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Monday, 18 May 2009

ओस और प्राणी


कंपकपाते पत्ते पर
ठहरी एक बूँद ओ़स की
बचाए हुए किसी तरह
खुद को.

तेज़ हवा उड़ा न दे
धूप कहीं सुखा न दे
उतरी है आकाश से
गिर न जाये धूल में.

पर आखिर
मिलना पड़ता है उसे
उसी मिट्टी में
कंक्कड़ पत्थर के बीच ही
और वो लुप्त हो जाती है
उसी धूल मिटटी की धरा में

प्राणी भी तो
जन्म लेता है
लड़खड़ाते समाज की गोद में
फ़िर बचाता फिरता है
अपने अस्तित्व को,
अपनी पवित्रता को
इंसानियत को
इस संसारी थपेड़ों से
स्वार्थ की कड़ी धूप से

पर कब तक?
आखिर मिलना पड़ता है उसे भी
इसी जर्जर व्यवस्था में
बन जाता है वो भी
उनमें से ही एक
जो बनाते हैं
इस तथाकथित समाज को
जीना जो है उसे इसी परिवेश में.

21 comments:

  1. yaar baniye kab se itna achha likhne lage......

    great poetry shikha...like it, something of my taste. keep it up

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  2. अच्छा प्रयास
    शुभकामनायें

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  3. व्यापक तुलना आपकी पढ़ा तो आया होश।
    शीर्षक में ओअस लिखा लिख दें उसको ओस।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  4. जीवन की सार्थकता को ओस की बूंदों के माध्यम से ............लाजवाब रूप मेकं कहा है आपने
    स्वागत है आपका ब्लॉग जगत में

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  5. vah vah.........bahut achhi rachna
    BADHAI HO

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  6. अच्छी शुरुआत है,जारी रखें
    http://gazalkbahane.blogspot.com/
    कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
    http:/katha-kavita.blogspot.com/
    दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
    सस्नेह
    श्यामसखा‘श्याम
    word verification हटाएं

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  7. हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है...

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  8. Sundar shuruaat hai..anek shubhkamnayen...
    sneh
    shama

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  9. संघर्ष की शुरूआत का इतना मजबूर अंत..उफ़..

    शुभकामनाएं...

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  10. उसी मिटटी में
    कंक्कड़ पत्थर के बीच ही
    और वो लुप्त हो जाती है
    उसी धूल मिटटी की धरा में
    प्राणी भी तोजन्म लेता है
    bhot hi sundar khyaal....umda

    rqt...apne blog par ek lock lagale jis se koi kavita ya gazal chori naa kar sake.
    thnxx..meri gazal bhi pade.
    www.bedildeepak.tk

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  11. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
    चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है

    गार्गी

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  12. kya baat hai

    yakeen nahi hota

    itne gahre bhaav samete huye kavita kaise likhi aapne ?

    bahut achhi kavita hai.

    meri hardik shubhkamnayen

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  13. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  14. बहुत सुंदर
    शुभकामनाएं

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  15. वाह !
    सुंदर रचना ...
    बधाई !!

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  16. बिलकुल सही बात कही है।


    सादर

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  17. सच बात कही........
    सार्थक रचना..

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  18. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  19. सुन्दर भावों से युक्त रचना.

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