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Wednesday, 26 January 2011

एक और तमाचा...

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा .....हर जगह आज यही पंक्तियाँ बजती सुनाई दे रही हैं. हर कोई देश भक्ति की भावना से लवरेज दिखाई पड़ता है, अंतर्जाल तिरंगों से भरा पडा है ,.राजपथ से ऐतिहासिक लाल किले तक आठ किलोमीटर लंबे मार्ग पर  गणतंत्र दिवस की परेड में सशस्त्र बलों और अर्द्धसैनिक बलों की टुकडि़यों ने बैंड की धुनों पर मार्च किया। परेड में देश के अत्याधुनिक हथियारों का भी प्रदर्शन किया गया ,भारत के स्वर्णिम वर्तमान की चमकदार झलकियाँ दिखाई जा रही हैं.देश  के सर्वोच्च सम्मान बाँटें जा रहे हैं ,पद्म श्री, पद्मभूषण से नागरिकों को नवाज़ा जा रहा है ,लड्डू बांटे जा रहे हैं ..हाँ हम भारत का ६२ वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं .
वही महाराष्ट्र के पानेवाडी में इसी गणतंत्र के मुँह पर करारा तमाचा पडा है .एक ईमानदार  अधिकारी को उसकी ईमानदारी के पुरस्कार स्वरुप सारे आम जिन्दा जला दिया गया .मालेगांव के अतिरिक्त कलक्टर यशवंत सोनवाणे की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह केरासन तेल में मिलावट करने वालों को ऐसा करने से रोकना चाहते थे. अत: दुनिया के इस सबसे बड़े गणतंत्र के एक ईमानदार , कर्तव्य निष्ठ अधिकारी को अपनी जान देकर इसका खामियाजा  भुगतना पडा .और हम अपने गणतंत्र का जश्न मना रहे हैं, आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन कर फूल कर कुप्पा हो रहे हैं , और इस गणतंत्र के सूबेदार सीना तान कर सलामी ले रहे हैं . क्योंकि इस घटना का क्या है ?हमारी अंग्रेजी मीडिया के लिए तो कोई खास खबर भी नहीं,आम सी खबर है जिसके बारे में औपचारिक समाचार दे दिया गया है. उनके पास और बहुत से बड़े राजनैतिक मुद्दे हैं चर्चा करने के लिए, कौन सा मंत्री पद किसे दिया जा रहा है वह सब भी देखना  है. यह तो मामूली  बात है .कहने को कुछ ७ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है और बयान दिए जा रहे हैं कि जांच होगी, सी बी आई को भी घसीट लिया जायेगा ,फिर कुछ दिनों में मामला ठंडा हो जायेगा आखिर जिन्हें गिरफ्तार किया गया है वह भी तो मामूली नागरिक नहीं ना.. उनके लिए भी कुछ फ़र्ज़ बनता है हमारे गणतंत्र का,और कौन जाने असली अभियुक्त हैं भी या नहीं अभी माहौल गर्म है तो शक कि बिनाह पर किसी को भी उठाकर अन्दर डाल दो ,बाद में सुलट जायेगा सब . अब जाने वाला तो चला गया और सन्देश छोड़ गया कि खबरदार जो आगे से किसी ने भी इमानदारी दिखाने की कोशिश भी की ,अंजाम बहुत दर्दनाक होगा. वैसे भी किसने कहा था उस इंसान को कि जाकर तेल माफिया के काम में अपनी टांग अड़ाए? यह लोकतंत्र है भाई सबको अपनी मर्जी करने की आजादी है ६२ साल से यही समझाने की कोशिश की जा रही है. पर फिर भी पता नहीं कहाँ से एक आधे इंसान का खून उबाल मारने ही लगता है.और उतर आता है वह ईमानदारी पर, और सजा भी पाता है .भगवान् जाने कब समझ में आएगी इन लोगों को लोकतंत्र  की असली परिभाषा .
टीवी  का रिमोट फिर दब गया है स्क्रीन पर सेना के कुछ जवान मार्च करते हुए दिख रहे हैं ,पार्श्व में गीत बज रहा है"हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के..

