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Wednesday, 5 May 2010

शायद झुलसती गर्मी में ही गर्माते हैं रिश्ते .....मेरा भारत प्रवास------ शिखा

यूँ तो भारत जाना हमेशा ही सुखद होता है ..परन्तु इस बार कुछ ज्यादा ही उत्सुकता थी ..काफी सारी योजनायें बना लीं थीं , बहुत सारे मनसूबे बाँध लिए थे....इस आभासी दुनिया के कुछ मित्रों से वास्तविक रूप में मिलने की  उम्मीद थी.....जी हाँ उम्मीद ही कह सकते हैं , क्योंकि भारत पहुँच कर कुछ अपाहिजों जैसी हालत हो जाती है हमारी ,.. रास्तों का ज्ञान , ही वहां के ट्रेफिक कि समझ कि उठाई कार और चल पड़े .हमेशा पतिदेव के ही रहमो करम पर रहना पड़ता है..(जैसा कि पिछले साल भारत प्रवास के दौरान हुआ था.जब हमें एक साहित्यकारों की  पार्टी में अपने आई टी पति को ले जाना पड़ा था :) )

इन उमीदों कि शुरुआत हुई तब - जब हमें पता चला कि हमारी किंग फिशर flight मुंबई होकर जाएगी , घंटे का ट्रांजिट था तो पतिदेव ने सुझाया - " घंटे को दिन करना है? बहन से मिलना है ?" (ये पति लोग भी कभी कभी इंसान बन ही जाते हैं ..पर कब और कैसे और क्यों बनते हैं ...ये एक पहेली ही रहेगी :)) नेकी और पूछ पूछ हमने तुरंत हाँ में सर हिलाया और ख्यालों में योजनायें बनने लगीं मौका पाते ही रश्मि रविजा को बताया ..यहाँ ये बताना बहुत ही जरुरी है कि रश्मि जैसी understanding सहेली मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है....जिसने छूटते ही कहा कोई बात नहीं तुम जाओ जहाँ कहोगी हम मिलने जायेंगे....एक बार तो यकीन नहीं हुआ ..क्या सच - मुच....मुंबई जैसे शहर में ये मुमकिन है ? ....फिर सोचा भाई हो सकता है इंडिया है वहां गर्मी से और कुछ होता हो या नहीं रिश्तों में गर्माहट तो रहती ही है....और हमारा ख्याल एकदम सच साबित हुआ जब हमने एक बड़ा सा फूलों का गुल्दास्त्ता और हाथ में हमारी मनपसंद मिठाई का डिब्बा लिए साक्षात् रश्मि रविजा को अपने सामने पाया(वैसे ज्यादा चैट करने का ये फायेदा होता है कि सामने वाले को आपकी पसंद का पता हो जाता है और तोहफे में आपको अपनी मनपसंद चीज़ मिल जाती है ) हमने तड से फूल उनके हाथ से झपट लिए ,क्योंकि एक तो फूल हमारी कमजोरी हैं , दूसरा देर करते तो फूलों में और रश्मि के खिले हुए चेहरे में फरक करना मुश्किल हो जाता...खैर जैसा कि आप लोगों ने जान लिया है कि मुलाकात के दौरान हम नॉन स्टॉप बोल रहे थे ,तो जी ऐसा नहीं कि हम हमेशा ही इतना बोलते हैं पर कुछ खास पलों में ख़ुशी इसी तरह छलक छलक पड़ती है:) कम्बख्क्त जबान रुकने को तैयार ही नहीं होती....मुलाकात का बाकी विवरण तो रश्मि http://rashmiravija.blogspot.com/2010/05/blog-post.html बता ही चुकी हैं मेरे लिखने के लिए कुछ छोड़ा ही नहीं उन्होंने



                                          
                                                  रश्मि के साथ ......


