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Sunday, 30 August 2009

सौदा

दूर क्षितिज पे सूरज ज्यूँ ही डूबने लगा
गहन निशब्द निशा के एहसासों ने
उसके जीवन के प्रकाश को ढांप दिया
हौले हौले अस्त होती किरणों की तरह
उसके मन की रौशनी भी डूब रही थी
इधर खाट पर माँ अधमरी पड़ी थी
और छोटी बहन के फटे फ्रॉक पर
जंगली चीलों की नज़र गड़ी थी।
उसी क्षण उसके अन्दर की बाला
एक ज्वाला का रूप ले रही थी।
रात भर लड़ती रही थी अपने ही आप से
तोलती रही थी समाज के ठेकेदरों को
उनके सफेदी से रंगे अपराधिक हाथों से
नही था उसे मंजूर भीख में इज़्ज़त लेना
झुका कर निर्दोष पलकें, भी क्या जीना?
और नम आँखों में आख़िर उसने
सूर्य की सारी रक्तिमा समेट ली थी
अपनी हाथ की कोमल रेखाएँ
अपनी ही मुठ्ठी में भींच लीं थीं
कर पूरे वजूद को इकठ्ठा
किया फिर उसने ये फ़ैसला
नापाक निगाहों का अब भय नही था
बेबसी के आँसू अब बहने नही थे
अपनी नज़रों में गुनहगार नही अब
अपनी ही अस्मत तो उसने बेची थी
किसी की बेबसी तो खरीदी न थी

17 comments:

  1. "सौदा" एक बहुत ही भावुक, हृदयस्पर्शी अतुकांत रचना है, जो वर्तमान परिवेश में पल रहे भेडियों की करतूत का पर्दाफाश करती सच्चाई अभिव्यक्त करती है.

    नापाक निगाहों का अब भय नहीं था /
    बेबसी के आँसू अब बहने नहीं थे ..
    - विजय तिवारी " किसलय "

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  2. bhavpurna rachna.Man ko chho gayi.
    Navnit Nirav

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  3. बेहद सम्वेदनशील रचना,मन को छू गई

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  4. मार्मिक और संवेदनशील रचना के लिए बधाई!

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  5. samvedansheel rachna......... dil ko chhoo gayi.......

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  6. नापाक निगाहों का अब भय नही था
    बेबसी के आँसू अब बहने नही थे
    अपनी नज़रों में गुनहगार नही अब
    अपनी ही अस्मत तो उसने बेची थी
    किसी की बेबसी तो खरीदी न थी


    speechless...
    ultimate nazm di..

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  7. बहुत मार्मिक प्रस्तुति

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  8. मार्मिक अभिव्यक्ति.
    पंकज.

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  9. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 3 - 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ...

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  10. अपनी नज़रों में गुनहगार नही अब
    अपनी ही अस्मत तो उसने बेची थी
    किसी की बेबसी तो खरीदी न थी......संवेदना से भरपूर !!

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  11. एक बेहतरीन और मर्मस्पर्शी कविता।

    सादर

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  12. बेहद सशक्त रचना सोचने को मजबूर करती है।

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  13. मार्मिक और संवेदनशील प्रस्तुति

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  14. संवेदनशील प्रस्तुति....
    बहुत प्रभावी...
    सादर बधाई...

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  15. सम्वेदनशील रचना....
    मार्मिक प्रस्तुति....!!

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  16. अत्यंत ही संवेदन शील ह्रदय को झकझोरती शसक्त प्रस्तुति...सादर !!

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