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Wednesday, 18 November 2009

तुम्हारे लिए

कुछ दिनों से मेरे अंतर का कवि कुछ नाराज़ है. कुछ लिखा ही नहीं जा रहा था ...पर मेरा शत शत नमन इस नेट की दुनिया को जिसने कुछ ऐसे हमदर्द और दोस्त मुझे दिए हैं , जिनसे मेरा सूजा बूथा देखा ही नहीं जाता और उनकी यही भावनाएं मेरे लिए ऊर्जा का काम करती हैं ॥ इन्हीं में एक हैं संगीता स्वरुप जिन्हें मैं दीदी कहती हूँ और ये कविता उन्होंने लिखी है मेरे लिए ..अब इतनी अच्छी कविता कोई किसी के लिए लिखे तो बांटने का मन तो करेगा ही न और उसके लिए आपसे अच्छे साथी कहाँ मिलेंगे मुझे ? तो लीजिये आपके समक्ष है ये कविता -
 
तुम्हारे लिए -


"मन की अमराई में तुम 
कोयल बन कर आ जाती हो 
घोर दुपहरिया में तुम 
मीठे बोल सुना जाती हो ।
उजड़े हुए चमन में जैसे 
फूल सुगन्धित बन जाती हो 
वीराने में भी जैसे 
बगिया को महका जाती हो ।
उद्द्वेलित सागर को भी जैसे 
मर्यादित साहिल देती हो 
सीली - सीली रेत पर जैसे 
एक घरौंदा बना जाती हो ।
जेठ की दोपहर में भी तुम 
शीतल चांदनी बरसाती हो ।
गम की घटा को भी हटा तुम 
बिजली सी चमका जाती हो ।
शुष्क हवाओं में भी तुम 
मंद बयार बन जाती हो 
मन के सारे तम को हर 
दीप - शिखा सी बन जाती हो। 
दीदी ( संगीता स्वरुप )

27 comments:

  1. ek ek shabd mein poori sachchai hai....

    main Sangeeta di.... ka dil se shukriya adaa karta hoon..... ek shabd jeevant aur sach hai....Sangeeta di.... aapki lekhnee ko naman.... aapne wahi likha ...jo main likhna chahta tha....

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  2. Bahut sunder kavita hain.
    Keep it up.

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  3. वह संगीता दी......
    चुन चुन के सब्दो को पिरोया है.....

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  4. bahot achcha prayas hai sangeeta ji..... virodhi shabdo ko aapne bahot sunder tarike se prayog mai liya hai....
    '' uddwailit sagar ko bhi maryadit''...bahot achchi pankti hai. aur ye nischit roop se shikha ji ke vyaktitve ke anukool hai... is sunder aur taazgi bhari kaita ke liye dhanyawad....

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  5. व्यक्तित्व के हर पहलू को समेट लिया है इस कविता ने...और हर पहलू एक दूसरे से होड़ लेता हुआ....बहुत महसूस कर के उकेरा है अपनी भावनाओं को..और अच्छी तरह शब्दों में पिरोया है.... lucky u r to hv such a wonderful DIDI in ur life...my regards to DIDI

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  6. Bahut hi saral shabdon me sundar hi nahin balki behatreen kavita, kshetreeya bhasha ke shabdon ka pryog achchha laga...
    Shikha maam, kabhi www.swarnimpal.blogspot pe bhi nazr-e-inayat kar liya kiziye... hazaaron meel door baithe apne logon ke blog aap dekh leti hain aur jo ek apna itne kareeb baitha hai usko ignore kar deti hain .. koi karan???/ :)
    Jai Hind...

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  7. सीधी - सीधी बातों को
    उतार दिया गया है |
    सुन्दर ...

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  8. are...ye kavita nahi aap hain kavita ke roop mein...dekha to nahi hai par ab thodi si pahchaan ho rahi hai...kavita se ye bhi lag raha hai ki aapse milna padega...itni gunmayi jo ho usse milna hi chahiye...
    bahut hi sundar kaviya..
    aapki didi ko hamara bhi pyar dijiye...
    pata nahi kyun ham par koi kavita kyun nahi likhta ???
    KYUN ?? :):)

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  9. itna pyaaaaaaaaaaaar......tum iske layak ho aur sangeeta ji ne kamaal ka likha hai

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  10. शिखा जी
    आज इस बारिश की
    बोछार देख याद आया
    तेरा प्यार भी कभी
    यूँ ही बरसा करता था.
    ऐसे भाव विभोर कर देने वाले शब्दों की रचयिता के लिये..
    ''दीदी'' संगीता स्वरुप जी ने जो कहा,
    उससे हम तो सहमत हैं
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  11. main phir aa gaya......... bahut achchi kavita hai..... isliye phir aa gaya padhne.......

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  12. शुष्क हवाओं में भी
    तुम मंद बयार
    बन जाती हो
    मन के सारे
    तम को हर
    दीप - शिखा सी
    बन जाती हो।

    -बहुत सुन्दर !!!

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  13. bahut hi sunder rachana,mann mein bas gayi.

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  14. अरे--- यहाँ तो मैं ये सोच कर आई थी कि तुमने कोई नयी रचना पोस्ट की है.
    पर ये तो तुमको लिखी कविता है.मेरी भावनाओं को इतना मान और प्यार
    देने का बहुत बहुत शुक्रिया .
    आप सभी का शुक्रिया कि आपने रचना को सराहा. मन की भावनाएं जब सराही जाती हैं
    तो बहुत सुकून का आभास होता है. शिखा शुक्रिया कि इतने अच्छे पाठकों से मेरा परिचय कराया.
    मैं तुमसे बिना पूछे यहाँ अपने ब्लॉग का लिंक दे रही हूँ. यदि कोई पढना चाहे तो
    मेरे ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ....

    http://geet7553.blogspot.com/

    एक बार फिर तहेदिल से शुक्रिया

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  15. सुन्दर भावो से सजी कविता के लिए बधाई!

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  16. very interesting.........shabdon me kaphi gahraai dikhi...bahut hi dhyaan se likha hai...

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  17. मन के सारे
    तम को हर
    दीप - शिखा सी
    बन जाती हो।
    Bahut achhi lagi aapki rachana. Sabko is sansar mein aise hi pyar ki darkarar hai...

    Shubhkamnayen

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  18. oye hoye, ye kavita hai ya Shikha , jo sangeeta ji ke dwara rachit hai, i feel jealous from u, aapke inne badde badde fan henge ji, jo aapko apni kavita me utarte hain.., baise aapne kaun si goli fit ki hai sangeeta ji ko, ek-adh mere ko bhi dena jra,
    its a touching creation by Sangeeta ji to Shikha ji, excellent

    gaurav vashisht

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  19. main kya bolunnnnnnnnn.....apni to mumma hain wo .... :)..waise shikha di katal hai aur sahi hai

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  20. अपने भीतर के कवि को बहुत प्यार से सम्भाल कर रखना पडता है

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  21. helo shikha ji...aapkp padh kar acchha laga aur ye sangeeta ji ki rachna bahut aacchhi hai..aur apne bheetar k naraz kavi ko manaiye..intzaar rahega.

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  22. वाकई आपकी दीदी ने बहुत सुंदर कविता लिखी है
    हम सबसे बांटने के लिए धन्यवाद।

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  23. मन की कोमल भावनाओं को सुन्दर शब्दों में पिरोया है आपने ......... सुनहरे पलों को कागज़ पर उतारा है आपने ........ बहुत सुन्दर .......

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