खैर मुंबई में वो दिन बहुत ही शानदार गुजरे और उछलते कूदते हम दिल्ली पहुंचे , दिल्ली में १० दिन रहने का विचार था और हजारों काम , यही होता है दो नौका में एक साथ सवारी करने का अंजाम ...हजारों काम पेंडिंग थे जिन्हें निबटाना था पर हमारा दिमाग तो लगा था कि क्या जुगत लगाई जाये कि कुछ करीबी मित्रों से मिलने की  सूरत निकल आये.पर सुबह से शाम तक चकरघिन्नी की तरह घूमने के चक्कर में अपनी ये योजना हमें खटाई में नजर रही थी...बहुत से लोगों से फ़ोन करने का और मिलने का वादा किया हुआ था ...पर डर  के मारे कॉल भी नहीं की ..कि यदि कॉल किया तो मिलने का और भी मन करेगा और मिल पाने कि सूरत में कोफ़्त भी बहुत होगी..पर वो कहते हैं कि इच्छा सच्चे दिल से कि जाये तो सारी कायनात उसे पूरा करने में जुट जाती है ..ऐसा ही कुछ हुआ... किसी जरुरी काम से हमारे पतिदेव को गुडगाँव जाना पड़ा और इस बहाने हम द्वारका में अपने एक रिश्तेदार के यहाँ रुक लिए ...बस फिर क्या था .तपाक से किया संगीता दी (स्वरुप )को फ़ोन और झटपट पहुँच गए उनके घर.ये दास्ताँ आप उनके ब्लॉग पर भी पढ़ चुके होंगे  और अगर नहीं पढ़ा तो अब पढ़ लीजिये गीत http://geet7553.blogspot.com/2010/04/blog-post_07.html पर) और जी हमें एक दुसरे को पहचानने में जरा भी मुश्किल नहीं हुई क्योंकि देखने में भी संगीता जी उतनी ही प्यारी हैं जितनी सुन्दर वो कवितायेँ लिखा करती हैं ...हाँ उनकी कविताओं को पढ़कर ये सोचना थोडा मुश्किल हो सकता है कि वो कितनी ज्यादा हंसमुख हैं ,और उनका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर कितना जबरदस्त्त है.वैसे इस मामले में मिस्टर स्वरुप ( उनके पतिदेव) भी कुछ कम नहीं ..जितनी देर बैठे फुलझड़ियाँ छोड़ते रहे और हम लपकते रहे.,हमारे ये तरह तरह के पोज बनाकर फोटो भी उन्हीं ने खींचे





                      संगीता दी के साथ


 Mr . Swarup के साथ 
उस दिन इतेफाक से संगीता दी की छोटी बहन भी वहां थीं ,उनसे मिलने का सौभाग्य भी मिल गया हमें ,और हमने मिलकर खूब गप्पे मारी और ठहाके लगाये और जबरदस्त्त किस्म का "आम पन्ना" पिया ..खाया क्या - क्या ये अभी नहीं बताउंगी वरना फिर से मूंह में पानी जायेगा और आगे कुछ लिखा नहीं जायेगा तो जी ...जी भर बातें करने के बाद हमने दी से विदा ली



          फिर बाद में कुछ और मित्रों को भी कॉल किया कि मिलने का समय तो नहीं पर कॉल करने से शायद थोड़ी शिकायतें कम झेलनी पड़ेंगीं ..जिनमे से एक हफूज़ मियाँ भी थे ,जिन्होंने फ़ोन उठाते ही कहा " कहाँ हैं आप ? में अभी रहा हूँ आपसे मिलने ...अगली ही गाडी से " पर जैसा कि आप सब जानते हैं ..और मैं भी कि उनकी गाड़ी हमेशा एन वक़्त पर छूट जाया करती है....ही ही ही