76 comments:

  1. सार्थक आलेख...
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  2. बेइमानों की नगरी में इमानदार का यही हाल होता है जो सोणवाने जी का हुआ।

    जो देश की रक्षा के लिए लड़ते हैं सीमाओं पर उनके साथ इमानदारों का सम्मान भी होना चाहिए। इन्हे भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाना चाहिए।

    लेकिन नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है? सुनी उनकी ही जाएगी जो कमाऊ पूत हैं।

    सार्थक चिंतन
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  3. सच में आज दिल रो रहा है दी. सुबह एक एस.एम.एस. आया जिसमे तिरंगा बना था, सन्देश था कि देशभक्त हैं तो इस तिरंगे ज्यादा से ज्यादा भारतीयों के इन्बोक्स में भेजो. लगा कि जैसे कोई कह रहा हो कि 'संतोषी माता के फलाने मंदिर में चमत्कार हुआ.. एक व्यक्ति ने उसे पर्चे में छपवा कर बांटा जिसने पढ़कर उसे फिर से छपवा कर और भी लोगों को बांटा उनकी मन-मुराद पूरी हुई और जीने फाड़ कर फेंक दिया उसका बेटा/ भाई/ पिता/ माँ मर गए, कारोबार में नुक्सान हुआ..' दूसरी तरफ लगे रहो मुन्नाभाई में गांधी बने चरित्र का वो संवाद याद आया कि 'मुझे नोट, चौराहे, कार्यालय और बाकी सब जगह से हटा दो.. कहीं रखना है तो अपने दिल में रखो.. तात्पर्य समझ ही रही होंगीं. शहीद यशवंत सोनवाने को अनचाही शहादत देने वाले सिर्फ ७-८ लोग नहीं हम सभी हैं.. हमारा लालच है.

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  4. बहुत निंदनीय और शर्मनाक हादसा ...ऐसी घटनाएं सोचने पर विवश करती हैं कि यह कैसा गणतंत्र है ...सारा तंत्र बिगड़ा हुआ है ...जब बाड़ खेत को खाने लगे तो कैसे बचाया जा सकता है ...शासक ही भ्रष्ट हैं ....
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें भी क्या दें

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  5. अरे छोडिये भी ये कोई तमाचा हुआ , हम तो इतने बेशर्म हो चुके हैं कि इन ईमानदारों की कसम खा कर कहेंगे कि हम नहीं सुधरेंगे. इससे पहले भी पट्रोल पम्प मामले में एक अधिकारी की हत्या की गयी थी. सत्येन्द्र दुबे जैसे लोगों को सिर्फ उनके संस्थान जिन्दा रखे हुए हैं उनके नाम कि छात्रवृत्ति देकर नहीं तो ये कौन थे? किसी को पता नहीं है. अरे जहाँ कलमाड़ी जैसे उल्टा चोर कोतवाल को डांटे सरकार को आँखें दिखा रहे हैं कि सरकार को उनको हटाने का कोई हक़ नहीं है. हम डंके कि चोट पर कह रहे हैं कि यहाँ से ईमानदारी ख़त्म करके ही रहेंगे नहीं तो ईमानदार इसी तरह से अपनी ईमानदारी का खामियाजा भुगतते रहेंगे. प्रेम प्रकाश जैसे विवादित डी आई जी सरकार से सम्मान पाते रहेंगे. अब तो ईमानदारी जैसी चीज नैतिकता की सूची से हट चुकी है. ये अपवाद कभी कभी ही दिखाई देती है.

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  6. nirasha se bhara huaa ek aur gantantra divas

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  7. Aah! Shikhaji....ye hota rahega,hota raha hai.Gussa bhee aata hai...sharm bhee aatee hai.Us adhikari pe garv bhee hota hai.

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  8. आज की व्यवस्था में वाक़ई बहुत मुश्किल है straight forward रहना.

    वैसे इस तरह की कार्रवाई से पहले evaluation of threat perception एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है, लगता है कि उसमें भी चूक हुई.

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  9. आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
    सादर
    ------
    गणतंत्र को नमन करें

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  10. ऊपर से बहने वाली धारा है. ऊपर रुक जायेगी तो नीचे अपने आप बन्द हो जायेगा..

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  11. बेहद शर्मनाक घटना है ये,
    इमानदारी का ये ही सिला मिलता रहेगा तो लोग इमानदारी से डरने लगेंगें।
    सार्थक लेख

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  12. आजकल तो चरित्रहीनों, बेशर्मों और बेगैरतों का ज़माना है... और इनके पास कुतर्कों की कोई कमी नहीं होती... दरअसल यह सब संस्कारों की बात है...इंसान को जैसे संस्कार मिलते हैं वो वैसा ही बनता है...

