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Tuesday, 26 October 2010

चलो अरुंधती राय बन जाएँ

भूखे नंगों का देश है भारत, खोखली महाशक्ति है , कश्मीर से अलग हो जाना चाहिए उसे .और भी ना जाने क्या क्या विष वमन...पर क्या ये विष वमन अपने ही नागरिक द्वारा भारत के अलावा कोई और देश बर्दाश्त करता ? क्या भारत जैसे लोकतंत्र को गाली देने वाले कहीं भी किसी भी और लोकतंत्र में रहकर उसी को गालियाँ दे पाते?.वाह क्या खूब उपयोग किया जा रहा है अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों का......

हाँ हम काबिल हैं कितने  
कुछ इस तरह दिखायें
उसी लोकतंत्र का ले सहारा 
गाली उसी को दिए जायें
ले औजार  भूखे नंगों का 
अंग-अंग देश के चलो काटें 
बैठ आलीशान कमरों में 
सुलगता मुद्दा कोई उठाएं 
अपनी ही व्यवस्था को कर नंगा 
पुरस्कार कई फिर पा जायें
हो क्यों ना जाये टुकड़े देश के 
अपनी झोली तो हम भर पाएं 
उठा सोने की कलम हाथ में 
चलो हम अरुंधती राय बन जायें

87 comments:

  1. आज होड़ मची है अपने ही देश को गाली देने के लिए। जिसकी जो मर्जी होती है वह अपने देश के खिलाफ बोलता है। अच्‍छा लिखा है आपने।

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  2. आज होड़ मची है अपने ही देश को गाली देने के लिए। जिसकी जो मर्जी होती है वह अपने देश के खिलाफ बोलता है। अच्‍छा लिखा है आपने।

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  3. बैठ आलीशान कमरों में
    सुलगता मुद्दा कोई उठाएं

    कडवे सच को बयाँ करती पंक्तियाँ....ए.सी. की ठंढक में गद्देदार सोफे पर बैठ गरमागरम बहस का ही चलन है.
    बढ़िया रचना

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  4. पसंद आया यह अंदाज़ ए बयान आपका. बहुत गहरी सोंच है
    सच केवल सच और सच के सिवाय कुछ नहीं।

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  5. यही आज का सच है जो देश को जितनी बडी गाली देगा वो ही देशभक्त कहलायेगा और नाम के लिये तो कुछ भी किया जा सकता है और मेरे ख्याल से अरुंधति राय उसे भुनाना अच्छे से जानती हैं । उम्दा लेखन ।सच दिखाता हुआ।

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. 6.5/10

    सामान्य लेखन होते हुए भी असरदार पोस्ट है. पोस्ट का विषय और भाव सामयिक एवं अत्यंत चिंतनीय है. इस देश में आखिर देश-द्रोह शब्द की परिभाषा है क्या ? ये भरे पेट वाले चर्चित चेहरों पर कब लगाम लगेगी ?

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  8. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग , देश द्रोही बयानों के लिए करना मानसिक दिवालियापन का ज्वलंत उदाहरण है , अरुंधती को नक्सल समस्या और कश्मीर पर उनके घृणित बयानों पर सरकार को उचित और साहसिक कदम उठाना चाहिए .इसे कहते है जिस थाली में खाओ उसी में छेद करना . कविता के लिए इस विषय का चयन और उचित कटाक्ष के लिए बधाई .

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  9. इसे कहते हैं सीधा कनपटी पर सन्नाट मारना ..एकदम धपाक से ताकि कान से निकल कर आवाज़ दिमाग तक पहुंच जाए । अब इन सो कॉल्ड बुद्धिजीवी महानुभावों का इसी तरह से कुछ ऐसा ही किया जाना चाहिए

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  10. अगर हमारा संविधान यासीन,गिलानी,अरुंधती और अन्य इनके जैसे
    राष्ट्रद्रोहियों पर कोई कार्यवाही के लिए प्रेरित न कर सके सिर्फ यह
    कहकर की हमारा संविधान अधिक परिपक्व है ...तो मै निश्चित रूप से संविधान
    निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर के उस वक्तव्य का समर्थन करूंगा जो उन्होंने
    १९५३ में संसद में दिया था जिसमे उन्होंने कहा था कि "...अगर मौका मिला तो इस
    संविधान को जलाने वाला भी मै ही पहला व्यक्ति होऊंगा |"

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  11. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यही अर्थ तो समझा हमने अब तक.......अफ़सोस
    इस पर कुछ लिखने का मन था आपने बेहतरीन लिखा है.... ऐसे विषयों पर बात होनी ज़रूरी है
    धन्यवाद

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  12. क्लासिकल लोगो का नंगपन उजागर करती रचना के लिए धन्यवाद शिखा !