बरहाल मुंबई ,दिल्ली में घूमते हुए हमें ये एहसास कभी हुआ कि हम एक विकासशील देश में घूम रहे हैं ..सुना तो था कि भारत बदल गया ...पर इतना ? ..इसका अनुमान था हालाँकि हम हर वर्ष ही वहां जाया करते हैं पर इस बार लगा कि वाकई तरक्की कर ली है ...बड़े बड़े आलीशान माल्स , खूबसूरत सुसज्जित घर , फाइव स्टार स्कूल , और मेट्रो....अजी खाक डालिए लन्दन , अमेरिका पर ..भारत में जिन्दगी लाख गुना बेहतर है ...और यही सोच कर वहां एक अच्छे से स्कूल में हमने बच्चों का दाखिला करा दिया कि जी बस बहुत हुआ अब यहीं रहेंगे... अपनों के बीच..पर असली भारत देखना तो अभी बाकी था..वो हमें दिखा तब - जब हमने दिल्ली से निकल कर यू पी  की  तरफ रुख किया ..जाते ही पता चला बिजली नहीं रही ...कब आएगी ? जबाब मिला जाने का समय तो नियत है पर आने का नहीं ....यहाँ बिजली आती कम जाती ज्यादा है.रात को घंटे सुकून से सोने को मिल जाये तो गनीमत समझिये ..उस पर मच्छरों का प्यार , बेचारे बच्चों के शरीर पर तो जम के बरसे वो ..और हर जगह अपने प्यार कि निशानी छोड़ गए जिनकी बदोलत से अगले ही दिन हमें डॉ की  शरण में जाना पड़ा ...जितने अरमान यहाँ लेकर आये थे सब पसीने में बह गए ....जीभ चटकारे लेना तो दूर बेचारीठन्डे पानी को तरस गई ( अब जब बिजली नहीं तो फ्रिज कैसे चलेगा ) अब ये हाल तो यू पी के मुख्य शहरों का था ,बाकी छोटे शहरों कि तो कल्पना करना भी गुनाह है.तब समझ में आया कि तरक्की तो शायद हुई है पर एक सिमित दायरे में ...मूल भूत सुविधाएँ तो आज भी वहीँ हैं जहाँ १५ साल पहले थीं ...दूध वाला , सब्जी वाला, पान वाला आज भी वहीँ है जहाँ १० साल पहले था ...सबकुछ तो वैसा ही है ...कुछ भी तो नई बदला ....हाँ हमारा फिर से भारत में बसने का इरादा बदल गया फिलहाल ....

पर नहीं बदला तो वो है वहां के लोगों के दिलों में अपनों के लिए प्यार , दोस्ती का जज्बा , झुलसती गर्मी में पनपती रिश्तों की गर्माहट ......जो हमें बांधे रखती है अपनी मिट्टी से ...और हमेशा बांधे रखेगी ....जय हिंद......

48 comments:

  1. यह रहा मेरा पहला कमेन्ट....अरे! बाबा! जो ट्रेन मैं सोच रहा था न ....पकड़ने को..... जो टाइम से पहुंचा सकती थी.... वो....टाइम से थी.... एकदम.... इसीलिए छूट गयी.... नहीं तो मैं तो सर बल दौड़ के चला आता .... लेकिन उसमें आपकी फ्लाईट छूट जाती न.... पर फिर भी आपसे मिल ही लिया न.... साक्षात फ़ोन पर अच्छे से बात भी हो गयी न....वो कहते हैं न ......कि इच्छा ........सच्चे दिल से कि जाये तो सारी कायनात उसे पूरा करने में जुट जाती है..ऐसा ही कुछ हुआ... ही ही ही ही .....

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  2. हम्म तो आप हमेशा इतना नहीं बोलतीं..so sad. :( :( अब मेरा क्या होगा??...पर मेरी कम्पनी में तो बोलना ही पड़ेगा,ना...और चैट का फायदा तो सचमुच बहुत है...वो तुम्हारे लाये चॉकलेट और लिपस्टिक ने इसकी गवाही दे दी :)

    अपने देश की ये त्रासदी तो है ही..महानगरों से बाहर दूसरी ही दुनिया लगती है..कोई नहीं..बदलेगी तस्वीर जरूर...बहुत ही अच्छी तरह बयाँ किए हैं अपने अनुभव.

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  3. आपकी लाइव रिपोर्टिंग तो मुझे मिल ही रही थी न..... रश्मि जी से.... उस वक़्त मैं बिज़ी था न.... नहीं तो मैं भी मुंबई चला आता .... रेड कारपेट लेकर.... वो रेड कारपेट अभी भी ऐसा ही पडा है... पर कोई बात नहीं नेक्स्ट विज़िट में काम आ जायेगा.... और अबकी बार दिल्ली जाऊंगा न तो संगीता जी से ज़रूर मिलूँगा.... कम से कम ममा कि गोदी... तो मिलेगी... और आशीर्वाद...भी.....

