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Wednesday, 13 January 2010

खुशदीप जी के १० पॉइंट्स का दूसरा रुख

इस पोस्ट की प्रेरणा मुझे खुशदीप जी की पोस्ट से मिली है. अभी १- २ दिन पहले उन्होंने पत्नियों को समझने के १० commandments बताये थे. जो बहुत मजेदार थे सबने बहुत आनंद उठाया ,परन्तु वो सिक्के का एक पहलू था , और दूसरा पहलू न दिखाया जाये तो ये बात तो ठीक नहीं .तब मैने वादा किया था खुशदीप से कि पतियों के गुण मैं बताती हूँ अब वादा किया था तो निभाना तो पड़ता ही... हाँ जरा देर जरुर हो जाती है .आखिर पति -पत्नी सिक्के के २ पहलू की तरह ही होते हैं...तो यहाँ मैने उसी दुसरे पहलू को रखने की कोशिश की है....किसी की भावनाएं आहत करना मेरा मकसद नहीं ..अत : कृपया कोई इसे अन्यथा न ले.
  1. .अगर पति बिना किसी कारण फूल लेकर आये तो उसके पीछे जरुर कोई कारण है........- मोल्ली मैक गी
  2. पति नाम के प्राणी के पास बेशक एश्वर्या जैसी बीबी हो फिर भी उसकी नजर पड़ोस की काजोल पर ही होती है....... Anonymous
  3. पति आग की तरह होते हैं जिन्हें दायरे में न रखा जाये तो काबू से बाहर हो जाते हैं .........Zsa Zsa Gabor .
  4. पति पाना एक कला है और उसे टिका कर रखना एक कठिन कार्य ........Simone De Beauvoir
  5. सुयोग्य पति पत्नी को सम्मान का अधिकारिणी बना देता है..... .मनुस्मृति
  6. पति और पत्नी पक्के और सच्चे साथी है . वे दोनों धर्म , अर्थ .काम , मोक्ष इन चारों पदार्थों की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास करते हैं .........डा. राधाकृष्णन
  7. पत्नी पति की अर्धांगिनी और परम मित्र है .संसार में जिसका कोई सहायक ना हो ,उसका पत्नी जीवन यात्रा में साथ देती है.......महात्मा गाँधी
  8. केवल घर में रहने से कोई गृहस्थ नहीं होता .पत्नी के साथ रहने से मनुष्य गृहस्थ कहलाता है , जहाँ भार्या है वही घर है .भार्या विहीन घर तो वन तुल्य है .....बृहतपाराशर संहिता
  9. पतियों में दृष्टि होती है , पत्नियों में अंतर्दृष्टि .......विक्टर हुयुगो.
  10. पति वो जीव है जिसे रोटी दो तो हड्डी के लिए गुर्राता है ,पर दुत्कारो तो मिमियाता चला आता है...... . Anonymous

45 comments:

  1. kya baat hai,sabhi patniyon ki aur se dhanyavad.

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  2. वाह शिखा ,
    क्या पॉइंट्स ढूंढ के लायी हो.....सच ही ये सिक्के का ..सिक्के का नहीं खुशदीप जी कि पोस्ट का दूसरा रुख है .

    बहुत बढ़िया....आनंद आया पढ़ कर...और अब सबको मनन और चिंतन भी करना चाहिए इन बिन्दुओं पर....

    शुभकामनाओं के साथ

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  3. बहुत खूब! नहले पे दहला मार दिया आपने!!

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  4. bahut hi badhiya ji........:)manusmriti jayada pasand aayi .........baaki bhi behtareen hain aapke prayaas ko salam

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  5. वाह वाह ...पतियों के अन्दर छुपे सारे गुण उजागर कर दिए आज तो.... इन अनमोल वचनों के प्रकाश में उन्हें देखना एक अलग ही अनुभव है...पर तुमने दरियादिली भी दिखाई है....पतियों की कुछ खूबियों को भी बताया है.....पर वो तो एक नारी ही बता सकती है,ना जो पत्नी भी है..क्यूंकि उसमे तो अंतर्दृष्टि है...जबकि पतियों में केवल दृष्टि...बहुत खूब..

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  6. अरे! बाप रे.... आपने तो पूरी क्लास ले ली.....

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  7. बहुत बढिया लगा पढकर ।

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  8. हमे तो यह सिखाया था पति पत्नी एक ग्रहस्ती रुपी गाडी के दो पहिये है. और आपने तो सिक्के के दो पहलु बता दिये . खैर पति के कहे के खिलाफ़ चलना पत्नियो का जन्मसिद अधिकार है .

