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Wednesday, 29 December 2010

आओ खेलें विधा विधा




सबसे पहले तो हिंदी साहित्य के सभी गुणीजनों  और ब्लॉगजगत के सभी साहित्यकारों से हाथ जोड़ कर और कान पकड़ कर माफी .कृपया इस पोस्ट को निर्मल हास्य के रूप में लें .
हमारे हिंदी साहित्य में बहुत ही खूबसूरत और सार्थक विधाएं हैं और इनमें बहुत से रचनाकारों ने अपनी सिद्धता भी दर्ज की है .परन्तु मेरे खुराफ़ाती या कहें कि खाली बैठे शैतानी दिमाग में इनका कुछ अलग रूप आ रहा है आप भी पढ़िए और हंसी आये तो हंसिये पर व्यक्तिगत  तौर पर या दिल पर मत लीजिए.

सबसे पहले सबसे कोमल विधा --

कविता.-  मेरे ख्याल से इसका जन्म दो शब्दों से हुआ  होगा - कवि + ता .तो कवि यानि जो कविता लिखे और ता यानी वो बच्चे खेलते हैं न छुपने वाला खेल ...ता ............ मतलब कि जहाँ कविता का कवित्त छुपा रहे उसे कविता कहते हैं .यानी जो जितनी सर से ऊपर से निकल जाये उतनी बड़ी कविता.लिखा कुछ और गया हो मतलब कुछ और निकले और पढ़ने वाला अपने बाल नोचें पर मुंह से बोले वाह वाह , अगर वो ऐसा न करे तो मूढ़ बुद्धि .. उसे कविता की समझ ही नहीं .वैसे कुछ लोग जो जबान से नहीं कह सकते ..तुकबंदी  के माध्यम से कहने की कोशिश करते हैं.उसे भी कविता कहा जाता है.

निबंध - किसी भी तथ्य का सीधा सपाट विवरण निबंध कहलाता है जो देखा बस लिख दिया जैसे स्कूल में लिखने को आता था गाय पर निबंध लिखिए .और जो सामने तस्वीर उभरी लिख दिया .गाय के ४ पैर होते हैं ,२ सींग  होते हैं ,वो हमें दूध देती है .और कुछ सामाजिक परिवेश के हिसाब से इधर उधर भी .जैसे भारत में एक पंक्ति बढ़ जाती है .कि गाय को हम माता कहकर बुलाते हैं .

व्यंग - यानी जूते को भिगो - भिगो के मारना .जितनी भड़ास मन में सब निकाल देना .पर चाशनी में लपेट कर हाँ ..शर्त है कि चाशनी  एकदम सही होनी चाहिए न ज्यादा पतली न ज्यादा गाढ़ी .क्योंकि पतली हुई तो जिस जगह जूते पर लगा कर मारी है वहां चिपकेगी ही नहीं  तो बेकार है, असर ही नहीं होगा .गाढ़ी  हुई तो जूता भी चाशनी के साथ चिपक जायेगा अब जूता भी गया हाथ से और जहाँ मारा है वो भी खफा.तो चाशनी ऐसी हो कि थोड़ी सी चिपक कर जूता अपने ही हाथ में वापस आ जाये.

संस्मरण - आप कहीं भी चाचा - मामा के यहाँ जाये या कि नदी ,पोखर की सैर करने तो घर में निकलने से पहले की लड़ाई से  लेकर पोखर तक पहुँच कर वहां पैर फिसलने तक का सारा विवरण संस्मरण कहलाता है .इसे लिखने के लिए बहुत जरुरी है कि आपने बचपन में बादाम खाए हों क्योंकि रास्ते  में मिले एक कुत्ते ने कैसे आपको देख कर पूछ हिलाई थी वह भी आपको याद रखना होगा वर्ना आपका संस्मरण अधूरा रह जायेगा.और लोगों को पढ़ने में मजा नहीं आएगा.