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  13. सच दुखद स्थियां हमको तो अक्सर भोगना होता यह दर्द भारत के सरकारी सेवक हैं न....?

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  14. भारत के सरकारी अफ़सर जिनका बोलना गुनाह है
    किंतु कितना अपमान भोगतें हैं हम ही जानते हैं.
    सोनवाने जी को विनत श्रद्धांजली
    उन जैसे जाने कितने सरकारी नौकरों को पल पल अपमान के दंश चुभाए हैं व्यवस्था ने आर्त हैं पर बस खामोश अच्छे वक़्त के इंतज़ार में हैं हम लोग .

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  15. उससे भी बड़ा तमाचा आज शाम को लगा जब यह खबर टीवी पर देखा कि एक छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी मौत और इस गुनाह की लीपापोती और गुनाहगार को बचाने में लिप्त एक पुलिस कर्मी को देश की सेवा के लिए मेडल देने का ऐलान किया गया है।

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  16. dil ko jhhakjhhorne vali sarmnak ghatna ki or aapne aakrist kiya hai .kuchh sochne par vivas karata ek saarthak aalekh.shikhaji jaihind

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  17. bahut hi sarthak va jwalant sawaal uthati aapki ye post,

    pata nhi is gane ka mat;ab kab logo ko samjah aayega,

    "ham laye hain toofaan se kashti nikaal...?

    ab ye gana khud bhi bajne se sharmata hoga....
    thak jo gaya...

    badhai kabule

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  18. सार्थक चिंतन|
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं|

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  19. विचारणीय लेख ।
    क्या हम सचमुच स्वतंत्र हैं ?
    शुभकामनायें ।

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  20. ईमानदारी बीते ज़माने की चीज ही रह जाएगी. विचारणीय लेख. गणतंत्र दिवस की बधाई तो फिर भी दे ही दूं.

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  21. यही तो विडंबना है..इस तरह की दुखद और असहनीय घटनाएँ नित हो रही हैं..और .....एक आह!!

    फिर!!

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    बस!!

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  22. 1शर्मनाक घटना
    2 शर्मनाक की अपने देश में सरकार राष्ट्र ध्वज फहराने से रोक रही है
    Tricolour national flag should be unfurled at Lal Chowk, Srinagar on Jan. 26, 2011 : Dr. Subramanian Swamy
    The UPA government is duty bound under the Transaction of Business Rules framed under the Constitution, to officially unfurl the tricolour national flag at Lal Chowk in Srinagar, J&K. A Resolution to this effect was adopted by the Cabinet Committee on Political Affairs in January first week or thereabouts in 1991 when Chandrashekhar was Prime Minister and I was Cabinet Minister of Law &Justice besides of Commerce.
    As a senior Minister and member of CCPA, I had raised the issue in the CCPA because the V.P. Singh government had considered the matter and decided to discontinue the practice of unfurling the flag in Lal Chowk in 1990 as “it might hurt the feelings of the people of the state”.
    http://hinduexistence.wordpress.com/2011/01/26/lal-chowk-is-a-place-to-unfurl-the-tri-colour-not-the-pak-flag/

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  23. इससे बड़ी और दोगली कोई केंद्र सरकार नहीं आई

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  24. अब तो लगता है तमाचे से भी फर्क नहीं पड़नेवाला. मगर आशा की ज्योत तो जलाये रखनी है. जैसा आप सोचती है वैसे और भी है,एकजुट होने ही देरी है.

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  25. और एक और पड़ोसी राज्य में देशभक्तों के हाथ से तिरंगा छीन लिया गया ....

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  26. जिस देश मे सरकार ही चोर उच्चको की हो वहां इमान दार ओर शरीफ़ आदमी का क्या काम...? जिस देश के किसी आदमी पर घटोलो का केस चला हो ओर फ़िर भी वो राष्ट्र पति के पद पे बेठे उस देश का तो भगवान ही मालिक....
    चलो एक दुसरे को दे बधाई... गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई.

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  27. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं..