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  9. अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे...:):)

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  10. क्या शिखा ,अब व्यंग्य भी !कुछ तो छोड़ दीजिये ,पति पत्नी और गृहस्थी से लबरेज ये चाय बेहद अच्छी और ताजगी देने वाली रही |धन्यवाद

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  11. बहुत बढ़िया।
    लोहिड़ी पर्व और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  12. Pahli Baar Aapke Blog par aaya. APka "SPANDAN" vakai SPANDIT karta hai... Postings Bhi Behad Sanjeede hain aur Sundar bhi...



    Regards


    Ram K Gautam

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  13. मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामना . भगवान सूर्य की पहली किरण आपके जीवन में उमंग और नई उर्जा प्रदान करे

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  14. हा हा हा !शिखा जी, अब तो फूल लाने से पहले कारण तलाश करना पड़ा करेगा।
    वैसे टिका कर रखना इतना मुश्किल भी नहीं।

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  15. खुशदीप जी की पोस्‍ट पढ़ी नहीं लेकिन इस पोस्‍ट को पढ़ने से लग रहा है कि वह भी बहुत ही प्रेरक रही होगी तभी तो इतनी सटीक पोस्‍ट आयी है। आनन्‍द आ गया। बधाई।

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  16. आपने सिद्ध कर ही दिया
    पत्नियों में अंतर्दृष्टि होती है .......विक्टर हुयुगो.

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  17. हम्म, यह भी सही रही। :)

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  18. ईंट और पत्थर के बीच हम क्या कहें? भाग लिए।

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  19. very nice............makar sankranti ki shubhkamnaye.............

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  20. शिखा जी,
    अभी आफिस से घर आकर ही बैठा हूं...आदत के मुताबिक आते ही लैपटॉप खोला तो टिप्पणी वाले कॉलम में आपकी पोस्ट पर नज़र पड़ी...पहली बात तो आपके जज़्बे को सैल्यूट...पतियों की वाट लगाने के लिए अच्छा खासा शोध कर डाला...एक से बढ़ कर एक नगीने निकाले आपने...यही तो मैं चाहता हूं कि ब्लॉगवुड में ऐसा ही हंसी-खुशी का माहौल बना रहे...एक-दूसरे की टांग खिंचाई भी हो तो सबको मज़ा आए...कटुता का कहीं
    नामों-निशान न रहे...ये अहम के चक्कर में ही सारे टंटे होते हैं...

    वैसे आपको एक बात बताऊं, आपने खामख्वाह इतनी मेहनत की, अगर मुझसे पूछते तो मैं एक ही लाइन में
    सारा सार बता देता... दुम 14 साल नली में रखी, निकाली...फिर टेढ़ी की टेढ़ी निकली...एक बात और मेरी पत्नीश्री
    भी आप ही के क्लब में शामिल है...

    आपको लोहड़ी और मकर संक्रांति की बधाई...

    जय हिंद....

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  21. किसी आदमी से यह नहीं पूछा जायगा की उसने अपनी बीवी को क्यों पीटा है। ....पैगम्बर

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  22. शादी ने हमने की नही मगर फ़िर भी खुशदीप जी ने पतियों वाली केटेगरी मे हमे दार्शनिक बना दिया था और अब आपकी पोस्ट पढ कर लग रहा है कि हे तुच्छ प्राणी तुम तो इसमे से किसी केटेगरी के नही हो संभवत इसीलिये तुम स्वतंत्र हो।

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  23. वाह शिखा ...में सोचती ही रह गई और तुमने पोस्ट भी कर दिया ....कोई बात नहीं ....कुछ और जोड़ लो इनमे .....
    .......man 's love is of man's life a thing apart,"tis woman' s whole existence.[ BYRON ]
    .......limited is his natur, infinite in his desires [ LAMARTINE ]
    ........man is a reasoning rather than a reasonable aimal [ALEXANDER HEMILTON ]
    ......man loves little and often, woman much and rarely [ BASTA ]
    ......man is to man all kinds of beasts, a fowning dog, a roaring lion, a thieving fox, a robbing wolf, a dissembling crocodile, a treachous decoy and a rapacious culture [COWLEY]

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  24. शिखा जी,
    हंसी मज़ाक अपनी जगह है,
    पोस्ट पढ़कर आनंद भी आया और चिंतन भी किया
    मेरा मानना है-
    ये सोचकर शक को कभी दिल में जगह न दी
    बुनियाद तो यकीन है, रिश्ता कोई भी हो
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  25. एक से बढ़कर एक
    शेफाली जी ने तो मिसाइल दाग दी

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  26. आज 14 जनवरी हो गयी आपका ब्लॉग अभी भी 13 जनवरी दिखा रहा है

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  27. शिखा जी-
    सारी सुक्तियां सत्य है और ध्रुव सत्य हैं।
    हा हा हा
    दृष्टि की जगह दूरदृष्टि हो्ता तो आनंद और बढ जाता।
    इस पोस्ट को मै 5 स्टार देता हुँ। आभार

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  28. shikha ji

    mazaa aa gaya khushdeep ji ki post par aapka jawaab padhkar aur usmein char chand shaifali ji post ne bhi laga diye.