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  13. क्या हम इतने बेबाक तरीके से अपनी बात कह सकेंगे..यह हिम्मत कम ही लोगों में होती है...
    भले ही वो कुछ भी कह रहे हों, इतने ही बेबाकी से सरकार भी उनके खिलाफ कदम उठाये तब तो
    मेरे ब्लॉग पर इस बार अग्निपरीक्षा ....

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  14. यदि ध्वंस मचाना हो,
    राष्ट्र गिराना हो,

    ..

    चलो...

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  15. ये एक क़ताअ ही टिप्पणी के रूप में स्वीकार करने का अनुरोध है-
    आग को हाथ लगाओगे तो जल जाओगे.
    अम्न का दीप बुझाओगे तो जल जाओगे.
    बर्फ़ की वादी है कश्मीर ये माना लेकिन,
    इसको छूने कभी आओगे तो जल जाओगे.

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  16. @ कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है...
    और ये क़ताअ सभी विरोधी ताकतों के लिए है.

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  17. यह लोग कुते की तरह विदेशियो के आगे पीछे दुम हिलाते हे, ओर वो बदले मै इन की किताबो को सही बताना ओर सम्मान देना,इन की चर्चा भी बेकार हे, जो घर का ना हुया वो किस का होगा, बहुत अच्छा लिखा आप ने, धन्यवाद

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  18. इन बातों को शय देने वाली सरकार सब से बड़ी दोषी है जो गूंगी बहरी बनी रहती है।

    बहुत सही रचना है बधाई स्वीकारें।

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  19. आप लंदन में बैठकर सोच लेती हैं, वो भारत में रहकर ये सो कॉल्ड बुद्धिजीवि नहीं महसूस करते.. वैसे भी यह आजकल फ़ैशन में है!!

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  20. Uf! Kya kah diya aapne! Mujhe Arundhatee Rai kaa lekhan ka vishay ya shaili dono hee bardasht nahee! Shayad Booker's award winner ke bareme aisa kahte hue mujhe sharm aanee chahiye,lekin nahee aatee.

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  21. ऊफ आप लोग क्यों एक भली नारी को बुरा भला कहा रहे है आप को उनकी बात समझ नहीं आ रही है तो NDTV पर विनोद दुआ जी को सुना होता वो बता रहे थे की वो कितनी सही है मुझे समझ नहीं आया शायद आप लोगों को समझ आ जाता |

    एक बार पेज थ्री पर आने की लालशा भले ख़त्म हो जाये पर फ्रंट पेज पे आने की आदत नहीं छूटती है चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े |

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  22. nahi hume nahi banna hai arundhati;kyoki unki to mari gayi hai mati;hume to chalane hai sohard ke meethhe teer;jisse majboot bane bharat aur mahak uthhe kashmeer.

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  23. @ शिखा जी
    बहुत अच्छा लिखा आप ने, धन्यवाद

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  24. कह नहीं सकता दी.. वैसे ये भी सच है कि अरुंधती जमीन से जुड़ी हुई लेखिका हैं, बिना तथ्यों के बात नहीं करतीं. उन्हें ए.सी. में बैठ के लिखने वाली तो मैं नहीं ही मानता.. उलट हम पढ़ने वाले ही ए.सी.. में बैठ पढ़ रहे हैं.. मेरे कुछ करीबी जो उनसे जुड़े हैं वो जानते हैं कि अरुंधती नाम, शोहरत और पैसों के लिए नहीं मरतीं कभी. बाकी सच क्या है बिना मिले नहीं जान सकता.. इसलिए मैं ना ही उनके समर्थन में कुछ कहूँगा ना ही इस पोस्ट के समर्थन में. :(

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  25. बहुत दुखद और शर्मनाक है ...
    लोकतंत्र को जी भर कर कोसने वाले उसका फायदा उठाने में जरा नहीं चूकते ...!

    बहुत अच्छी और सच्ची कविता !