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  28. पता नही कब तक हम तमाचे खाए जायेगे ।

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  29. शर्मसार करने वाली घटना है यह!
    गणतन्त्र दिवस की 62वीं वर्षगाँठ पर
    आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  30. अब इस तरह के तमाचे रोज़ लगते हैं विश्व के सबसे बड़े गणराज्य पर!! प्रजातंत्र के साथ बलात्कार हर रोज़ हो रहा है! और जब कोई कुछ कहता है तो लोग बगलें झाँकने लगते हैं!!आपकी सम्वेदनशीलता को प्रणाम!!

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  31. कल जब से यह घटना सुनी मैं सोच रहा हूं कि अपने यहां नौकरी करना भी जंग पर जाने जैसा हो गया है।
    किसी भी संस्थान में बड़ी गड़बड़ी पर हाथ डालना और उसे सुधारने का प्रयास करना जान को जोखिम में डालने जैसा है। खासकर राज्य सरकारों की नौकरियों में।

    काजल कुमार की टिप्पणी गौरतलब है।
    इस दुखद घटना से मन बहुत उदास है ।

    अच्छा लिखा।

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  32. ये पहली घटना नहीं है इसके पहले तेल माफिया ने ऐसे ही बड़े आफिसर मंजुनाथ की भी हत्या कर दी थी जो आई आई टी टॉपर थे उनके साथ पढ़ने वालो ने जब हो हल्ला मचाया तब उसके दोषियों को पकड़ा गया उसके बाद सतेन्द्र दुबे की हत्या भी ऐसे ही हुई थी पर उसके उसके बाद भी ये घटना सामने आई क्योकि हमने सिर्फ दोषियों को पकड़ा उस भ्रष्ट व्यवस्था को नहीं पकड़ा उसे सजा नहीं दिलाई जिसके कारण ये करने की लोगों की हिम्मत हो जाती है | जब तक इसके जड़ को ख़त्म नहीं किया जायेगा तब तक ऐसी घटनाए होती रहेंगी |

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  33. इस खबर को सुनने, पढने के बाद लगा कि शायद इसीलिये लोग अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति ईमानदारी नहीं बरतते. ये अलग बात है कि ऐसी घटनाओं की आड़ में कामचोर अधिकारियों-कर्मचारियों की बन आती है.
    दुखद घटना, सार्थक पोस्ट.

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  34. imaandari?... yahi hashra hai, tabhi to beimaani ka rajya hai, vivashta hai !

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  35. बात सोलह आने सत्य .. इमानदारी की कीमत उस जांबाज को यूं चुकानी पड़ी ..शर्मसार करने वाली घटना ... मैंने भी कल यही ऐसा ही कुछ लिखा है.. देखिएगा..

    आपकी रचना सामयिक है ..आपकी यह रचना कल (२८ जनवरी) को चर्चामंच पर होगी...

    http://charchamanch.uchcharan.com
    aap apne vichaar vaha bhi rakhiyega ..

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  36. लोकतंत्र के मुख पर एक और कालिख ...
    क्या सीमा पार का दुश्मन इन लोगों से ज्यादा खूंखार है ?

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  37. itne bade desh me aisee chhoti ghatnayen ghat ti rahti hai...bas ye ghatnayen badh jaye to desh ka sameekaran badal jayega...yaani kash aise immaandaar deshbhakto ki sankhya badh jaye..fir kaun jalega...ye desh dekhega...lekin aisa hoga kya??

    ek sachchhi shraddhanjali...dil se!

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  38. ईमानदारी का यह परिणाम ...बेहद दुखद एवं निंदनीय घटना है यह ...।

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  39. बेहद शर्मनाक्……………यहाँ जो ना हो जाये कम है पता नही फिर कैसे कह देते हैं -------हम सब भारतीय है……………क्या यही भारतीयता है? शिखा जी अब तो लगने लगा है ………अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत हमारे देश पर सही बैठ रही है।

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  40. आपके इस आलेख ने हमे उस क्रूर घटना की याद दिला दी जिसमे बिहार के गोपालगंज जिले के जिला मजिस्ट्रेट कृष्णैया को गुंडा तत्वों द्वारा मौत के घाट उतर दिया गया था . शर्म आती है ऐसी घोर निंदनीय घटनाओ पर जो हमारे मुह पर तमाचा तो है साथ में देश के बढ़ते अंतर्राष्टीय साख पर कालिख भी लगा जाती है . हम रोज ऐसे समाचारों को पढ़ते और देखते है लेकिन इस कान से सुनकर दूसरी कान से निकाल देते है , जूँ भी नहीं रेंगती हमारी आत्मा पर. इस साम सामयिक पोस्ट के लिए आपका आभार .

