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Monday, 27 April 2009

एहसास का असर












अहसास तेरी मासूम निगाहों का
मेरी सर्द निगाहों से इस कदर मिला
कि  सारी क़ायनात पीछे छोड़ कर
मैं तेरी नज़रों मे मशगूल हो गया।
तेरे दिल के सॉफ आईने मे
देखा जो तसव्वुर अपना मैने
सारे जमाने की मोहब्बत का
हसीन अहसास अधूरा हो गया।
सुनी जो धीमी-धीमी रुनझुन
तेरे पावं मे खनकती पायल की
मंदिर में बजती हुई घंटी का
पावन अहसास निरर्थक हो गया

1 comment:

  1. बड़ी पावन पोस्ट है। इस फ़ोटो को सेन्टर में करके लगाइये शायद और बेहतर लगे।

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