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  26. बहुत सही रचना है बधाई स्वीकारें।

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  27. ये मेरा मुल्क ,मेरी ज़मीं ,मेरे लोग हैं
    ताबीर इस ज़मीन पे है मेरे ख़्वाब की

    ये शेर उन अरुंधतियों और उन के जैसे ही और लोगों को सुनाना चाहती हूं ,जो मेरी इस पावन धरती को भूका नंगा हिंदुस्तान की संज्ञा देते हैं ,जिन्हें इस देश की मिट्टी ने मां का प्यार दिया और उन्हें ही भारतीय कहलाने में शर्म आ रही है शर्म तो हमें आती है इन को हिंदुस्तानी कहने में ,अरुंधति ये भूल गई हैं कि इसी भूके नंगे भारत ने आज उन्हें इस मक़ाम तक पहुंचाया है कि वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर पा रही हैं ,
    भारतीय सेना पूरी दुनिया में अपना एक सम्मानित स्थान रखती है ,उस सेना की बुराई करते हुए और उस पर इल्ज़ाम लगाते हुए अरुंधति ये भूल गईं कि उन की रातों की नींद इसी सेना की देन है ,२ दिन सरहद पे जा कर देखें २ घंटा नहीं रह पाएंगी उन हालात में जहां हमारे जवान निस्वार्थ भाव से देश सेवा कर रहे हैं

    आप ने बहुत सही मुद्दा उठाया है अपने सरल,सहज शब्दों के द्वारा

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  28. वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ट्विटर पर कहती है कि.. "जब भूतपूर्व उपन्यासकार के फिक्शन पर कोई चर्चा नहीं होती तो वे राजनीति को ही फिक्शन बना डालती है.. ये किसी भी तरह से चर्चा में रहने की कला है.."

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  29. शिखा जी,

    कल ही देख लिया था इस प्रविष्टि को पर विषय गम्भीर है सो टिप्पणी नहीं की , क्योंकि...
    किसी व्यक्ति के बारे मे मुकम्मल राय कायम करने से पहले यह ज़रुरी है कि , उसने क्या किया / क्या कहा ? ये जान लिया जाये ! अरुंधति के मामले में मीडिया की रिपोर्टिंग के सिवा , उनकी कोई स्क्रिप्ट / उनका कोई वक्तव्य नहीं पढ़ पाया अब तक !

    नक्सलियों के मसले पर उनका आलेख पढकर किसी ब्लाग आलेख पर टिप्पणी दे पाया था सो आज काश्मीर जैसे सम्वेदनशील मुद्दे पर भी ऐसा करना उचित होगा ! मैं नही चाहता कि 'कोई सन्दर्भ' काट कर टिप्पणी कर बैठूं !

    कम से कम किसी बन्दे पर आरोप लगाने से पहले इतनी सतर्कता ज़रुरी लगती है मुझे ! उम्मीद करता हूं कि आप मेरे मंतव्य से सहमत होंगी !

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  30. crisp and blunt....its amazing !!

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  31. pata nahi kya ho gaya hai, logo ko........kyun apne matribhumi se upar apne ko samajh lete hain.......!!

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  32. अपने स्लम को दिखाने के लिए बाहर वालों को बुलाते हैं
    उनके चारण में "जय हो जय हो" गाते हैं।
    ***
    प्रकृति ने भाषा बदल दी व्याकरण खतरे में है
    आदमी खतरे में है पर्यावरण खतरे में है
    रह रहे हैं लोग अब खुद की बनी भूगोल में
    सिर्फ़ दर्पण ही नहीं अंत:करण खतरे में है।
    ***

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  33. bahut dhaardaar aur asardaar post hai ... par kabhi kabhi dukh hota hai ... hum apne vichhar to rakhte hain ... jinhein sunana chahtein hain kya wo sunte hain... kya samajhte hain ... pata nahi ... dhanyawaad hum sab ke saath share karne ke liye ...

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  34. बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति....अब समय आ गया सब अपनी कलम को तलवार की तरह उठा लो और निकल पङो

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  35. तीखा कटाक्ष है लेकिन १०० % खरी बात कही है आपने ...मुझे भी बहुत चुभन हो रही है इन मेडम के ऐसे वक्तव्यों पर .

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  36. ek dum sahi mudda uthaya hai di ....agar kisi aur desh me hoteen ye to ab tak jail me sad rahi hoteen..itna sochta vicharta nahi koi jitna yahaan socha ja raha hai...aaj kal news me aane ke liye kuch bhi kar rahe hain log...ariundhati roy ko bhi news me aaye bahut din ho gaya tha...ya kitaab likhne ke liye experiance kam pad gaya ho ..kuch naya mahsoos karna chaahti hon ...

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  37. अरुंधती रॉय ने गलत बयानबाजी की है!....आप की तीखी प्रतिक्रिया बहुत सही है!...ये कैसी देशभक्ति है?...