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  41. यही तो इस देश का दुर्भाग्य है !

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  42. 35 मिनट तक एडीएम जलते रहे, मगर कोई उन्हें बचाने नहीं आया। ये आग जब सरकार के आंचल तक पहुंची तब जाकर कुछ कार्रवाई की गई। तेल माफिया को धरने के लिए 200 जगहों पर छापे मारे गए हैं और 180 लोग हिरासत में लिए गए हैं। पर, क्या से सब पहले नहीं हो सकता था।

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  43. वाजिब आक्रोश है आपके लेख में |
    ईश्वर जाने कब ईमानदारों की ज़िदगी
    महफूज़ हो सकेगी |

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  44. शिखा जी, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुई ये घटना दिल दहला देने वाली है...अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो गए हैं...
    इस प्रकरण में ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए, जो सबक बन जाए...
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  45. जो कश्ती को तूफान से निकाल कर लाये थे वो कब से चले गयी । अब तो कश्ती डुबोने वाले ही नेता रह गये। अच्छा आलेख दुर्घटना देख कर मन विचलित हो गया कौन करेगा साहस सच कहने का। शुभकामनायें।

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  46. शर्म उनको मगर नही आती

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  47. सच को सामने लाने का साहस आज किस में है .....वक़्त ने क्या से क्या बना दिया आज इस देश के कर्णधारों को .....क्या कहें ...आपने सार्थक और साहस पूर्वक प्रकाश डाला है ...आपका शुक्रिया

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  48. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए।आपके विचारों से मैं प्रभावित होता रहता हूं।धन्यवाद।

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  49. शिखा जी , बहुत ही जघन्य और अफसोसजनक रहा ईमानदारों का ये हस्र देखकर......... आपने बहुत ही विचारणीय मुद्दा उठाया है. मगर ये भी बहुत खलता है की सरकार ऐसी घटनाओं के बात अचानक नीद से जगती है और फिर हंगामा शांत होते ही गहरी नींद में सो जाती है जब तक की कोई बड़ी घटना न हो जाये. मंजुनाथ और सतेन्द्र झा जी के वाकिये से कोई सबक नहीं लिया गया और ये भी घटना उसी तरह एक इतिहास की बात न बन जाये...........

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  50. बहुत अफ़सोस जनक, शर्मनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना।
    ईमानदारी की सज़ा मिलती है और बे-ईमानों को ईनाम!
    हे राम!!

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  51. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !

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  52. ab imaandaari kaa jabaana nahi raha achha lekh

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  53. khabar suni thi yah di...bahut dukh hua tha... aur ek akshamta ka ahsaas bhi hua tha... :(

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  54. क्या कहा जाय....

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  55. जब से इस घटना को सुना और टी.वी.पर देखा है पूरा अस्तित्व हिल कर रह गया है ,क्या शिक्षा दें हम अपने बच्चों को और क्या उत्तर दें उन के प्रश्नों के
    प्रतिदिन ऐसी किसी न किसी घटना से दिल दहल जाता है ,
    गंभीर चिंतन का विषय है

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  56. भले ही आज ईमानदारी के हस्र देखकर बेईमानी मुस्कराती है .. और ईमानदारी गायब दिखती है ... लेकिन यह चिंतनीय प्रश्न है सब हाथ बांधकर बैठे नहीं रहेंगें ..धीरे धीरे ही सही जागेगें लोग ऐसा मेरा विश्वास है... सार्थक चिंतनशील आलेख के लिए आभार

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  57. बेहद दुखद घटना, इस घटना ने हम सब को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन ये तो देश में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल की बानगी भर है, पता नहीं हमारा देश इस दीमक से कब मुक्त होगा

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  58. क्या हम कभी यथार्थ में गुलामी से निजात पा सकेंगे..?? शायद कभी भी नहीं..असंभव है..!! कभी अपनी गली में, समाज में, नगर में, प्रदेश में..देश में..अपनी मानसिकता से ही गुलामी नहीं मिटा सके..तो बाकी सब व्यर्थ है..व्यर्थ ही है..!!!

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  59. हालात का सही वर्णन किया है ... ६२ सालों में देश का पतन ... सांस्कृतिक मूल्यों का पतन ... सिर्फ़ और सिर्फ़ इन भ्रष्ट राजनीति के कारण ... और इनकी नीतियों के कारण ...