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  4. चलिए एक और भारत प्रवास यादगार बना !

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  5. यह बात तो आपने बिलकुल सही कही....कि रश्मि जी जैसी understanding सहेली मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिनहै.... मैं उनसे कभी कभी कितना झगडा करता हूँ.... हंस के सब सुन लेतीं हैं....

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  6. भारत वापस आकर बसने का इरादा --शिखा जी रहने ही दीजिये । ये तो यहाँ रहने वाले लोग ही है जो इतने इम्म्युन हो गए है कि बिना बिजली पानी के भी सांस ले लेते हैं। और यू पी क्यों --पूर्वी दिल्ली में आकर देखिये , असली भारत के दर्शन हो जायेंगे सड़कों पर । बेशक अब यहाँ सब कुछ उपलब्ध है लेकिन हम विकासशील ही रहेंगे अगले १०० साल तक , यह निश्चित है ।
    बाहर रहें और सर्दियों में यहाँ घूमकर जाएँ --यही सर्वोत्तम है।
    शुभकामनायें।

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  7. मन कर रहा है कि बार-बार इस पोस्ट को पढूं.... और आपकी फ़ोटोज़ भी बहुत खूबसूरत आयीं हैं.... इस संस्मरण को कितनी खूबसूरती से लिखा है आपने... कि बार बार पढने को मन कर रहा है....

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  8. अब इन्सटौलमेंट में कमेन्ट देना पड़ रहा है ना.... क्यूंकि बार-बार पढ़ रहा हूँ....

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  9. han han ..thik hai ...log aate hain..bina bataye bhag jate hain .. :( hehe..waise mumma se khabar mili thi ki aap aa rahi hain...jis din main mumma ke ghar tha..aur aap ko chat pe unhone bataya tha..heheh... usi din .. khair ab to googly ho gayi .. han bada vristit lekha jokha diya aapne di ... :) ye badhiya kkiya

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  10. सभी को पढकर लगा,
    आपकी भारत यात्रा अच्छी रही।
    महफ़ूज जी ने बताया था कि आप
    लखनऊ पहुंचेगी लेकिन हमारे लिए तो
    लखनऊ,मुंबई,दिल्ली सब दूर है।
    सारे ही 1300-1400 कि.मी.हैं।

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  11. इरादा मत बदलो शिखा ....हमारा देश है, चाहे जैसा भी है.

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  12. अरे वाह....भारत प्रवास की रिपोर्ट छप भी गयी....
    तुमसे मिलना एक सुखद अनुभूति थी...जितना भी वक्त मिला ...एक एक पल जिया था ...ये यादें हमेशा मन पर अंकित रहेंगी....तुम्हारे अपनेपन ने ये महसूस ही नहीं कराया कि हम पहली बार मिल रहे हैं...इस रिपोर्ट में कुछ ज्यादा ही प्रशंसा कर दी है...तुमसे मुलाक़ात के पल मेरी जिंदगी में एक धरोहर हैं....
    संस्मरण बहुत बढ़िया लिखा है..बिलकुल आँखों देखा वर्णन लग रहा है पढ़ कर....बिजली जाने कि त्रासदी झेलनी पड़ती है सबको....दिल्ली में ये मुश्किल थोड़ी कम है...सारे अनुभव बहुत खूबसूरती से लिखे हैं...

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  13. मन को छू लेने वाले संस्मरण...

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  14. रश्मि जी द्वारा लिखा भी वृत्तांत पढ़ा था ..
    आज आपका लिखा भी पढ़ा ... अच्छा लगा ..
    तथाकथित आभासी दुनिया में भी यथार्थता का
    आग्रह है , भावुक सरसता है , मेल-मिलाप है ,
    'अंडरस्टैंडिंग' है , सूझ-बूझ है , देशिक चिंतन है ,
    समय-समाज की फ़िक्र है , , , यह सब प्रीतिकर है !
    ........... आभार !

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  15. बहुत सुन्दर रिपोर्ट लिखी है शिखा...
    तसवीरें बहुत सुन्दर लगीं...
    आभार....