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  38. दीपक मशाल जी एवं अली साहब की बात विचारणीय है. अक्सर हमारा मीडिया हाथी को दरकिनार कर केवल उसकी दुम लेकर तमाशा पेश करता रहता है.
    अरुंधती जी का कोई सीधा वक्तव्य अभी सामने नहीं आया है. इसीलिए मैंने अरुंधती जी का नाम नहीं लिया. किन्तु पोस्ट की मूल भावना ज्यों की त्यों है कि देश का अपमान करने वालों अथवा देश की समरसता को नष्ट करने वालों पर कब कड़ा कदम उठाया जाएगा ???

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  39. आप सभी का प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया.बात यहाँ अरुंधती कि या किसी विशेष की नहीं है न मेरी उनसे जातीय दुश्मनी है कोई.मेरा क्षोभ मीडिया की रिपोर्ट पर नहीं उनकी बयानबाजी पर है. देश में समस्याएं हैं हर देश में होती हैं पर अपने ही देश को गलियां देना कहाँ तक उचित है उनके लिए.देश के और भी हिस्सों में आतंकवाद या जातीय समस्याएं हैं तो क्या उन सबको अलग कर देना चाहिए बना देने चाहिए आसाम, झारखण्ड , उतराखंड नाम के और २-४ पकिस्तान और बंगलादेश?.

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  40. satik baat....abhivyakti ki aajaadi kaa matalab yah nahi hota ki desh ke khilaf jo bhi man kare bolna....aapki baaton se 100% sahamat.

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  41. बहुत ही सटीक बात कही है आपने.

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  42. खुले आम देशद्रोह की बात इसी देश में संभव है। वैसे दिल्ली पुलिस ने सुना है केस रजिस्टर कर लिया है ।

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  43. thanks for nice comments.ek reporter ki jimmedari ka aapko ehsas hai hindustan me sahansheelta ghatak hoti ja rahi hai.desh ko gali dene vale apne ko prgatisheel kahten hain arundhati rai ko punish karna chahiye

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  44. बिलकुल सही कहा आपने । मेरे ख्याल मे ऐसे लोगों को चौराहे पर खडे कर गोली मारनी चाहिये। ये भी लगता है कि अब अधिक आज़ादी हमारे लिये खतरनाक बन गयी है।पंजाबी मे एक कहावत है
    भठ्ठ पिया सोना जिहडा कन्ना नूँ खावे{ भाड मे जाये ऐसा सोना जो कानों को खाये} यही हाल आज़ादी के लिये भी है। जिस थाली मे ये खाते हैं उसी मे छेद करते हैं।
    ये आदमी का लोभ भी क्या कुछ कराये आजकल
    जिस डाल से छाया मिली उसकी जडें ही काट ली
    अच्छी सार्थक रचना। शुभकामनायें।

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  45. shikha ji mujhe to samjh nahi aaya ki achanak se arundhati roy ko apna hi desh kyon khalne laga..kasmir ka masla barson se chal raha hai aur unko achanak hi aajadi ki fikra kyon hone lagi ..unki fikr hi unka jikr ban jaye iss liye..? aisi man sikta ko samjhna muskil hai..

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  46. bahoot sahi kaha aapne...

    bagvan aaise longo ko agla janm chaina jaise desh me de.

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  47. bahoot sahi kaha aapne...

    bagvan aaise longo ko agla janm chaina jaise desh me de.

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  48. सुन्दर कटाक्ष, समसामयिक रचना |

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  49. This comment has been removed by the author.

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  50. बैठ आलीशान कमरों में
    सुलगता मुद्दा कोई उठाएं
    अपनी ही व्यवस्था को कर नंगा
    पुरूस्कार कई फिर पा जायें

    aapka deshprem dekhkar man bhavvibhor ho jata hai

    bahut jabardast kataksh

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  51. बात गली देने कि या होड मचने कि नहीं है .. जो वास्तविकता है उससे हम क्यू पीछे हट रहे है ..

    आपकी रचना अच्छी लगी !
    ---------------
    फिर से हरियाली की ओर........support Nuclear Power

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  52. ACHCHHA LAGAA, KI AAPNE HIMMAT KE SATH LIKHA. ARUNDHATI JAISI GUMARAH LEKHIKAO KEE JAGAH JAIL HAI.