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  60. बहुत दुःख होता है ये सब सुन कर...और गुस्सा भी बहुत आता है :(

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  61. ganatantra hamaraa 'gun-tantra' hota ja raha hai. aapke mudde sochane par mazboor karate hai. dukh hota hai. kashtee tufan me fas gai hai. hamlogon ko hi nikalani hai. badhai iss lekh k liye.

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  62. इमानदारी का यही नतीजा मिला करता है आज के युग मैं लेकिन कुछ ऐसे लोगों के कारण ही यह संसार चल रहा है. आज भ्रष्टाचार की ही पूजा हुआ करती है. आप स्वम देखे जिसके पास हराम का कमाया पैसा है कैसे लोग उसकी इज्ज़त करते हैं, कोई ना पूछता और ना सोंचता की जनाब ने इतना पैसा कहां से कमाया?
    .
    ज़रा ग़ौर से सोंचें ,क्या आप अपने बच्चे को पूरा इमानदार बना ना चाहते हैं? अधिकतर लोग यदि हाँ कह भी दें तो ऐसा नहीं कर पाएंगे. यही आज का सत्य है. सलाम है उसको जिसने इमानदारी के कारण अपनी जान दे दी और लोगों को सोंचने पे मजबूर कर दिया.

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  63. हमारी सभ्यता के असभ्य, क्रूर और विकृत चेहरा है यह। आपने अपने ब्लाग पर प्रकाशित कर अपने स्पन्दन से लोगों को स्पन्दित किया है। साधुवाद।

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  64. चिंताजनक स्थिति पर सार्थक चिंतन किया है आपने।
    कुछ सोचने के लिए बाध्य करता है यह आलेख।

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  65. Is gatna ne loktantra ki jado ko hila ke rakh diya hai...

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  66. निसंदेह यह एक और तमाचा है , इमानदारी पर , कानून और व्यवस्था पर

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  67. ऐसे समाचार भी इसीलिए प्रसारित किये जाते हैं कि देख लो ईमानदारी का नतीजा। लेकिन दुनिया है तो ईमानदारी भी जीवित ही रहेगी, कोई न कोई सिर बगावत कर ही देगा। फिर परिणाम कुछ भी क्‍यों ना हों?

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  68. A nice post on current hot topic.

    Kindly visit http://ahsaskiparten-sameexa.blogspot.com/

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  69. शिखा जी आपने आलेख के माध्यम से बहुत ही सार्थक ही सवाल उठाया है.. हमारा गणतंत्र ना जाने किस दिशा में जा रहा है...

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  70. शिखा जी लंबी छुट्टी पर हैं क्या ?कुछ नया लिखिए आपका दिन शुभ हो |धन्यवाद |

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  71. शिखा जी लंबी छुट्टी पर हैं क्या ?कुछ नया लिखिए आपका दिन शुभ हो |धन्यवाद |

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  72. हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' -दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
    प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
    आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के जनवरी माह में २०-२१ जनवरी (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संगोष्ठी को संपोषित किया जा सके इस सन्दर्भ में औपचारिकतायें पूरी की जा रही हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.

    संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (२०-२१ जनवरी २०१२ ) संगोष्ठी में अभी पूरे साल भर का समय है ,लेकिन आप लोगों को अभी से सूचित करने के पीछे मेरा उद्देश्य यह है क़ि मैं संगोष्ठी के लिए आप लोगों से कुछ आलेख मंगा सकूं.
    दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें .
    आप सभी के सहयोग क़ी आवश्यकता है . अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें


    डॉ. मनीष कुमार मिश्रा
    के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय
    गांधारी विलेज , पडघा रोड
    कल्याण -पश्चिम
    pin.421301
    महाराष्ट्र
    mo-09324790726
    manishmuntazir@gmail.com
    http://www.onlinehindijournal.blogspot.com/ http://kmagrawalcollege.org/

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  73. शिखा जी ,
    इस घटना का नतीजा क्या होगा सोचा है .....
    लोग ईमानदार होने से ही डरेंगे .....
    वहाँ हमारे संस्कार और नेकनीयति क्या करेगी ....

    शहीद सोणवाने जी को नमन ....

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  74. सोचने पर मजबूर कर देने वाला चिंताजनक प्रसंग.

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