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Monday, 27 April 2009

मेरा देश महान.



ये कैसा महान देश है मेरा....
कल के कर्णधार ही जहाँ
भूखे नंगे फिरते हैं
भावी सूत्रधार जहाँ
ढाबे पर बर्तन घिसते हैं
सृजन करने वाली माँ का
जहाँ आँचल सूखा रहता है
और सृजन का भागीदार
नशे में डूबा रहता है
ये कैसा महान देश है मेरा...

देश चलाने वाले ही
जब देश को बेचा करते हैं
और रखवाले धरती के ही
आबरू माँ बहन की लूटा करते हैं
सभ्यता संस्कृति की आड़ में
ये छवि देश की धूमिल करते हैं
ऐसा महान देश है मेरा...

पथप्रदर्शक बन नई पीढ़ी के
ये नेता बस वोटों की राज़नीति करते हैं
ओर ग़रीबी के गर्म तवे पर
स्वार्थ की रोटी सेका करते हैं
हर उत्कर्ष प्रतिभा यहाँ पर
बिना रिश्वत अधूरी होती है
ओर ८०% जनसंख्या आज़ भी
खाली पेट ही सोती है
ऐसा भारत महान है मेरा.....

अपने ही देश में रहकर वो
उसकी जड़े खोखली करते हैं
फिर चढ़ कर मंच पर श्वेत वस्त्र में
मेरा भारत महान का नारा
बुलंद स्वर में गढ़ते हैं
ऐसा महान देश है मेरा?

6 comments:

  1. देश का तो यही हाल है। ऐसे ही चलता रहेगा शायद!

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  2. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 02-02 -20 12 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज...गम भुलाने के बहाने कुछ न कुछ पीते हैं सब .

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  3. बिना रिश्वत अधूरी होती है
    ओर ८०% जनसंख्या आज़ भी
    खाली पेट ही सोती है
    ऐसा भारत महान है मेरा.....

    बहुत ही सच्चा चित्र !

    सादर

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  4. कटु यथार्थ के कसैले स्वाद को जगाती एक सशक्त और यथार्थपरक रचना !
    हमारा भारत महान ???
    एक देश जहाँ पिज़ा एम्बुलेंस से पहले घर पहुँचता है,
    जहाँ कार लोन 7% है और एजूकेशन लोन 12% ,
    जहाँ चावल 40 रुपये किलो में मिलता है और सिम कार्ड फ्री ,
    जहाँ लोग दुर्गा की पूजा करते हैं और लड़की पैदा होने पे उसका खून,
    जहाँ ओलम्पिक शूटर को स्वर्ण पदक जीतने पर सरकार 3 करोड़ रुपये देती है और दूसरा शूटर जो आतंकवादी से लड़ते हुए शहीद होता है उसे सिर्फ एक लाख रुपये देती है !
    सच में हमारा देश महान है !
    दमदार प्रस्तुति के लिये आभार आपका !

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  5. हमारे देश की कड़वी सच्चाई को एकदम निर्वस्त्र खड़ा कर दिया आपने अपनी इस रचना में...

    सादर.

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  6. अपनी महानता सिद्ध करने को वर्तमान से आँख चुरा कर अतीत की ओर दौड़ लगाते हैं ,तभी न दूसरों को बहकाये को और अपने को बहलाने की कोशिश में ,समय से आँख मिलाने का बस नहीं .

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