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Sunday, 26 April 2009

तमन्ना

ओरों की पूरी होते देख तमन्ना,
हमने भी एक तमन्ना कर ली.
ना जाने कितने ख्वाब देख डाले एक ही रात में,
की ख्वाब देखने से ही हमने नफ़रत कर ली.
खुशनसीब होते हों दुनिया के तम्न्नाई,
हमने तो तमन्ना कर के ज़िंदगी बदल कर ली.
जहाँ मैं सभी को हक़ है तमन्ना करने का,
इस खुशफहमी ने भी आज़ हमसे रुख़्सत कर ली.
एक ही तमन्ना कर के हम पछताने लगे,
ना जाने लोगों ने इतनी तमन्ना कैसे कर ली.
बहुत सोचा की इसकी वजह क्या है?
क्यों हमने ना पूरी होने वाली तमन्ना कर ली?
आख़िर ये सोच कर की हर किसी की तमन्ना पूरी नही होती,
हमने तो आज़ तमन्ना करने से तोबा कर ली...

2 comments:

  1. सही है। ये तो तमन्ना पुराण हो गया। किया और तोबा भी कर ली।

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  2. पर तमन्ना क्या थी ? यह तो पता चले :)

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