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  53. गैर जिम्मेदाराना हरकत को आपने सही शब्दों में उजागर किया है ।

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  54. मेरे हिसाब से तो ये राजनीति में कदम रखने की पहली सीढ़ी है
    कुछ भी अनाप- शनाप बोलो लोगों की नज़रों में आओ मशहूर हो जाओ पर अपने आप को पढ़ा लिखा कहने वाले लोग ये तरीका अपनाये या इस तरह की बे सर पैर की बात कहें ये एक बीमार और घिनौनी मानसिकता का परिचायक है

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  55. bahut hee jawlant vishay ko aapne uthaya hai...aajkal jo bhee nayak banane kee sochta hai vahi khalnaykee ki bhasha bolne lagta hai aur log chupchap uske chup hone ka intjar karte hai..sarkar tatha logo kee udaseenta desh ko kaha le jayegee ishwar jane

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  56. बहुत सटीक कटाक्ष ...इस तरह के बयान सोचने पर विवश करते हैं कि यह कैसा देश प्रेम है? जागरूक करती रचना...

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  57. arnundhati madam
    booker award jeetne ke baad ab highlight mein nahin hain aur bhavishya mein vo kya karengi shayad unhe pata nahi isliye ab vo gambhir muddon par halke bayano se shayad khabron mein bane rehna chahtee hain.

    vaise bhi kuch mudde hindustan mein EXPIRY DATE PAR KAR CHUKE HAIN aur ab unse badbu ane lagi hai,kashmir mudda ab ek aisa hi mudda hai,ab ye din ba din jeena hamara dubhar hi karega behtar hai is jald se jald nipta liya jaye.................

    APKI PANKTIYAN SHANDAAR HAIN..................

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  58. उठा सोने की कलम हाथ में
    चलो हम अरुंधती राय बन जायें
    --- मार्मिक लगी पंक्तियाँ !!

    अरुंधती राय का ब्यान एक राष्ट्र - जिसकी संप्रभुता बहुत कुछ उसकी सांस्कृतिक-भौगोलिक सीमाओं से निश्चित होती है - के विरुद्ध जाता है ! निंदनीय कहा जाएगा !

    वे लोग जिन्हें अभी भी 'जमीन से जुड़े लेखक' के एकाएक ऐसा बोलने पर आश्चर्य है , उनको सोचना चाहिए कि एक लेखक की भी सीमाएं हो सकती हैं ! आभार !

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  59. नया अंदाज काव्य,व्यंग्य कटाक्ष पसंद आया शिक्षा जी।

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  60. bebak kavita, shikah ji, aap me ek bad to jabardast he, ki bharat se bahar rehte hge bhi, aap is kadr bharat ko feel karti hain, jo kabile tareef he, sahi kataksh ya kahu karara tamacha jada he aapne Arandhuti Rpy ji ke makhmali gal par, jo jis thali me khate hain usi me chhed kar rahe hain

    badhai

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  61. माफ़ कीजियेगा आपका नाम गलत लिखा गया था शिखा जी.

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  62. हमें इस बात को तो मानना ही पड़ेगा की हमारे अन्दर स्वार्थ की भावना कूट - कूट कर अगर हमें मिल

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  63. हमें इस बात को तो मानना ही पड़ेगा की हमारे अन्दर स्वार्थ की भावना कूट - कूट कर भरी है अगर हमें कोई चीज मिल जाती है तो, हम सोचतें हैं की ये किसी और को ना मिले| और इसी होड़ में सारा कुछ निहित है |

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  64. accha likha hai apne
    yaha bhi aye aur kuch khe

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  65. दुःख होता है ऐसे बुद्धिजीवियों पर ... जिस देश का खाते हैं, जहां वो इस लायक हुवे क़ि कुछ कर सकें ... उसे ही गालियाँ निकालते हैं .... कब तक उदार बनेंगे भारत वासी ...

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  66. sharam aati hai jab arundhati rai ke baare mei suna tha aur proud hua tha kee ek hindustani ko award mila hai.

    Hindustani aise nahi hote

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  67. अरुंधती जी जिस देश ने आपको इतना प्यार और सम्मान दिया , अपनी जन्म्भूमि का इतना अपमान । क्या यही बुद्धजीविता है , तब तो शायद हमारे(क्योकि आप तो शायद भार को अपना मानती नही)देश का निरक्षर व्यक्ति भी आपसे ज्यादा समझदार है क्योंकि उसे भारत और कश्मीर का सम्बन्ध पता है ।

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  68. वाह, बड़े मौके की कविता है!! खूब तमाचा मारा है आपने!!! सुन्दर.