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  29. गुलाम पर बेगम...

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  30. shikha ji great....writer and your blog

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  31. अरे बाप रे ........ आपने तो पूरी क्लास ले ली .......... आपकी अगली पोस्ट तक कमपूटर छुपा कर रखना पड़ेगा .... कहीं पत्नी ने पढ़ लिया तो फिर हमारी तो खैर नही .......... मज़ा आ गया पढ़ कर .......

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  32. शादी से पहले लड़का-लड़की दोनो दिल से काम लेते हैं। शादी हो जाने पर पति जल्द ही दिमाग चलाने लगता है और पत्नी दिल से लगी रहती हैं। कुछ दिनों बाद जब पत्नी दिमाग चलाने लगती है तो पति का दिमाग काम करना बन्द कर देता है। इसलिए बेहतरी इसी में है कि पति अपना दिमाग दुरुस्त रखें और पत्नी का दिल प्यार में धड़कता रहे और सेहतमन्द रहे। जिस घर में बुद्धि और भावुकता का उचित संतुलन कायम रहता है वहाँ खुशियाँ बरसती हैं। समझदारी इसी में तो कायम है।

    ये पंक्तिया किसी विद्वान से उधार ली हुई नहीं हैं। सब मित्रों से हुई चर्चा का सार है।:)

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  33. हा हा शिखा जी,
    बहुत मज़ेदार।
    इसमें कंडिका क्रमांक २ में वर्णित मोहतरमाओं का पता बतलाया जाए। हम उनकी सोसाइटी में मकान लेने के इच्छुक हैं। सिर्फ़ ये पता लगाने के लिए के ये बात क्या वाक़ई सही है ?
    हा हा।
    आपको मकर संक्रांति पर्व की बधाई।

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  34. Shukriya Shikha ji , aapne patniyun ke vipaksh me pation ka paksh rakha, ya unka kartavye bataya/ dhanyebad, hame bhi feel hua padhne ke baad ki hum aur bhi achche pati ban sakte hain,
    nhi kya ? kuch galat
    aap ke pation per tippadi collection ke liye
    dil se dhanyebad...

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  35. हा..हा.. आप तो पत्नी पुराण के संग्रह उठा लाइ!!! अच्छा जवाब!!!

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  36. ओतेरे कि ,उस दिन खुशदीप भाई को पढ के जितना खुशदीप हुए आज आपने उतना ही हमें फ़ुस्सदीप कर दिया बताईये भला । ऐसे ऐसे बोल बचन ,....न बोल बचे बोलने को न बचन बचा कुछ बांचने को । ये होते हैं पति , मैं टिक लगा रहा हूं कि कित्ती कैटेगरी में आ जाता हूं । आखिर आजकल मल्टी स्पेशलिटी का जमाना है भई । अब समझा कि हमसे लोग क्यों पूछ रहे थे कि ...क्या हम शादी शुदा हैं ??
    अजय कुमार झा

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  37. हा हा हा हा हा पति रुपी प्राणी का इतना बखान सुन ली अब और क्या कहूँ? पत्नी का महत्व पति लोग बुढ़ापे में समझते हैं जब उम्र दगा दे जाती, उसके पहले कहते कि ''रोज़ रोज़ घर का खाना किसे अच्छा लगता'' और ''घर की मुर्गी दाल बराबर'' हा हा हा हा | पति की जेब ख़ाली कराने की कला पत्नियों को और अच्छी तरह सीखनी चाहिए, आदत तो जानी नहीं है तो क्यों न अपनी तिजोरी को बढ़ाया जाये, फूल तो मुरझा जायेगा न| यूँ ये कहावत सच है कि ''बिन घरनी घर भूत का डेरा''| शिखा जी मज़ा आ गया पढ़कर, यूँ हीं हम औरतों का ज्ञान चक्षु खोलती रहें, शुभकामनायें|

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  38. हे ईश्वर रक्षा करना, अब मैं नि:सहाय हुं.

    रामराम.

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  39. shikha ji aapki kavitao me ek nayapan hai. lagataa hai ki aap navgeet ki vichaardhara se prabhavit hain

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  40. मजेदार घरेलू-सूक्तियां हैं!

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  41. ये पति पुराण मुझ से कैसे छूट गया?????????? आज वाणी जी की पोस्ट देख कर आयी हूँ बाकी कसर उन्होंने पूरी कर दी बहुत मजेदार पोस्ट है बधाई आपकोाउर शुक्रिया खुशदीप का जिसने ये पोस्ट लिखवा दी।

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