कहानी - ये सबसे रोचक विधा है. इसके सभी पात्र इसके लेखक के हाथ की कठपुतली होते हैं जिन्हें जैसे वह चाहे घुमा दे जैसा जब चाहे रूप दे दे .कहानी का लेखक अपने आसपास के लोगों को भी कहानी का एक पात्र मात्र समझता है. किसी की भी जिंदगी के अनछुए पहलू  को कहानी बना सकता और चाहता है वे पात्र  उसकी सोच और कल्पना के अनुसार ही व्यवहार करें . जरा भी चूं चपड़ की अपने हिसाब से तो  बस, बना दिया विलेन कहानी का. और मजाल  किसी की , कि जो कोई दावा कर दे . क्योंकि इस विधा के साथ स्वत: ही एक डिस्क्लेमर जुड़ा  होता है कि ":इसके सभी पात्र काल्पनिक हैं और इसका किसी भी जीवित या मृत से कोई लेना देना नहीं " कहानी का  लेखक संवेदनशील होता है पर उसकी कहानी के पात्रों  को अगर वो न चाहे तो संवेदनशील होने का कोई हक नहीं.. 


यात्रा वृतांत - एक विधा है ये जताने के लिए  कि देखो जी कित्ता घूमें हैं हम .गली गली ,चप्पे चप्पे की खाक छानी है .और याद भी रखा है .और हर बात में अपनी नाक घुसेड़ी है कि बाद में लिखा जा सके.जब बाकी लोग दर्शनीय  स्थल का मजा ले रहे हों मनोरम दृश्यों का रस ले रहे हों आप इन्फोर्मेशन सेंटर में पैम्फ्लेट्स  तलाशिये,यहाँ वहां की तस्वीरें खींचिए  ,वहां का खाना बेशक समझ ना आये पर खाकर देखिये अजी बाद में उल्टी कर दीजियेगा पर जरुरी है कि सब ठीक से पूरे तरीके से समझा जाये वर्ना क्या लिखेंगे भला? .तो बस सब कुछ इकठ्ठा करके ले आइये और लिख डालिए और बताइए कितने आउट गोइंग हैं आप.

आलोचना - यानी... आ.. लो.. चना (लोहे का ) और नाक से चबाओ  .इसे समालोचना समझने की भूल ना करें. सिर्फ और सिर्फ  सीधी - सच्ची आलोचना .आपको कोई  पसंद ना हो या लगे कि ज्यादा उछल रहा है पकड़ लीजिये उसकी रचना. और खोद कर निकाल  डालिए कमियाँ .और अगर ना मिले तो  २-४ शुभचिंतकों को अपने में मिला लीजिये और अच्छे को भी कहिये बुरा फिर  उन्हें कहिये आपके सुर  में सुर मिलाएं .हाँ कुछ २- ४ बड़ी दुर्लभ किताबों के नाम याद कर लीजिये और हो सके तो अपनी अलमारी में उन्हें रखकर फोटो खिंचवा लीजिये जिससे कोई ये ना कह सके कि आपको विषय का ज्ञान नहीं .बस हो गई आलोचना . 

अभी बस इतने ही ज्ञान से काम चलाइये ... बाकी की विधाएं कुछ और बादाम खाने के बाद..अरे कुछ खुद भी पढ़िए समझिये कि सब हम ही बताएँगे.....

90 comments:

  1. अरे यहाँ नए साहित्य शास्त्र ने जन्म ले लिया ..और उधर पुराने का क्या होगा ...हर एक विधा के बारे में आपका यह दृष्टिकोण अच्छा, और रोचक लगा ...... .....शुभकामनायें

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  2. बिल्कुल नहीं दिल पर लेंगें जी ....और नहीं तो ये तारीफ की बात है.....हम अपना ही कान कान पकड़कर खींच रहे है कि ससुरा मास्टर डिग्री बेकार है , ई हमरे दिमाग में पहले क्यों नहीं घुसा. ऐसा करते है हमारे एक सर है जो हिंदी साहित्य का इतिहास लिख रहे है अगर आपकी परमीशन हो तो ये भी ऐड करवा देते है. सुंदर प्रस्तुति.

