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Tuesday, 20 October 2009

रुकते थमते से ये कदम

रुकते थमते से ये कदम
अनकही कहानी कहते हैं
यूँ ही मन में जो उमड़ रहीं
ख्यालों की रवानी कहते हैं
रुकते थमते.....
सीने में थी जो चाह दबी
होटों पे थी जो प्यास छुपी
स्नेह तरसती पलकों की
दिलकश कहानी कहते हैं
रुकते थमते....
धड़कन स्वतः जो तेज हुई
अधखिले लव जो मुस्काये
माथे पर इठलाती लट की
नटखट नादानी कहते हैं।
रुकते थमते....
सघन अंधेरी रातों में
ज्यों हाथ लिए हो हाथों में
दो जुगनू सी जो चमक रही
आँखों की सलामी कहते हैं
रुकते थमते...
लावण्या अपार ललाटो पर
सिंदूरी रंग यूँ गालों पर
मद्धम -मद्धम सी साँसों की
मदमस्त खुमारी कहते हैं
रुकते थमते......

15 comments:

  1. haan! rukte thamte kadam kuch to kahte hain..... khayaalon ki rawaangi...... yun hi chalti rehti hai..... yeh khyaal hi to hain..... jo rukte - ludhaktey..... yum hi saath saath chalte rehte hain......

    लावण्या अपार ललाटो पर


    सिंदूरी रंग यूँ गालों पर


    मद्धम -मद्धम सी साँसों की


    मदमस्त खुमारी कहते हैं


    रुकते थमते.....


    in panktiyon ne dil ko chhoo liya....

    bahut hi ehsaas se likhi gayi ek behtareen kavita....

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  2. सघन अंधेरी रातों में
    ज्यों हाथ लिए हो हाथों में
    दो जुगनू सी जो चमक रही
    आँखों की सलामी कहते हैं.......

    बहुत खूब लिखा है ...... आँखों से आँखों की सलामी ......... बेहद खूबसूरत ........

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  3. बहुत खूबसूरत लिखा है !!

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  4. लावण्या अपार ललाटो पर



    सिंदूरी रंग यूँ गालों पर



    मद्धम -मद्धम सी साँसों की



    मदमस्त खुमारी कहते हैं
    बहुत प्यारी रचना....खुमारी सी चदाती हुई .....बहुत खूब

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  5. सघन अंधेरी रातों में
    ज्यों हाथ लिए हो हाथों में
    एहसासो की सघनता और सुन्दर कविता

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  6. Ati sundar shabdo me kahi ek bahut pyari si rachna wakai dil ko chhu gaye aapke likhe shabd

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  7. वाह..शिखा जी!
    बहुत सुन्दर गीत लिखा है आपने।
    बधाई!

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  8. बहुत खुबसूरत रचना जो सहज ही मन को छू गई...बधाई !!!!

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  9. यूँ ही मन में जो उमड़ रहीं


    ख्यालों की रवानी कहते हैं अच्छी लगी आपकी यह रचना ...

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  10. बेहतरीन रचना....... साधुवाद...

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  11. रुकते थमते....
    सघन अंधेरी रातों में
    ज्यों हाथ लिए हो हाथों में
    दो जुगनू सी जो चमक रही
    आँखों की सलामी कहते हैं

    बहुत सुंदर छंद बद्ध रचना ......!!

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  12. इसे पढ़ते हुए यही गीत अंतर में गूंजते रहे....प्यार की दास्ताँ तुम सुनो तो कहें

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  13. kavitaa ki bunaavat meiN
    aapki lekhan-kushaltaa spasht dikhti hai
    apne-se lagne wale alfaaz ko
    khayaalaat meiN baandhnaa
    aap hi ke bs meiN hai
    abhivaadan svikaareiN .
    (hindi mei likhiye se kuchh bhi
    yahaan copy-paste nahi ho paata..??)

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  14. ऐन्द्रिक अनुभूति का अहसास कविता में सुंदर तरीका से उभरा है...

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