ke khoobsurat chayan ke saath hi saath vimbo ka pryog kar apni racha ko char -chand laga deti hain.jivan ke har pal hi aise khunuma mahoul me beete to kitna hi achha ho .
    kabhi -kabhi thoda rumani hona bhi chahiye .aakhir ham apne karyo ke ruteen ko badlte hi rahte hain to isme bhi thoda badlav lane se rumani ho jaayen ya yun kahiye ki jarur hona chahiye to kya harj hai -----;)
    poonam

    ReplyDelete
  56. या बिना हवा के ही
    उड़ जाये ये लट
    तेरी सांसो से


    वाह ! बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  57. मशीन चल रही है.चलती ही रहेगी.यही रूमानियत अहसास दिला जाती है कि हम जीवित हैं.एक ह्रदय भी है जिसमें स्पंदन भी होता है.सुन्दर रचना.

    ReplyDelete
  58. बहुत ही खुबसूरत एहसास...

    ReplyDelete
  59. जीवन की इस आपाधापी में कभी कभी रूमानी हो जाना बुरा नहीं |

    ReplyDelete
  60. पेट में
    ऊंगलियाँ
    :)

    ReplyDelete
  61. ये पढ़ कर रफ़ी साहब का गाना याद आ गया...

    न झटको ज़ुल्फ से पानी, ये मोती टूट जाएंगे,
    तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा, मगर कई दिल टूट जाएंगे...

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  62. बहुत खूब ... चलो कुछ रोमानी सा हुवा जाए ... लाजवाब रचना

    ReplyDelete
  63. bahut hi sunder likha hai aapne,
    vese roomani hone mein kya bura hai,acha hai ab hum bhi roomani ho kar dekhenge....:)good1.
    aapke blog par aakar accha laga.

    ReplyDelete
  64. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    bahan kitni msunder baat kahi aapne jeevan hai aesa .sada hi rumani rahr yahi kamna hai
    rachana

    ReplyDelete
  65. यदि जीवन में थोड़ी रूमानियत न रहे तो जीवन अकारथ है। यूँ ही नहीं, अनिवार्य है रूमानी होना।

    बस एक सनम चाहिए आशिकी के लिए...

    ReplyDelete
  66. Shikha varshney ji,
    चूंकि रोमांटिक बातें मैं नहीं समझ पाता इसलिए चाहते हुए भी अपनी राय नहीं दे पाता. क्या ऐसा नहीं हो सकता की हम अपने जीवन के मकसद को समझ लें और फिर अपनी प्रतिभा का समाज निर्माण आदि के कामों में प्रयोग करें. उम्मीद है क्षमा करेंगी.

    ReplyDelete
  67. बहुत सुन्दर प्रयास...सुन्दर रचना........

    ReplyDelete
  68. कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    रूमानियत नहीं तो ज़िन्दगी कैसी.
    खूबसूरत रचना

    ReplyDelete
  69. blog ke madhyam se apne vicharon ko sudhi jano tak pahunchane ka silsila ghafil sir ki prerna se hua. aap jis tarah ghafil sir ke blog tak pahunchi usi tarah utsuktavas main aapke blog tak pahuch hoon.. about me mein aapne badi sahajta se apni pratibha ke brihad swaroop ka parichaya binamrta ke sath diya hai.. aaj ka samay to aapke awards aapki naveentam rachnao ko padhne mein gujra.. bahut hi accha likhti hai aap.. kabhi hamein bhi aapka margdarsha mile to hamare liye tohfa hoga..apne shabdon ke phoolon se guldasta to saja baithe hain... ek dapha aaina gar aap dikha dein to inayat hogi
    punah dher sari badhaeyon ke sath

    ReplyDelete
  70. kabhi kabhi mere dil mai khyal aata hai ki jaise tujh ko banaya gaya hai mere liye....

    ReplyDelete
  71. बहुत उम्दा.....

    Regards
    Suman
    http://tum-suman.blogspot.com

    ReplyDelete
  72. आज 21/08/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

    ReplyDelete
  73. बातें हैं फ़िज़ूल की
    पर फिर भी
    कभी कभी यूँ ही
    थोडा सा रूमानी होने में
    बुरा क्या है
    ...बातें फ़िज़ूल की बिलकुल नहीं हैं .......रूहानियत और रूमानियत ....जीवन में ....Aurora Borealis aur Australis का काम करते हैं .....जो हमारे आसमान को और खूबसूरत और रंगीन बना देते हैं

    ReplyDelete

पसंदीदा पोस्ट्स

ईमेल से जुड़ें

संपर्क

Name

Email *

Message *