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  3. @ मतलब कुछ और निकले और पढ़ने वाला अपने बाल नोचें पर मुंह से बोले वाह वाह

    “वाह!...वाह!!! वाह!!!”

    (अब ये मत सोचिएगा कि मैं बाल नोच रहा हूं)

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  4. बहिन शिखा जी,
    जिस साहित्यक विधा को अब तक नही समझा,उसे आपने अच्छी तरह समझा दिया। समझने के बाद,बहिना जो हंसी आई उसे रोक न सका। दिल को बहलाने का अच्छा उपाय निकाला है आपने।
    नववर्ष-2011 की अशेष शुभकामनाओं के साथ।

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  5. ब्लॉग जगत में एक और विधा है टिप्पणी करने की विधा... इसपर भी कुछ प्रकाश डालतीं तो पोस्ट को आठ चाँद लग जाते!
    वैसे निर्मल हास्य के नाम पर चाशनी में लपेटकर जो पादुका आपने उछाली है, उसकी सांद्रता इतनी परफेक्ट है कि बस हम तो चाशनी की मिठास में ही उलझकर रह गये!!

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  6. बहुत अच्छी परिभाषा है...पोस्ट पढ़कर मज़ा आ गया...बहुत खूब...

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  7. गाय हमारी माता है हमको कुछ नहीं आता है

    बैल हमारा बाप है नंबर देना पाप है |

    लीजिये कविता और निबंध एक साथ निपटा दिया | और एक बात पूछना था आप से को क्या लगता है की व्यंग्य के लिए चाशनी तीन तार की ठीक होगी या चार तार की | वैसे अभी तक तो मै नमक के पानी में भिगो कर मारने में विश्वास करती थी अब ये भी आजमाती हु | :)))

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  8. आज तो हंसी-हंसी में बहुत कुछ सीख दे दी आपने। अब तक हम अपने को ३० मार खां समझे थे। पर इन विधाओं के बारे में आपने जानकारी दे कर हमारे हिन्दी के अल्पज्ञान को जो विस्तार दिया है वह वर्णनाती है।
    खास बात यह रही और लगी कि इसमें सन्धि का जो आपने विच्छेद किया है आलोचना - यानी... आ.. लो.. चना ... वह क्या कहलाता है, यानी उस सम्बन्ध विच्छेद वाली विधा पर भी प्रकाश डालती तों कुछ शंकाओं का समाधान हो जाता।
    ... और सबसे महत्वपूर्ण शंका तो यह है कि जो आपने लिखा है वह किस श्रेणी में आता है ....?

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  9. :) :) :)

    हा हा हा....

    पढ़ कर खाली मुस्करा ही नहीं पायी , हंसी भी आ गयी ..
    कविता के बारे में ..बाल नोचने कि बात और वाह वाह करने की बात पर तो हंसी रुक ही नहीं रही ...

    और व्यंग -- कमाल ही है ...चाशनी में भिगो कर ...
    वाकई बड़ा खुराफाती दिमाग है ..

    और आलोचना --- आ -- लो चना ..कहाँ से आते हैं ऐसे आईडियाज़....

    संस्मरण में कुत्ते की पूँछ हिलना भी याद रखें :):)

    कहानी में ---डिस्क्लेमर जुड़ा होता है कि ":इसके सभी पात्र काल्पनिक हैं और इसका किसी भी जीवित या मृत से कोई लेना देना नहीं "
    सच हिंदी साहित्य का इतिहास तो अधूरा ही पढ़ा था ...आज ज्ञान चक्षु खुल गए ...

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  10. शिखा जी,आपने तो कमाल कर दिया।

    शुभकामनाएं।

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  11. बात तो मनोज जी की ठीक है,शिखा दी! आपका ये पोस्ट भला कौन सी विधा है :P :P

    पर सच कहूँ तो ऐसा पर्फ़ेक्ट जूता मारा है कि बस पूछिये मत… बहुत मनोरंजक तरीके से गहरा व्यँग कर दिया है।

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  12. वाह!! खूब डिसेक्शन किया है!! मज़ा आया.

