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Saturday, 19 December 2009

बर्फ के फाहे

यहाँ आजकल बर्फ पढ़ रही है तो उसे देखकर कुछ ख्याल आये ज़हन में view from my house window .
छोटे छोटे रुई के से टुकड़े
गिरते हैं धुंधले आकाश से
और बिछ जाते हैं धरा पर
सफ़ेद कोमल चादर की तरह
तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है,
बरसता है बर्फ के फाहों सा
और फिर ......
बस जाता है दिल की सतह पर
शांत श्वेत चादर सा।
और मैं ओढ़ के उसे
लिहाफ की तरह।,
सो जाती हूँ निश्चिन्त।
उसमें बसी
तेरे प्यार की गर्माहट
देती है यूँ हौसला
जिन्दगी की कड़ी सर्दी से उबरने का.

37 comments:

  1. तेरे प्यार की गर्माहट
    देती है यूँ हौसला
    जिन्दगी की कड़ी सर्दी से उबरने का.

    बेहद प्यारी कविता...अनछुए अहसास लिए

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  2. बर्फ कि गर्माहट को बहुत खूबसूरती से...लिखा है आपने......

    बहुत सुंदर कविता.....

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  3. अच्छे बिम्ब और उपमा -प्रतीकों की मनभावनी प्रेम कविता

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  4. शिखा,
    यहाँ भी यत्र-तत्र- सर्वत्र बर्फ-बर्फ नज़र आ रहा है...
    परन्तु बालिके मेरा कविमन काहे नहीं गा रहा है ?
    ड्राइववे से बर्फ कैसे हटाऊँ यही नहीं बुझा रहा है
    तुम्हारी कविता पढ़ कर अब कुछ आईडिया आ रहा हैं....
    हा हा हा हा....

    लेकिन कविता !!....प्रेम की गर्माहट लिए हुए हैं...खूबसूरत...!!

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  5. वाह..!
    बर्फबारी का बहुत ही सुन्दर चित्रण है!
    बधाई!

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  6. जिन्दगी की कड़ी सर्दी से उबरने का.
    बर्फ भी इतना गर्म होता है क्या!
    बहुत सुन्दर

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  7. Burf dekh bahut sunder bhav ukere hain. Achcha laga padh kar.


    Roman me likhne ke liye mafi, computer ne virus hamle me dum thod diya hai, do boond aandhu usi ke naam)

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  8. प्रेम का यही तो चमत्‍कारी रूप है शीतल बर्फ एहसासों से गर्म लगने लगती है. धन्‍यवाद.

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  9. कितना सकून देती है शिखा की कविता ,हम सिर्फ बिम्बोंको महसूस नहीं कर रहे उन्हें खुद में उतरते देख भी रहे हैं |अहा ,अहा अहा ............

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  10. shikha ji apke ghar k baahar ka view to bahut khoobsurat hai...aur is mausam ko dekh jo apne ranchna likhi usne ye baat siddhh kar di 'Jaha na pahuche ravi vaha pahuche kavi' means baraf ko girte dekh apko pyar ke faahe vo bhi garmahat dete huai mehsoos huai.waah kya imagination hai..kaha.n kaha.n pahuch jati hai na kalpnaaye..bahut khoob...

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  11. Sunder rachna Shikha ji..
    bahut badhiya .. []:)

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  12. बर्फ के फाहे ओढ़ कर गर्माहट पा लेना..खूबसूरत अंदाज़े-बयां -)

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  13. बर्फ़ीली सर्दियों में किसी भी पहाड़ पर
    वादी में गूंजती हुई खामोशियां सुनें
    आंखों में भीगे-भीगे से लम्हे लिए हुए...

    दिल ढूंढता है, फिर वही फुर्सत के रात-दिन
    बैठे रहे तस्सुवर-ए-जाना किए हुए...
    -गुलज़ार

    जय हिंद...

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  14. • बर्फ के फाहे • हे नारी तू हड़प्पा है. • आँखों का सागर. • अन्तर-जाली रिश्ते. • उछ्लूं लपकूं और छू लूँ • करवट लेती जिन्दगी. • तुम्हारे लिए • शुक्र की मंगल से होड़ • दो पाटों के बीच में ...... • कुछ रंग बिरंगी फुआरें • ऐ सुनो ! • रुकते थमते से ये कदम • लो फ़िर आ गई दिवाली • मैं हिंदी हूँ. • करवा चौथ बदलते परिवेश में Powered By Tech Vyom
    Saturday, 19 December 2009
    बर्फ के फाहे
    यहाँ आजकल बर्फ पढ़ रही है तो उसे देखकर कुछ ख्याल आये ज़हन
    में
    view from my house window .