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  16. ब्लॉग वाणी पर तुमलोगों की तस्वीर उलटी क्यों आ रही है ??

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  17. Nice.. Shesh tippani hindi main..

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  18. mujhse to nahi mili, uchhli kudi, masti hi masti aur main?

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  19. तो आप आयीं और चली भी गयीं? हम तो आपको इलाहाबाद घुमाने के चक्कर में थेलेकिन कुछ पता ही नहीं चला। इस बीच मेरी ब्लॉगरी बन्द सी हो गयी थी।

    कोई बात नहीं अगली बार सही। आपकी रिपोर्ट मजेदार है। :)

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  20. Sahi kaha aapne.. Mahfooz bhai ne aisa hi wada mere sath karke poora 1 din latkaya tha.. ha ha ha
    wo sirf pyar hi hai apne logon ka jo jyada nahin badalta aur sdab badal raha hai Bharat me.. khaskar bade shahron me.

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  21. आपके मुम्बई पहुंचने के कुछ दिनो बाद मै मुम्बई पहुंचा वरना आपसे मुलाकात हो ही जाती । चलिये आपकी यह यात्रा बढ़िया रही जानकर अच्छा लगा ।

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  22. हेलिकॉप्टर तो आज ब्लास्ट हो गया ... .

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  23. @ रश्मि दी ! हाँ दी आपसे नहीं मिल पाई..ये अफ़सोस तो है परन्तु अपनी हर मस्ती में आप लोगों को याद किया मेने.
    @ शरद जी ! जी हाँ मुझे भी यही लगा ..बस कुछ दिन की ही दूरी रह गई मुंबई ब्लोगर्स मीट में और मेरे वहां पहुँचने में

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  24. बड़ा ही बेहतरीन रहा भारत प्रवास...सो तो होना ही था. अच्छा लगा पढ़कर.

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  25. aapka yh sansmaran or bharat pravaas bahut achcha laga..

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  26. चित्रों के साथ आपका प्रवास संस्मरण बहुत बढ़िया रहा!

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  27. अरे शिखा जी, हम भी नोएडा में रहते हैं...दिल्ली आकर चली गईं...काश शखुदीप को भी आपके दर्शन का सौभाग्य मिल जाता...पता चलता तो खुद ही दौड़ा दौड़ा चला आता बिना हेलीकॉप्टर के...

    आपकी और रश्मि बहना की मुलाकात पर मक्खन कुछ कहना चाह रहा है...बस करेक्शन इतना है कि ये मुलाकात 2010 की नहीं 2011 की है...

    2011
    शिखा वार्ष्णेय और रश्मि रवीजा की दूसरी मुलाकात...

    दोनों दो घंटे की मुलाकात के दौरान चुप रहीं...

    दोनों का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में आ गया...

    जय हिंद...

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  28. बहुत अच्छा लगा मैम,
    आप भारत आयी थी.
    आपका यात्रा संस्मरण पढना सुखद अनुभव रहा!!!!

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  29. बहुत बढिया संस्मरण्……………ऐसी यादें तो सहेजने के लिये होती हैं।

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  30. यादें होती ही है संजोने के लिए और उनको अपनों के बीच बांटने के लिए

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  31. सुन्दर रिपोर्ट है ...
    तसवीरें सुन्दर लगीं ...
    आभार ....

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  32. शिखा जी....सही कहा अपने....महफूज़ भाई की तो हमेशा गाड़ी ही छुट जाती हैं
    पहले रश्मि जी का लिखा पोस्ट पढ़ा अब आपका पढ़ा, रात को भी पढ़ा था.....लगता नहीं कि रश्मि जी और आप पहली बार मिले थे......वर्षो से बिछड़ी सहेलियां लग रही हैं मुझे तो......

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  33. ओह्हो द्वारका तक आये थे आप......बहुत बहुत नजदीक से गुजर गये आप तो, और हमें खबर भी ना लगी........

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  34. @ खुशदीप जी ! अगर पता होता कि आप नोयडा में रहते हैं तो जरुर मुलाकात होती अपनी छोटी सी कुटिया भी वहीँ है...और इस मक्खन ने कब कुछ गलत कहा है जो अब कहेगा :).