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  13. यह भी आपकी अनुपम विधा।

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  14. @ मनोज जी और रवि !
    आखिरी पंक्ति नहीं पढ़ी क्या आप लोगों ने:)
    इन प्रश्नों पर अब आप लोग शोध करें:)

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  15. बहुत अच्छी जानकारी दी आपने, फटाफट समझ आ गया , आपको तो मास्टरनी जी होना चाहिए ।

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  16. आपने बड़ी मुश्किल आसान कर दी। इन सूत्रों के सहारे मैं हर विधा में... :-)

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  17. वाह जी आप से तो बहुत कुछ नया ग्यण मिला हमे धन्यवाद

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  18. बहुत अच्छी परिभाषा है..

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  19. इतनी सारी विधाएं हैं और हम अब तक रहे निपट गंवार ...
    क्या चाशनी में जूता भिगो- भिगो कर मारा ...
    पुराने हो जाने वाले वर्ष आखिरी दिनों में दे दिया है शानदार पुरस्कार ...
    धन्यवाद !

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  20. हा हा . एकदम मस्त निर्मल टाइप का व्यंग वाण. ना जाने कितने हिंदी साहित्य की विधा के जानकारों को इस आलेख की विधा पर शोधार्थी बना देगी. मनोज जी तो भ्रम में पड ही गए है . वैसे मेरा ये मानना है की अपने जिस भी विधा में ये आलेख लिखा है ब्लॉग जगत में एक नवीन विधा का सूत्रपात करेगा वो भी बिना डिस्क्लेमर के . सुन्दर व्यंग सह अघोषित विधा आलेख . मन प्रसन्न हुआ ये भीगा जुता देखकर . हाहा

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  21. इस बार भारत आएं तो बादाम ज्‍यादा ले जाना, अभी तो बहुत सारी विधाओं का सच्‍चा ज्ञान शेष रह गया। नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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  22. This comment has been removed by the author.

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  23. क्या शिखा जी...लगता है आप २०११ के आगाज करने से पहले ही सबको बता देना चाहती हैं की इस उगते सूरज को सलाम कर लो!!
    क्या गजब की परिभाषा तैयार की है ..........और फिर कोई दिल पे ले तो ले.............आप ने तो पहले ही लिख डाला दिल पे न ले...और छुट्टी पा ली..:P
    कविता: इस विधा में मैंने अधिकतर अपने दिमाग से ऊपर पार होने वाले कविताओं को पढा है....:), और वाह वाह के अलावा कोई चारा नहीं रह पाता...
    कविता, संस्मरण, व्यंग्य और यात्रा वित्रतंत में तो आप खुद ही पारंगत हो...अब समझ में आया, कैसे आपके पोस्ट हर कुछ दिन में आ जाते हैं...
    MORAL OF THIS POST: शिखा जी बादाम का सेवन कुछ जायदा ही मात्रा में करती है......:)
    नव-वर्ष की अग्रिम शुभकामनायें...........:)

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  24. हा हा हा...
    अरे मेरे तो हँसते हँसते बुरे हाल हैं...
    कहाँ से सोच लिया ये सब...???
    बहुत ही अनोखा ....बेहतरीन...

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  25. हा हा हा
    मैंने कल क्यों नहीं पढ़ा ये?? मूड एकदम रीसेट हो जाता...
    अरे क्या मस्त खतरनाक और टाईट आईडिया आते हैं आपको :)
    मजा आ गया...

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  26. हा हा हा
    जोरदार धोबी पछाड़ दांव मारा है।
    नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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  27. Shikha ji
    kamal ka likha aapne.
    muskuraye bina na reh sake:)
    aapko aur aapke parivaar ko nav varsh ki hardik subhkamnai.