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  69. कडवे सच को बयाँ करती

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  70. देश प्रेम का ना होना या देश को बदनाम करना देश के खिलाफ गद्दारी है. वैसे ही ऐसे बहुत से लोग हैं, जो केवल दिखावे के रूप मैं
    देश प्रेम की बातें करते हैं. अरुंधती राए के मसले मैं मीडिया ने अधिक कहा है और अरुंधती राए ने कम ..
    अरुंधती राए ने जो कहा उसका जवाब इंडिया सरकार को देना चहिये और अगर गलत कहा, या देश के खिलाफ कोई बात कही, तो मामला दर्ज होना चहिये.
    इमानदारी आवश्यक है , मीडिया तो चिंगारी को आग भी बना दिया करता है..

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  71. shikha ji,
    is vishay par main kya likhun samajh nahin aa raha. kashmir kee samasyaa ka nidaan bandook se bandook ki ladaai se nahin honi hai. jahan tak baat arundhati roy ke kahne ya likhne ki hai, mai unhe kabhi padhi nahi lekin itna zarur hai ki koi bhi lekhak bebuniyaad kuchh bhi nahin kahta. fir bhi mai na unke paksh mein kahungi na vipaksh mein. aage aage dekhte hain kya hota hai. deshdroh ka mukadma ya fir unki baat ko samajh kar sarkaar kashmir keliye kuchh saarthak kadam uthaaye taaki kashmir bharat mein hin rahe aur unki samasya bhi door ho.

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  72. sriदीपक 'मशाल' nay sahi likha hai.nice..........................................

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  73. इस देश की कानून व्यवस्था(सरकार) क्या संगठित अपराधियों को महिमामंडित करके इस देश के सविधान की बलि चढ़ा रही है ?

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  74. दिल की बात लिखी है आपने .....लिखते रहे ...शुभकामनायें

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  75. चर्चा में बने रहने को जो न कर जायें सो कम है ऐसे लोग.

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  76. वार्ष्णेय जी,
    भारत की मिट्टी के प्रति आपका जुड़ाव वन्दनीय है . आपके अन्दर की तड़प आपकी आवाज़ बनकर भारतवासियों तक पहुँच रही है.
    दिक्कतें हर देश,हर घर में होती हैं,ये बड़ी स्वाभाविक और आम बात है.कश्मीर के मसले पर अपना एक शेर कहूँगा:-
    सीने में अगर जज़्ब-ए-हुब्बे वतन रहे ,
    किसकी मजाल छूले कोई कश्मीर को.

    और हम लोगों में अपने देश के प्रति प्यार का जज़्बा है,प्यार है.

    कुँवर कुसुमेश
    ब्लॉग:kunwarkusumesh.blogspot.com

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  77. Dear Shikha Ji,
    Impressive Post.
    However, I will say that let her enjoy!
    Ashish

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  78. मेरे ब्लॉग पर इस बार चर्चा है जरूर आएँ...लानत है ऐसे लोगों पर ....

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  79. शिखा जी चर्चा में रहना जिनका मुख्य उद्देश्य है वह कुछ ओर नही सोचते।

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  80. उम्दा लेखन ।सच दिखाता हुआ।

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  81. सुंदर रचना, सुंदर प्रस्तुति...धन्यवाद! ...दिपावली की शुभ-कामनाएं!

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  82. दुनिया के सामने हम एक आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जो भारत में है वह और कहीं नहीं है. हम सब कुछ झेलते आये हैं और झेलते रहेंगे.
    मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का हम क्या करें. जब तक वे जीवित हैं झेलना ही पड़ेगा.

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  83. DEKH DESH KO SANKAT ME GAR KALAM BANI TALWAAR NAHI
    TO FIR KALAMKAR KAHLANE
    KA HAMKO ADHIKAAR NAHI
    AAPNE KALAMKAR HONE KA DHARM BAKHOOBI NIBHAYA HAI |

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  84. अरुंधती को गंभीरता से न लेकर भारत सरकार ने सही किया। अब उन्हें पता चली होगी इस देश की महानता।

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  85. मैं क्या बोलता हूँ कि इस बारे में कोई चर्चा , कोई ब्लॉग, कोई लेख होना ही नहीं चाहिए| कुछ दिन शांत रहना चाहिए | तीन दिन से ज्यादा तो अरुंधती भी नहीं रहेंगी कश्मीर में | देशविरोधी बयानबाजी जैसी कोई चीज़ अब मुझे नहीं लगती | ये देश अन्दर ठुंसा हुआ है | आत्मा है , कोई जमीन का टुकड़ा नहीं |

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