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  35. शिखा, ये सबसे मिलाने का वर्णन बहुत बढ़िया रहा . लगा रहा है की ये प्रवास कुछ कम ही रहा, सबसे मिली कहाँ? वैसे तुम्हारे लिए ये प्रवास यादगार रहा और हमें तो अनुभव बाँट लेने का सुख मिला

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  36. अच्छा लगा पढ़कर विवरण । लगता है कि आप भुल गयीं थी कि मैं भी नोएडा में ही रहता हूँ ।

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  37. लोगों के दिलों में अपनों के लिए प्यार ,
    दोस्ती का जज्बा ,
    झुलसती गर्मी में पनपती रिश्तों कि गर्माहट .....
    .जो हमें बांधे रखती है अपनी मिट्टी से ...
    और हमेशा बांधे रखेगी ...
    शायरों और कवियों को मात देने वाले ऐसे शब्दों का प्रयोग....
    आपकी यात्रा के इस वर्णन ने भावुक कर दिया शिखा जी.

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  38. भावनाओं की तरंगों को आपने बेहद ज़ज़बाती हो कर लिखा है. बढिया!

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  39. वाह ... बहुत अच्छा लगा आपका व्रतांत ... राशनी जी के ब्लॉग पर भी आपकी मुलाकात के बारे में जान कर अच्छा लगा ... सच में बहुत अच्छा लगता है जब नेट के माध्यम से जुड़े तार दिल के तारों से मिल जाते हैं ...

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  40. acchha laga apke experiences padh kar aur jaan kar ki jab hamare door rahne wale apni maati ki sondhi mahak pate hai to kitne chahak uthte hai..

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  41. shandaar sansmaran....chahe kitne hi paseene aayen par rishton ki garmaahat to apko yahin milegi "पर नहीं बदला तो वो है वहां के लोगों के दिलों में अपनों के लिए प्यार , दोस्ती का जज्बा , झुलसती गर्मी में पनपती रिश्तों कि गर्माहट ......जो हमें बांधे रखती है अपनी मिट्टी से ...और हमेशा बांधे रखेगी ....जय हिंद......"
    photos bhi achchhi lagi...jai hind

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  42. हा हा हा हा .......खुशदीप भैया... यह हेलीकाप्टर भी अजीब चीज़ है.....

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  43. बढिया संस्मरण... ऐसे ही आती रहिये ..वहा तो वैसे भी होलीडे कान्सेप्ट है..
    अच्छा लगा पढकर..

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  44. Bada maza aaya padhke..kaash aapka bharat laut aaneka irada phirse zor pakad le,to maibhi aapse milneki ichha poori kar sakun!

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  45. वाह शिखा जी ...मज़ा आ गया आपकी रिपोर्टिंग पढ़ कर ....और आप तो बला की खूबसूरत हैं ....यही तस्वीर लगाइए न ब्लॉग में .....!!

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  46. शुरु से आखिर तक बिना रुके पढ डाला । अच्छा लिखा है।

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  47. dont get confused its me..Taru:)

    waaaaaaaaaaaah Di....aap to bahut hi jeewant likhtin hain ye sab sansmaran......padh to kai baar chukin hoon.....:D kuch kaha nahin kabhi..hehehe :P

    झुलसती गर्मी में पनपती रिश्तों कि गर्माहट ......जो हमें बांधे रखती है अपनी मिट्टी से ..

    ye line bahut bahut bahut achhi lagi dil ko chhu gayi.....ekdum.....:)

    Sangeeta Ji ke ghar to main bhi gayi thi......hehehhee....magar koi blog ni naa..werna main bhi aisa kuch likhti....:(

    khair.....

    bahut achcha laga ye sab padhkar...aur Rashmi ji ke blog par bhi yeh sab padha tha..aapki aur uni mulaaqaat,,,..

    aap donon ki baatein kushi chehra sab yahan dikhayi de raha tha aur sunayi bhi de raha tha..:):)

    bhagwaan aap sabki muskaan barqaraar rakhe.Ameen......:)

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