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  28. जय हो……………सही खुराफ़ात ने जन्म लिया है।

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  29. वही तो हम सोचें कि ऐसी बातें हमारे दिमाग में क्यों नहीं आतीं. मज़ा आ गया पढ़कर, खासकर व्यंग्य की परिभाषा.

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  30. shikhaji,
    vartman ke sandarbh me to aapki sabhi paribhashayen sahi baithti hain. koi na-nukur bhi kar sakta hai..
    magar gazab ki prastuti.

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  31. निर्मल हास्य !!!!

    मनोरंजक...

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  32. बेहतरीन रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत किया है आपने विधाओं को।
    आभार

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  33. :) :) :)
    मज़ेदार रहा ये ’विधा-विधा’ का खेल...
    आपको सपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  34. लेखन यह भी अंदाज़ निराला लगा,बधाई.

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  35. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

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  36. हा हा हा ! बढ़िया लिखा है शिखा जी । कभी कभी दिमाग की ऐसी कसरत भी होनी चाहिए ।

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  37. पाठ्यपुस्‍तकों हेतु सामग्री चयन करने वाले इस ओर ध्‍यान दें.

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  38. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.....

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  39. कहाँ कहाँ तक जाती है आपकी सोच ....

    आप ही ने कहा था कभी ...
    खैर ...
    लेखन के माध्यम से
    बहुत कुछ कह दिया आपने
    एक सीख-भरा ,
    उपयोगी आलेख !!

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  40. नव वर्ष - 2011
    के लिए
    ढेरों शुभकामनाएं .

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  41. @ @ मनोज जी और रवि !
    आखिरी पंक्ति नहीं पढ़ी क्या आप लोगों ने:)

    अजी बिल्कुल नहीं पढी। यह भी तो एक विधा है बिना पूरा पढे टिप्पणी मार देने की... और इस विधा में अपने को पारंगत समझते थे .. वह भी आपने धर ही लिया।
    खैर बादाम पच जाने के बाद इस विधा पर भी प्रकाश डाला जाएगा, उम्मीद ही नहीं विश्वास है।

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  42. जय हो! जय हो! क्या परिभाषायें बताई हैं। आप इतनी अच्छी तरह इन विधाओं को इसलिये परिभाषित कर पायीं क्योंकि आपका कविता, संस्मरण, लेख , व्यंग्य और निबंध में बड़ा अच्छा हाथ साफ़ है। बस आपको एक ठो डिस्कलेमर लिखकर कहानी विधा का कल्याण करने की जरूरत है।

    आनन्दित हुये बांचकर!

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  43. अच्छी परिभाषाएं । नववर्ष की शुभकामनाएं।

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  44. लो, जी मैंने भी बादाम खाकर कुछ ज्ञानवर्धन कर लिया।
    रस नू चाशनी बना के
    अलंकार नू विच घूमाके
    ध्वनि दा राग पाके
    वक्र थोड़े चढ़ाके
    रीति नू नाल मिलाके
    औचित्य दी ताल बैठाके
    जो हलवा बने, ओनूं कहंदे ने पवित्र काव्यआत्मा।
    आपने अद्भूत वर्णन किया है, मजेदार। पढ़ते-पढ़ते मुस्कुराहट आ ही जाती है।

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  45. उम्दा पोस्ट !
    नव वर्ष(2011) की शुभकामनाएँ !

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  46. आभार इसलिए कि जाते साल के मुक्त अट्ठहास का मौका अता फरमाया आपने ! :) हा हा हा हा हा ....क्या लिखा है और खूब लिखा है! इतनी साफगोई के साथ वही लिख सकता है जिसने इन तमाम विधाओं को एक लाचार और संवेदनशील पाठक की हैसियत से खूब झेला भी हो -यह भोगा हुआ यथार्थ ही है ! :) आपके इस उदाहरणीय लेखन से ये विधायें और भी पुष्पित पल्लवित होंगी जैसा कि आयी टिप्पणियाँ जिनमें इन विधाओं के पुरोधा है ,बता रही हैं कि उन्हें भी आपका यह लेख(प्रगटतः ) बहुत भाया है !
    अब ब्लॉग लेखन विधा पर अगले साल लिखियेगा ,वादा करिए!