    छोटे छोटे रुई के से टुकड़े
    गिरते हैं नीले आकाश से
    और बिछ जाते हैं धरा पर
    सफ़ेद कोमल चादर की तरह
    तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है,
    बरसता है बर्फ के फाहों सा
    और फिर ......
    बस जाता है दिल की सतह पर
    शांत श्वेत चादर सा।
    और मैं ओढ़ के उसे
    लिहाफ की तरह।,
    सो जाती हूँ निश्चिन्त।
    उसमें बसी
    तेरे प्यार की गर्माहट
    देती है यूँ हौसला
    जिन्दगी की कड़ी सर्दी से उबरने का
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

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  15. मैं ओढ़ के उसे
    लिहाफ की तरह।,
    सो जाती हूँ निश्चिन्त।
    उसमें बसी
    तेरे प्यार की गर्माहट
    देती है यूँ हौसला
    जिन्दगी की कड़ी सर्दी से उबरने का....

    सच में किसी के प्यार में इंसान पत्थर काट कर नदी भी बहा सकता है ...... प्यार का रेशमी एहसास जगाती .... सफेद बर्फ की चादर में धूप जगाती बेमिसाल रचना है ......

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  16. बहुत ही सुंदर रचना है।

    pls visit...
    www.dweepanter.blogspot.com

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  17. विलम्ब....
    जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं....!


    --
    शुभेच्छु

    प्रबल प्रताप सिंह

    कानपुर - 208005
    उत्तर प्रदेश, भारत

    मो. नं. - + 91 9451020135

    ईमेल-
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  18. बर्फ के फाहों में लिपटी मौसम की सुगबुग आहट --सुन्दर चित्र के साथ सुन्दर लफ्ज़ बुन दिए हैं आपने शुक्रिया

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  19. ek bahut hi narm nazuk ahsaas liye kavita.........sardi mein bhi komal ahsaas karati huyi.

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  20. शिखा प्रेम की परिभाषा को जिस खूबसूरती से आपने उकेरा है,कहना मुश्किल है। सिर्फ़ अच्छी कह देने से काम नही चलेगा। सचमुच दिल पर छा गई आपकी यह रचना। एक बार नही कई बार आ आकर पढ़ा और महसूस किया। बहुत खूबसूरत खयालो से लबरेज़ आपकी रचना दिल को भा गई।

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  21. कविता अच्छी लगी आपकी, आगे भी अच्छी लाईनों का इंतजार रहेगा.

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  22. shikha ..barf neele aakash se nahi barsati aakash ka rang kabootri hota hai us samay jab barf gir rahi hoti hai .. do ek sthan par ek do shabdon ke badlav ki jaroorat hai lekin kulmilakar bahut sundar abhivyakti hai ..aapse prerna pakar ek kavita barf par post karne ja raha hoon isi shyam 1950 par samay mile to ise dekhna

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  23. Achchhi drishti hai aapki...........Dil ki satah per Shwet chadar ho jana bahut hi mushkil aur bahut hi achchha hota Meri Nazar mein.......Shukriya Ek Achchhi rachna ke liye.

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  24. prem kee garmahat ko barf se pradarshit karna... is kadkadati thand mein ek hasin garmahat ka anubhav mila hai...

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  25. यही तो होता है प्रेम जो बड़ी से बड़ी मुसीबतें भी पार करा देता है बहुत सुन्दर एहसास

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  26. तेरे प्यार की गर्माहट
    देती है यूँ हौसला
    जिन्दगी की कड़ी सर्दी से उबरने का....

    क्या कहूँ शिखा जी ...अच्छा बहुत अच्छा कह देना भी आज कम पड़ रहा है बस एक सुखद फीलिंग दे गयी आपकी ये कविता !

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  27. बर्फ की गर्माहट मैंने यहाँ तक महसूस की ...सुन्दर !१

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  28. कितना आश्वस्त करती है यह गर्माहट ...जीने के लिए ...बहुत प्यारी हामी ...;)

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  29. बहुत कोमल ... खुबसूरत एहसास से भरी रचना !
    ~सादर!!!

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  30. बर्फ की चादर ओढ़ प्यार के अहसास की गर्माहट को महसूस कर निश्चिन्त हो सो जाना... अद्भुत अहसास है ! इतनी कोमल सुकुमार रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई !

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  31. बर्फ़ के उड़ते-जमते फाये कैसी मोहक माया रच गये कि मन कहाँ से कहाँ पहुँच गया !

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