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Monday, 27 April 2009

पापा तुम लौट आओ ना


पापा तुम लौट आओ ना,
तुम बिन सूनी मेरी दुनिया,
तुम बिन सूना हर मंज़र,
तुम बिन सूना घर का आँगन,
तुम बिन तन्हा हर बंधन.
 पापा तुम लौट आओ ना

याद है मुझे वो दिन,वो लम्हे ,
जब मेरी पहली पूरी फूली थी,
और तुमने गद-गद हो
100 का नोट थमाया था.
और वो-जब पाठशाला से मैं
पहला इनाम लाई थी,
तुमने सब को
घूम -घूम दिखलाया था.
अपने सपनो के सुनहरे पंख ,
 फिर से मुझे लगाओ ना.
पापा तुम लौट आओ ना.

इस ज़हन में अब तक हैं ताज़ा
तुम्हारे दोरे से लौटने के वो दिन,
जब रात भर हम
अधखुली अंखियों से सोया करते थे,
 हर गाड़ी की आवाज़ पर
खिड़की से झाँका करते थे.
घर में घुसते ही तुम्हारा
सूटकेस खुल जाता था,
 हमें तो जैसे अलादीन का
 चिराग़ ही मिल जाता था.
 वो अपने ख़ज़ाने का पिटारा
फिर से ले आओ ना.
पापा बस एक बार लौट आओ ना.

आज़ मेरी आँखों में भरी बूँदें,
तुम्हारी सुद्रण हथेली पर
गिरने को मचलती हैं,
आज़ मेरी मंज़िल की खोई राहें ,
तुम्हारे उंगली के इशारे को तरसती हैं,
अपनी तक़रीर अपना फ़लसफ़ा
फिर से एक बार सुनाओ ना,
 बस एक बार पापा! लौट आओ ना.

9 comments:

  1. wah wah kya baat hai......shikha ji.....bahut hi badhiya.....keep it up

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  2. Yeh poem apne aap mein ultimate hai.... maine aisi feelings kabhi nahin dekhi na hi suni..... isko aapne kahan chupa rakha tha....? तुम्हारे उंगली के इशारे को तरसती हैं,
    अपनी तक़रीर अपना फ़लसफ़ा
    फिर से एक बार सुनाओ ना,
    बस एक बार पापा! लौट आओ ना.

    waaqai mein ungli ke ishaare ko hum taraste hain....

    kaash! aisa hota ki papa laut aate.....

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  3. बहुत प्यारे भाव!

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  4. आज़ मेरी आँखों में भरी बूँदें,
    तुम्हारी सुद्रण हथेली पर
    गिरने को मचलती हैं,
    आज़ मेरी मंज़िल की खोई राहें ,
    तुम्हारे उंगली के इशारे को तरसती हैं,
    अपनी तक़रीर अपना फ़लसफ़ा
    फिर से एक बार सुनाओ ना,
    बस एक बार पापा! लौट आओ ना....
    ....
    आपने तो सच में रुला दिया शिखा जी ..सच में बाप और बेटी का प्यार या तो पिता समझ सकता है या बेटी तीसरा कोई नहीं !!

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  5. मन के कोमलतम भावों की इससे बेहरत अन्य कोई अभिव्यक्ति नहीं हो सकती ! बहुत ही सुन्दर रचना ! मन को भिगो गयी और आँखों को नम कर गयी ! इतनी संवेदनशील प्रस्तुति के लिये बधाई शिखा जी !

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  6. सुन्दर रचना, कोमल भाव...
    सादर...

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