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  47. काश इंगित विधाओं के विद्वान् लेखक एक पाठक के त्रास संत्रास की तनिक भी अनुभूति कर पाते ..... :)
    नया वर्ष आपके और आपके परिवार के लिए बहुविध सुखद और मंगलमय हो !

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  48. अब आपका हुक्म टला न जा सकेगा ....निर्मल हास्य ही समझ रहे है मजाल की और कुछ समझे :)
    बहुत बहुत मज़ेदार पोस्ट है शिखाजी . अच्छे से बादाम खाईयेगा ताकि हम लाभ उठाते रहे...आपको सपरिवार नववर्ष की शुभकामनाएँ !!

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  49. सारी विधाओं के बहाने ये जो भीगो भीगो के मारे हैं आपने जूते...इस विलक्षण अदा को सलाम, मैम!

    अद्‍भुत! खास कर कविता को लेकर कही सारी बाते...उफ़्फ़्फ़्फ़!

    लेकिन ग़ज़ल को क्यों छोड़ दिया अपने?

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  50. बढ़िया विश्लेषण किया है.....सारी विधाओं का

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  51. मुझे तो वो बादाम वाली दुकान का पता बताओ .....जिन्हें खाके तुम संस्मरण लिखती हो ....

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  52. आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

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  53. शिखा जी,
    नए वर्ष के स्वागत के लिए आपने हंसने हंसाने का अच्छा इंतजाम किया है !
    आपको सपरिवार नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  54. अरे
    इतना आसान है
    फिर तो अब मैं भी साहित्यकार बन जाऊंगा
    और हर विधा पर हाथ आजमाऊंगा
    कहानी, निबन्ध, व्यंग्य खूब लिखूंगा
    कविता पर हाथ आजमाऊंगा

    प्रणाम

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  55. आपके जीवन में बारबार खुशियों का भानु उदय हो ।
    नववर्ष 2011 बन्धुवर, ऐसा मंगलमय हो ।
    very very happy NEW YEAR 2011
    आपको नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें |
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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  56. अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

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  57. aapne kitani achchhi vyaakhyaaen kee hai!bahut achchha laga!...naya saal mangalmay ho!

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  58. सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
    सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
    सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
    सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
    सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्‌ दुःखभाग्भवेत्‌॥
    सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
    बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!

    सदाचार - मंगलकामना!

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  59. वाह क्या परिभाषाएं है ? पसंद आया यह अंदाज़

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  60. आप को परिवार समेत नये वर्ष की शुभकामनाये.
    नये साल का उपहार
    http://blogparivaar.blogspot.com/

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  61. वाइ ...बहुत ही खूबसूरत तरीके से आपने व्‍यक्‍त किया है सभी विधाओं को ...एक से बढ़कर एक लगीं सब ...बधाई हो इस सुन्‍दर प्रस्‍तुति के लिये ...नया वर्ष आप सभी के लिये मंगलमय हो ..।

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  62. सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है,
    यह हमारी आकाशगंगा है,
    सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं,
    कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी,
    आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है,
    किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह,
    मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे,
    आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं,
    मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर,
    उनमें से एक है पृथ्वी,
    जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में,
    इन्हीं में एक है महान सभ्यता,
    भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए,
    मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव,
    भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव,
    एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण,
    नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार,
    शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय,
    यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
    -डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

    नववर्ष आपको बहुत बहुत शुभ हो...

    जय हिंद...

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  63. नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें!

    पल पल करके दिन बीता दिन दिन करके साल।
    नया साल लाए खुशी सबको करे निहाल॥

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  64. नये वर्ष की असीम-अनन्त शुभकामनाएं.

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  65. नववर्ष की शुभकामनाएं
    पोस्ट अच्छी है.

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  66. sikhaji thanks cuitra mujhe bhi thiknahin lagalekin mera blog koi aur type karta hai

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  67. sikhaji thanks cuitra mujhe bhi thiknahin lagalekin mera blog koi aur type karta hai

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  68. yah research bhi tumhara kamaal ka hai...maza aa gaya

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  69. Behtareen aalekh!
    Naye saalkee dheron shubhkamnayen!

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  70. आपकी अति उत्तम रचना कल के साप्ताहिक चर्चा मंच पर सुशोभित हो रही है । कल (3-1-20211) के चर्चा मंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.uchcharan.com

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  71. hahahhahahahahahha kavi+ta= ta ta thaiyaa....
    itni vidha to mujhe aati nahin, dheere dheere sikh rahi hun. lekin bloging ki vidha kee bhi jaankaari zaroor dijiyega. blog+ing ya blo+ ging...... main bhi zara seekh hin lun. maza aagaya padhkar. bahut rochak likha hai, badhai shikha ji.

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  72. मरे ख़्याल से माफी मांगने की कोई ज़रूरत ही नहीं है, परिभाषाएं तो यही है पर किताबों में लिखने वाले इन्हें जरा चमका कर लिख लेते हैं :)

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  73. नया पाठ पढ़ा - अच्छा लगा । अच्छी पोस्ट ,नववर्ष की शुभकामनाएं । "खबरों की दुनियाँ"

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  74. agar badam ka ye asar hai akhrot khane se kya hoga ?
    ram hi rakhe ???

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  75. वाह वाह .. शिखा जी आपने तो नए बिन्दुओं की खोज की है ... बहुत ही मजेदार व्याख्या ...
    आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो ...

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  76. जय श्री कृष्ण...आपका लेखन वाकई काबिल-ए-तारीफ हैं....नव वर्ष आपके व आपके परिवार जनों, शुभ चिंतकों तथा मित्रों के जीवन को प्रगति पथ पर सफलता का सौपान करायें .....मेरी कविताओ पर टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आगे भी इसी प्रकार प्रोत्साहित करते रहिएगा ..!!

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  77. Nice post .
    ऐतराज़ क्यों ?
    बड़े अच्छे हों तो बच्चे भी अच्छे ही रहते हैं .
    आज कल तो बड़े ऐसे भी हैं कि 'माँ और बहन' कहो तो भी ऐतराज़ कर डालें.
    ऐसे लोगों को टोकना निहायत ज़रूरी है . गलती पर खामोश रहना या पक्षपात करना
    ही बड़े लोगों को बच्चों से भी गया गुज़रा बनती है .
    रचना जी को मां कहने पर
    और
    दिव्या जी को बहन कहने पर
    ऐतराज़ क्यों ?
    अगर आप यह नहीं जानना चाहते तो कृप्या निम्न लिंक पर न जाएं।
    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/12/patriot.html

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  78. Ha,ha,ha! Sansmaran likhte samay aapki har baat pe gaur karungi!!Padhiyega zaroor!:):)

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  79. आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की अनंत मंगलकामनाएं

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  80. सुन्दर प्रस्तुति,
    आप की कविता बहुत अच्छी लगी
    बहुत बहुत आभार

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  81. सार्थक और बेहद बेहद खूबसूरत रचना
    नव वर्ष की मंगलकामनायें

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  82. विधा को परिभाषित करने का यह अनोखा अंदाज भी तो एक विधा है.
    बहुत सुंदर

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  83. क्या कहू !!

    शब्द का ज्यादा माहीर नहीं हु ,काफी सोचने पे एक शब्द ही सटीक लगा मुझे "लाजबाब"

    आभार और धन्यवाद इस ज्ञान के लिए
    नव वर्ष की शुभकामनाये सहित
    एक पाठक अजय

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  84. संस्मरण और यात्रा वृतांत विधा की परिभाषा तो ठहाके लगाने पे मजबूर कर दिया

    हे हे हे हे हे
    मेरे यहाँ भी पधारे
    http://anubhutiras.blogspot.com/

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  85. बढ़िया....interesting...

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